जीडीपी के आंकड़े: मोदी सरकार के लिए अच्छी ख़बर!

भारतीय अर्थव्यवस्था

इमेज स्रोत, Rebecca Conway/AFP/Getty Images

    • Author, फ़ैसल मोहम्मद अली
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

देश की जीडीपी में पिछली पांच तिमाहियों से चला आ रहा गिरावट का ये सिलसिला अब टूट गया है.

भारतीय अर्थव्यवस्था के जीडीपी के आंकड़े अपने तीन साल के निचले स्तर से साल की दूसरी तीमाही (जुलाई-सितंबर) में एक बार फिर से रफ़्तार पकड़ती हुई दिख रही है.

केंद्रीय सांख्यकी संगठन के प्रमुख टीसीए अनंत ने जीडीपी को लेकर बेहतर ख़बर की घोषणा दिल्ली में की.

उन्होंने बताया, "दूसरी तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद में 6.3 फ़ीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. ये पिछले साल इसी अवधि में साढ़े सात फ़ीसदी थी."

लेकिन सबसे अहम बात है कि पिछले पांच बार से जीडीपी नीचे जा रही थी अब ये उसमें एक बदलाव है. पिछली तिमाही में जीडपी का आकलन 5.7 फ़ीसदी पर किया गया था.

भारतीय अर्थव्यवस्था

इमेज स्रोत, CHANDAN KHANNA/AFP/Getty Images

जीडीपी की स्थिति

नरेंद्र मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद ये देश की जीडीपी की सबसे ख़राब स्थिति थी.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ इससे पहले वित्त वर्ष 2013-14 की आख़िरी तिमाही में अर्थव्यवस्था 4.6 फ़ीसदी के दर से बढ़ रही थी.

केंद्रीय सांख्यकी संगठन के प्रमुख जीडीपी से संबंधित जानकारियां राजधानी के शास्त्री भवन में आज शाम पत्रकारों से बात करते हुए दी.

उन्होंने कहा, "ये बढ़ोतरी अर्थव्यवस्था के कुछ सेक्टर्स में बेहतरी के बूते दर्ज हुई है. इस बढ़त के पीछे निर्माण क्षेत्र में दर्ज की गई बेहतरी है जिसका फ़ीसद सात दर्ज किया गया. विधुत, गैस और जल आपूर्ति में 7.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई है. दूसरे क्षत्रों में जिन्होंने बेहतर प्रदर्शन किया है वो हैं होटल, व्यापार, ट्रांसपोर्ट और कम्यूनिकेशन जिनमें 9.9 प्रतिशत के दर से बढ़े हैं."

भारतीय अर्थव्यवस्था

इमेज स्रोत, DIPTENDU DUTTA/AFP/Getty Images

कृषि क्षेत्र

टीसीए अनंत ने कहा हालांकि कहा कि कृषि के क्षेत्र में पहले की तुलना में गिरावट आई है.

हालांकि अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में बुरी स्थिति को लेकर लगातार निंदा झेल रही नरेंद्र मोदी सरकार के लिए जीडीपी में बेहतरी की ख़बर शायद इससे बेहतर वक्त पर नहीं आ सकती थी जबकि गुजरात चुनाव होने को हैं.

लेकिन कृषि की पतली हालत को देखकर ये तो तय है कि खाने-पीने की चीज़ों के दाम और बढ़ेंगे जिसका असर मंहगाई पर होगा.

जीडीपी के ताजा आंकड़ें जारी होने से कुछ समय पहले ही क्रेडिट रेटिंग एजेंसी मूडी ने भारत की रेटिंग अपग्रेड की थी.

भारतीय अर्थव्यवस्था

इमेज स्रोत, CHANDAN KHANNA/AFP/Getty Images

जीडीपी क्या है

जीडीपी किसी भी देश की आर्थिक सेहत को मापने का सबसे ज़रूरी पैमाना है. जीडीपी किसी ख़ास अवधि के दौरान वस्तु और सेवाओं के उत्पादन की कुल क़ीमत है. भारत में जीडीपी की गणना हर तीसरे महीने यानी तिमाही आधार पर होती है. ध्यान देने वाली बात ये है कि ये उत्पादन या सेवाएं देश के भीतर ही होनी चाहिए.

भारत में कृषि, उद्योग और सर्विसेज़ यानी सेवा तीन प्रमुख घटक हैं जिनमें उत्पादन बढ़ने या घटने के औसत के आधार पर जीडीपी दर होती है.

ये आंकड़ा देश की आर्थिक तरक्की का संकेत देता है. आसान शब्दों में, अगर जीडीपी का आंकड़ा बढ़ा है तो आर्थिक विकास दर बढ़ी है और अगर ये पिछले तिमाही के मुक़ाबले कम है तो देश की माली हालत में गिरावट का रुख़ है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)