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'कश्मीर को पाकिस्तान नहीं आरएसएस से ख़तरा'
- Author, माजिद जहांगीर
- पदनाम, श्रीनगर से, बीबीसी हिंदी के लिए
जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख डॉक्टर फ़ारूक़ अब्दुल्ला हाल में कुछ ऐसे बयान दिए जिन पर विवाद शुरू हो गए.
डॉक्टर अब्दुल्ला ने कहा कि पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर पाकिस्तान का हिस्सा है और 'भारत प्रशासित कश्मीर हमारा.'
इसके बाद उन्होंने कहा कि अगर 'भारत सरकार ऑटोनॉमी नहीं देगी तो लोग आज़ादी मांगेंगे.'
फिर उन्होंने कहा कि भारत, पाकिस्तान से पाक प्रशासित कश्मीर नहीं ले सकता और फिर ये कहा कि केंद्र सरकार को कश्मीर के सभी काले क़ानून वापस ले लेने चाहिए
डॉक्टर अब्दुल्ला के इन बयानों और कश्मीर के मौजूदा हालात को लेकर बीबीसी ने उनसे ख़ास बातचीत की.
सवाल : आपके बयानों पर विवाद क्यों होता है ?
जवाब : विवाद ?
सवाल : आपने हाल में कहा कि पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर पाकिस्तान का हिस्सा और भारत प्रशासित कश्मीर भारत का हिस्सा है. भारत तो कहता है कि पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर हमारा हिस्सा है. क्या कहेंगे आप?
जवाब : कह रहे हैं. 70 साल से क्या किया उन्होंने उनसे लेने के लिए ? चार जंग हुईं. लाइन तो वहीं खड़ी है. बल्कि जो हिस्सा इन्होंने हासिल भी किया था हाजी पीर का, वह भी जब भारत के प्रधानमंत्री रूस गए थे और वहां पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान साहब और शास्त्री साहब यहां से गए थे, वहां पाकिस्तान को वापस दे देना पड़ा. आखिर वह हमारा हिस्सा था. आपने उसे हासिल किया था, वो वापस क्यों देना पड़ा? इसमें विवाद क्या है? उनके पास है वह हिस्सा और हमारे पास ये हिस्सा. इसमें कोई तब्दीली नहीं आयी है.
सवाल : आपने एक और बयान दिया और भारत सरकार से कहा कि आप ऑटोनॉमी नहीं देगें तो लोग आज़ादी मांगेंगे लेकिन यहां तो ज्यादातर लोग आज़ादी मांगते हैं?
जवाब: क्या मतलब आज़ादी ? क्या आज़ादी? क्या है आज़ादी? आप लैंड लॉक्ड यानी चारों तरफ से बंधे हो. एकतरफ तो चीन के पास एटम बम है. हिंदुस्तान के पास एटम बम है. पाकिस्तान के पास एटम बम है. हमारे पास क्या है? हमारे पास तो छुरी भी नहीं है. आज़ादी किससे लेंगे? कहना बहुत आसान है.
सवाल : डॉक्टर साहब आपने उड़ी में कहा कि पाकिस्तान ने चूड़ियां नहीं पहनी हैं. वह पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर को लेने नहीं देगा. उनके पास एटम बम है. भारत के पास भी तो एटम बम है?
जवाब : मैंने दोनों चीज़ों को कहा. दोनों के पास एटम बम है, जो वे इस्तेमाल कर नहीं सकते. यहां भी करोड़ों लोग मारे जाएंगे और वहां भी. ये लाइन वहीं पर खड़ी रह जाएगी. चार जंगें लड़कर अगर ये लाइन वही पे खड़ी है तो आगे चलकर ये कौन सी जंग लड़कर ये लाइन बदल सकते हैं. ये नहीं होगा. ये तो सही बात है जो हमारे सामने है. इसमें कौन सा विवाद है.
सवाल : बिहार की एक अदालत ने आपके बयान पर आपके खिलाफ मामला दर्ज करने के आदेश दिए हैं.
जवाब : दिया है. कई अदालतों में मामले आते हैं. अब मैं उनसे डर जाऊं और मैं अपने पक्ष से हट जाऊं, वह फ़ारूक़ अब्दुला नहीं है.
सवाल : ये भी कहा जाता है कि आप खबरों में रहने के लिए ऐसे बयान देते हैं. क्या ये सच नहीं है?
जवाब : ये जो कहने वाले हैं ये उनसे पूछें. किस बिना पर पूछते हैं वह ? उनके पास कहने को कुछ नहीं हैं.
सवाल : डॉक्टर साहब, ऑटोनॉमी का प्रस्ताव आपकी जमात ने विधानसभा में पास किया था , फिर दिल्ली वालों ने उसको माना नहीं तो आपकी जमात ने उसी समय इस्तीफा क्यों नहीं दिया?
जवाब : क्यों नहीं माना? क्या कहते हैं आप नहीं माना? उस पर बात चल रही है.
सवाल : लेकिन उस बात का क्या हुआ ?
जवाब : एक न एक दिन होगा. वह बात आज भी जारी है.
सवाल : कुछ दिन से ये ख़बरें आ रही हैं कि कश्मीर के स्थानीय युवा चरमपंथियों के सफों में शामिल हो रहे हैं,इसके लिए कौन ज़िम्मेदार है?
जवाब : इसके लिए दिल्ली ज़िम्मेदार है. इसके लिए डोभाल की थ्योरी है कि और इनको दबाओ. फौज इस्तेमाल करो. पुलिस इस्तेमाल करो. सुरक्षाबल इस्तेमाल करो और जितना कश्मीरियों को दबाओगे,उससे हम जीत जाएंगे.ये उसी का नतीजा है. आज पढ़े लिखे नौजवान इनके खिलाफ खड़े हो गए. हम भी देखना चाहते हैं कि क़ातिल के बाज़ुओं में कितना ज़ोर है? ये थमने वाली आग नहीं है.
सवाल : कश्मीरियों को किससे खतरा है, पाकिस्तान से या आरएसएस से ?
जवाब : आरएसएस से कश्मीर ही को क्या,पूरे देश को खतरा है. पाकिस्तान से हमें कोई खतरा नहीं है. पाकिस्तान के पास इतना दम नहीं है कि वह हमें ले सकेगा. हमें खतरा तो अंदर से है, जिसे हम आरएसएस कहते हैं. महाराष्ट्र में हिंदुओं पर हमला हो रहा है,मुसलमानों पर हमला हो रहा है. गौ रक्षक हमला कर रहे हैं ,ये कौन लोग हैं ? आरएसएस तो पूरे देश में ऐसा आग लगा रही है कि अल्लाह ही जाने इसका असर क्या होगा? ये कितने और पाकिस्तान बनाएंगे.
सवाल : भारत सरकार कहती है कि नोटबंदी के बाद कश्मीर में पत्थरबाज़ी बंद हो गयी. क्या आप इस दलील से सहमत हैं?
जवाब : आप मुझे ये बतायें कि जो जवान आजकल बंदूक उठा रहे हैं , वह नोटबंदी से हुआ? क्या ये समझते हैं कि ये तहरीक बंद हो गयी? क्योंकि इन्होंने नोटबंदी की. ये उस दुनिया में रहते हैं जहां अंधे और बहरे रहते हैं.
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