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'यूं ही चलता रहा तो कश्मीर भारत के हाथ से निकल जाएगा'
- Author, वात्सल्य राय
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
भारत प्रशासित कश्मीर में लगातार हालात तनावग्रस्त बने हुए है.
बीबीसी से ख़ास बातचीत में कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फ़ारुक़ अब्दुल्ला ने मौजूदा हालात पर कहा है कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो कश्मीर आहिस्ता-आहिस्ता हाथ से निकल जाएगा.
अभी हाल ही में कश्मीर में हुए उप-चुनाव में सिर्फ़ सात प्रतिशत मतदान हुआ है जिसमें फ़ारुक़ अब्दुल्ला की पार्टी नेशनल कांफ्रेस को जीत हासिल हुई है.
इस चुनाव पर फ़ारुक़ अब्दुल्ला कहते हैं, "मैंने इतना खूनी चुनाव आजतक नहीं देखा जहां आठ लोग मारे गए और लोगों को डराया-धमकाया गया. ये कोई चुनाव था. मैं तो कहूंगा कि यह जनमत संग्रह था इस हुकूमत के ख़िलाफ़. यह सिर्फ़ सात प्रतिशत नहीं जो वोट नहीं दिए वो भी शामिल है इस जनमत संग्रह में."
उन्होंने आगे कहा, "जिन्होंने वोट नहीं दिया उनका साथ भी था हमारे साथ. उन्होंने वोट नहीं दिया क्योंकि उनके अंदर अपने ऊपर होने वाले जुल्मों को लेकर ग़म और गुस्सा था. यूं ही चलता रहा तो कश्मीर आहिस्ता-आहिस्ता हाथ से निकल जाएगा. यह बात पूर्व गृहमंत्री पी चिदंबर ने भी कहा है."
इतने कम फ़ीसदी वाले चुनाव में जीत हासिल करने के बाद नैतिक अधिकार की बात पर वो कहते है, "मेरे पास इतना नैतिक अधिकार है कि मैं पूरे हिंदुस्तान की अवाम को हिला दूंगा. मैं किसी का एजेंट नहीं हूं. मैं इस रियासत का एजेंट हूं और इस रियासत के लिए मैं ऐसे लड़ूंगा कि संसद कांपेगी नहीं तो मैं फ़ारुक़ अब्दुल्ला नहीं."
उन्होंने कहा, "कश्मीर की सरकार ने दो सालों में कोई तरक्की नहीं की है. मुसीबतें और नफरतें और बढ़ रही हैं. और यह बिना गर्वनर शासन लाए यह सूरत नहीं बदलेगी. गर्वनर शासन में किसी पार्टी से कोई मतलब नहीं होगा. उनका सीधा सा मकसद होगा कि काम हो और नौजवान रास्ते पर आए. "
उन्होंने बताया कि दो साल पहले आए संसदीय प्रतिनिधिमंडल ने सभी पक्षों पर बात करने की सलाह दी थी. उसमें पत्थर फेंकने वाले नौजवानों से भी बातचीत करने की बात कही गई थी. लेकिन इस सरकार ने किसी से भी बात नहीं की.
उन्होंने सरकार पर इल्ज़ाम लगाया कि जम्मू में बीजेपी के 26 विधायकों बचाने के लिए वो पूरे कश्मीर को बर्बाद करने पर तुली हुई है.
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