अमरीका ने रोकी पाकिस्तान की सैन्य मदद

इमेज स्रोत, Getty Images
अमरीका ने पाकिस्तान को दी जाने वाली सभी तरह की सैन्य मदद रोक देने का ऐलान किया है.
अमरीकी विदेश विभाग का कहना है कि ऐसा पाकिस्तान के अपनी ज़मीन से 'चरमपंथ को ख़त्म करने में नाकाम रहने' की वजह से किया जा रहा है.
अमरीकी विदेश विभाग की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि सैन्य मदद तब तक निलंबित रहेगी जब तक पाकिस्तान हक्कानी नेटवर्क और अफ़ग़ान तालिबान के ख़िलाफ़ कार्रवाई नहीं करता.
इसी सप्ताह नए साल के पहले दिन किए एक ट्वीट में अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान पर झूठ बोलने और चरमपंथियों को पनाह देने के आरोप लगाए थे.
ट्रंप ने कहा था कि पाकिस्तान अमरीका से 'अरबों डॉलर की मदद लेने के बावजूद चरमपंथियों को पाल रहा है'.

इमेज स्रोत, EPA
निर्णायक कदम जरूरी
यही नहीं ट्रंप प्रशासन ने विदेश विभाग की ओर से पाकिस्तान को दी जाने वाले 255 मिलियन डॉलर की मदद भी रोक दी थी.
पत्रकारों से बात करते हुए अमरीकी विदेश विभाग की प्रवक्ता हैदर नावर्ट ने कहा, "आज मैं इस बात की पुष्टि कर रही हूं कि हम पाकिस्तान को दी जाने वाली सैन्य मदद तब तक रोक रहे हैं जब तक पाकिस्तान की सरकार हक्कानी नेटवर्क और अफ़ग़ान तालिबान समेत अन्य चरमपंथी समूहों के ख़िलाफ़ निर्णायक क़दम नहीं उठाती."
उन्होंने कहा, "हम मानते हैं कि ये समूह क्षेत्र को अस्थिर कर रहे हैं और अमरीकी सैनिकों को निशाना बना रहे हैं. अमरीका पाकिस्तान के लिए सैन्य मदद निलंबित करने जा रहा है."

इमेज स्रोत, Getty Images
सुरक्षा नीति में चेताया
हाल ही में अमरीकी राष्ट्रपति की ओर से जारी की जाने वाली राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में कहा गया था, "हम पाकिस्तान पर आतंकवादियों को ख़त्म करने के लिए जारी प्रयासों में तेज़ी लाने का दबाव डालेंगे क्योंकि किसी भी देश की आतंकवादियों और उनके समर्थकों के लिए कोई भूमिका नहीं हो सकती है."
अमरीका की ओर से कहा गया है कि 'पाकिस्तान के अंदर से काम करने वाले आतंकवादियों और चरमपंथियों से अमरीका को ख़तरा है."
अमरीका की इस सुरक्षा नीति के सामने आने के बाद अमरीका के उपराष्ट्रपति माइक पेंस ने अपनी अफ़ग़ानिस्तान यात्रा के दौरान पाकिस्तान से एक बार फिर कहा था कि वो अफ़ग़ानिस्तान की सरकार के ख़िलाफ़ लड़ने वाले समूहों को सुरक्षित ठिकाने मुहैया न कराए.
उनका कहना था कि 'पाकिस्तान ने एक लंबे अर्से तक तालिबान और अन्य चरमपंथी समूहों को सुरक्षित ठिकाने मुहैया कराए हैं और अब वो समय बीत चुका है.'
अमरीकी उपराष्ट्रपति के इस बयान की पाकिस्तान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी. पाकिस्तान की ओर से जारी बयान में कहा गया था कि उपराष्ट्रपति का ये बयान अमरीकी प्रशासन के साथ होने वाली गहन बातचीत के ख़िलाफ़ है और सहयोगी दल एक दूसरे को चेतावनी नहीं देते हैं.












