'सैलरी से ज़्यादा तेज़ी से बढ़ा मेट्रो का किराया'

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- Author, कमलेश
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
दिल्ली मेट्रो का किराया मंगलवार से बढ़ गया है. यह साल भर में हुई दूसरी बढ़ोतरी है. इस बार डीएमआरसी ने किराए में 50 प्रतिशत तक का इजाफा कर दिया है.
किराया बढ़ने से लोग खासे नाराज और परेशान दिखे. लोगों ने किराये के साथ मेट्रो में सुविधाओं पर सवाल किए.
बुराड़ी से नोएडा का सफर करने वालीं ज्योति राघव कहती हैं कि किराया बढ़ने से सबसे ज्यादा नुकसान कम आय वाले लोगों को होगा.
प्राइवेट बसों के बंद होने और मेट्रो की सुविधाओं को देखते हुए गरीब तबका भी मेट्रो में आने लगा था लेकिन अब वो फिर से बस का रुख कर लेगा.
दोबारा किराया बढ़ने से गुस्से में लोग
वैशाली से कनॉट प्लेस जाने वालीं नेहा का कहना है कि मेट्रो में बढ़ रही लोगों की भीड़ और विज्ञापनों को देखकर तो नहीं लगता कि डीएमआरसी नुकसान में है तो अचानक से इतना किराया बढ़ाने की क्या जरूरत थी.
कई लोगों का ये भी मानना है कि मेट्रो के किराए में एक बार वृद्धि करना ठीक था लेकिन एक ही साल में दो बार किराया उनकी जेब पर बहुत भारी पड़ रहा है.
मंडी हाउस मेट्रो स्टेशन के अंदर जा रहीं सुमन ने बताया कि वो पहले बस में सफर करती थीं लेकिन मेट्रो सहूलियत के कारण उसमें सफर करने लगी. एक बार किराया बढ़ाया तो ठीक था लेकिन फिर से बढ़ाने की क्या जरूरत थी. अगर इस तरह किराया बढ़ेगा तो फिर से बस में जाना पड़ेगा.
'डीएमआरसी दे घाटे का हिसाब'

मंडी हाउस पर ही खड़े एक शख्स से जब बातचीत की तो उन्होंने किराया बढ़ोतरी को बिल्कुल गलत बताया. उन्होंने कहा कि हम जसोला विहार से कश्मीरी गेट आते हैं.
पहले 28 रुपये किराया लगता था और अब ये मंडी हाउस तक 40 रुपये किराया लेते हैं. आखिर में वहीं होगा जो मेट्रो आते हैं वो ऑटो, बस या कैब से जाएंगे.
वहीं, अक्षरधाम से बाराखम्बा तक मेट्रो से रोजाना सफर करने राजीव कुमार कहते हैं कि डीएमआरसी ने किराया तो बढ़ाया लेकिन अपने नुकसान के बारे में नहीं बताया.
लोगों को ये समझ नहीं आ रहा है कि मेट्रो का कितना नुकसान हुआ है कि इतना किराया बढ़ाया गया है. डीएमआरसी को मुनाफे के दूसरे तरीकों पर भी विचार करना चाहिए.
बाराखम्बा मेट्रो स्टेशन से बाहर निकल रहीं एक महिला ने बताया कि उनका किराया डबल हो गया है. जहां पहले 23 रुपये किराया लगता था वहां अब उनके 45 रुपये कटे हैं.
साकेत से नोएडा रोज ऑफिस जाने वालीं पूनम मिश्रा कहती हैं कि हमारी सैलरी जितनी नहीं बढ़ पाती उससे कहीं ज्यादा रफ्तार से मेट्रो का किराया बढ़ा है. अब लगभग दुगना किराया देना पड़ेगा.
'हर बात पर हंगामा होता है पर इस पर सब चुप हैं '

प्रगति मैदान मेट्रो स्टेशन से निकल रहे एक स्टूडेंट ने बताया कि वह पढ़ाई के साथ-साथ ट्यूशन भी पढ़ाता है और इससे अपनी पॉकेट मनी निकालता है. अब उसकी पॉकेट पर काफी असर पड़ने वाला है. और कुछ होता है तो उसके विरोध में कोई न कोई खड़ा हो जाता है लेकिन किराया बढ़ने पर कोई विरोध नहीं हुआ.
कनॉट प्लेस में काम करने वाले आमिर कहते हैं कि अगर डीएमआरसी किराया बढ़ा रही है तो मेट्रो की फ्रिक्वेंस भी बढ़ानी चाहिए ताकि समय पर आॅफिस पहुंच सकें. हालांकि, आमिर के ही मित्र ने कहा कि किराया बढ़ाने का फैसला कुछ सोच समझकर ही लिया गया होगा.
किराए में हुए इजाफे की बात करें तो अब मेट्रो का न्यूनतम किराया 20 रुपये हो गया है जो पिछली बार की बढ़ोतरी के बाद 50 रुपये था. वहीं, अधिकतम किराया 50 से 60 रुपये हो गया है. लोगों को अब लगभग हर यात्रा में 10 रुपये ज्यादा देने होंगे.
किराए में बढ़ोतरी को लेकर दिल्ली सरकार और डीएमआरसी के बीच टकराव भी चल रहा था. दिल्ली सरकार लगातार किराया वृद्धि का विरोध करती रही वहीं, शहरी विकास मंत्री ने मेट्रो के सही संचालन के लिए किराया बढ़ाने को सही बताया.
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