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उर्दू प्रेस रिव्यू: 'पाक सेना ने भारत को दोटूक चेतावनी दी'
- Author, इक़बाल अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
पाकिस्तान से छपने वाले उर्दू अख़बारों में इस हफ़्ते भारत और पाकिस्तान की सेना के बीच बातचीत, राजधानी इस्लामाबाद में धार्मिक गुटों का धरना प्रदर्शन सबसे ज़्यादा चर्चा में रहीं.
सबसे पहले भारत और पाकिस्तान के मिलिटरी ऑपरेशन्स के निदेशकों (डीजीएमओ) के बीच हॉटलाइन पर हुई बातचीत का ज़िक्र करते हैं.
अख़बार 'दुनिया' के मुताबिक़ भारत-पाक डीडीएमओ ने बग़ैर किसी पहले से तय कार्यक्रम के अचानक ही एक दूसरे से संपर्क किया.
अख़बार के अनुसार पाकिस्तानी सेना ने बातचीत में दो टूक अंदाज़ में भारत को चेतावनी दी कि अगर उसने नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर भड़काऊ कार्रवाई की तो उसे ऐसा नुक़सान उठाना पड़ेगा, जिसे भारत बर्दाश्त नहीं कर सकेगा.
अख़बार पाकिस्तानी सेना के आईएसपीआर के ज़रिए जारी किए गए बयान का हवाला देते हुए लिखता है कि भारतीय सेना बिना किसी कारण के फ़ायरिंग कर रही है और नियंत्रण रेखा के क़रीब रहने वाले आम नागरिकों को निशाना बना रही है.
भारत पर आरोप
सेना के बयान के अनुसार भारत की इस कार्रवाई से ना सिर्फ़ बेगुनाह इंसानों की जानें जा रही हैं, बल्कि ये इंतहाई ख़तरनाक भी है और इसकी कड़ी प्रतिक्रिया भी हो सकती है जो भारत के लिए बर्दाश्त से बाहर होगा.
राजधानी इस्लामाबाद में पाकिस्तान के धार्मिक गुटों का धरना प्रदर्शन जारी है.
पिछले दस दिनों से जारी धरना प्रदर्शन को शांतिपूर्वक तरीक़े से ख़त्म कराने के लिए सरकार और धार्मिक गुटों के प्रतिनिधियों से बातचीत जारी है लेकिन अभी तक इसका कोई हल नहीं निकल पाया है.
पाकिस्तान के कई धार्मिक संगठनों के लगभग तीन हज़ार लोग इस्लामाबाद में पिछले दस दिनों से धरने पर बैठे हुए हैं. उन्होंने इसका नाम तहरीक-ए-लब्बैक या तहरीक-ए-रसूलुल्लाह दिया है.
उनकी मांग है कि चुनाव सुधार के लिए संसद में जो बिल पेश किया गया था उसमें कुछ ऐसी बातें कही गई थीं जो उनके अनुसार इस्लाम के बुनियादी मान्यताओं के विरुद्ध हैं.
धार्मिक गुटों का विरोध प्रदर्शन
सरकार ने उन संशोधनों को वापस ले लिया है लेकिन धार्मिक गुटों का कहना है कि बिल में संशोधन के लिए क़ानून मंत्री समेत इसके लिए ज़िम्मेदार लोगों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई की जाए.
अख़बार 'जंग' के अनुसार सरकार ने क़ानून मंत्री ज़ाहिद हामिद के इस्तीफ़े को छोड़ कर धरना प्रदर्शन करने वालों की सारी शर्तों को मान लिया है.
लेकिन धार्मिक गुट अपनी मांगों से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं.
'जंग' के अनुसार पाकिस्तान के गृह मंत्री अहसन इक़बाल सभी पक्षों से बातचीत कर रहे हैं और अगले 24 से 48 घंटों में उन्हें किसी अच्छे नतीजे की पूरी उम्मीद है.
अख़बार 'नवा-ए-वक़्त' ने लिखा है कि सरकार ने धार्मिक गुटों से कहा है कि अगर वो रास्ते खोलने पर तैयार हो जाएं तो उनकी बाक़ी मांगों पर भी ग़ौर किया जा सकता है.
इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने भी धरने को शनिवार तक ख़त्म कराने का आदेश दिया था लेकिन गृहमंत्री ने 24 घंटे की और मोहलत मांगी है.
धरना ख़त्म करने की डेडलाइन रविवार को ख़त्म हो रही है.
अख़बार 'ख़बरें' के अनुसार सरकार ने बल प्रयोग करने की भी पूरी तैयारी कर ली है.
'रोज़नामा ख़बरें' का कहना है कि अगर बातचीत से मसले का हल नहीं निकला तो सरकार अदालत के आदेश का पालन करते हुए बल प्रयोग से धरने को ख़त्म करा सकती है.
हालांकि अभी तक सरकार का यही कहना है कि वो बातचीत के ज़रिए ही धरने को ख़त्म कराना चाहती है.
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