'पीएम मोदी गुजरात चुनाव की तारीख ईसी को भी बता दें'

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गुजरात की चुनाव तारीख़ों को लेकर चुनाव आयोग की मुश्किलें ख़त्म होती नज़र नहीं आ रही. आयोग के फ़ैसले पर सवाल उठाने वालों में नया नाम जुड़ा है पी चिदंबरम का जिन्होंने आज सुबह ट्विटर पर अपनी राय ज़ाहिर की.

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चिदंबरम ने चुटकी लेते हुए कहा कि ''चुनाव आयोग ने प्रधानमंत्री को अधिकार दे दिया है कि वह गुजरात में अपनी आख़िरी रैली में चुनाव की तारीख़ों का एलान करें. (कृपया चुनाव आयोग को भी बता दें).''
इसी सिलसिले में अपने दूसरे ट्वीट में चिदंबरम ने चुनाव आयोग पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि ''एक बार गुजरात सरकार सारी छूट और तोहफ़ों का एलान कर दे, फिर चुनाव आयोग को उनकी बढ़ाई गई छुट्टियों से वापस बुला लिया जाएगा.''
गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपानी चिदंबरम की राय से इत्तेफ़ाक नहीं रखते. उन्होंने न्यूज़ एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कहा कि ''मुझे लगता है कि चिदंबरम और बाक़ी पूरी कांग्रेस आने वाले गुजरात चुनाव से डर गई है.''

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नरेंद्र मोदी 22 अक्तूबर को गुजरात जाने वाले हैं. यह सितंबर से उनका पांचवां गुजरात दौरा होगा. कहा जा रहा है कि इस दौरान प्रधानमंत्री वडोदरा नगर निगम के कुछ नए विकास कार्यों का शिलान्यास कर सकते हैं. साथ ही मुंदरा-दिल्ली पेट्रोलियम पाइपलाइन की विस्तार योजना को हरी झंडी दिखा सकते हैं.

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क्यों उठ रहे हैं सवाल
हिमाचल प्रदेश के साथ गुजरात की चुनाव तारीख़ों का एलान नहीं करने के चुनाव आयोग के फ़ैसले पर सवाल इसलिए उठाए जा रहे हैं क्योंकि एक बार चुनाव की तारीख़ का एलान होने के बाद राज्य में आचार संहिता लग जाती है. जिसके बाद,
- मंत्री चुनाव प्रचार के लिए सरकारी दौरे नहीं कर सकते. चुनाव के काम में सरकारी मशीनरी और कर्मचारियों का इस्तेमाल भी नहीं कर सकते.
- मंत्री और बाक़ी अधिकारी विकास के लिए मिले पैसे से कोई ग्रांट या भुगतान नहीं कर सकते. साथ ही ऐसे किसी भुगतान की घोषणा या वादा भी नहीं कर सकते.
- किसी नई योजना का शिलान्यास नहीं कर सकते.
- सड़क बनाने, पीने का पानी मुहैया कराने या ऐसी ही कोई और सहूलियत देने का वादा नहीं कर सकते.
- सरकार और सरकार के पैसे से चलने वाली संस्थाओं में ऐसी कोई नई नियुक्ति नहीं कर सकते, जिसका इस्तेमाल पार्टी के वोट बढ़ाने में किया जा सके.

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यह पहला मौक़ा नहीं
चुनाव आयोग इसलिए भी मुश्किल में है क्योंकि अब तक, एक ही समय या 6 महीने के भीतर चुनाव में जा रहे राज्यों की चुनावी तारीख़ों का एलान एक साथ कर दिया जाता था.
एक पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ने न्यूज़ वेबसाइट 'द वायर' को बताया था कि "गुजरात के चुनाव की तारीख़ का एलान नहीं करके, चुनाव आयोग ने अपनी गरिमा को भंग कर दिया है."
मौजूदा मुख्य चुनाव आयुक्त अचल कुमार जोती ने कहा कि राज्य में 46 दिन से ज़्यादा समय तक आचार संहिता न लगी रहे, इसके लिए गुजरात की तारीख़ अभी नहीं बताई गई. यह घोषणा जल्दी ही की जाएगी.

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बीजेपी ने खारिज किया
बीजेपी ने चुनाव आयोग पर दबाव में काम करने के कांग्रेस के आरोप को खारिज कर दिया है.
सूचना प्रौद्योगिकी और क़ानून मंत्री रविशंकर प्रसाद के मुताबिक़ कांग्रेस के सवाल उठाने के बाद उन्होंने पिछले दो विधानसभा चुनावों की तारीख़ें निकलवाई थीं, जिसमें सामने आया कि उन मौकों पर भी हिमाचल प्रदेश और गुजरात के चुनाव के बीच चुनावों में तक़रीबन एक महीने का फ़ासला था.
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