जय शाह ने 'द वायर' पर किया मानहानि का केस

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बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के बेटे जय अमित शाह ने उन पर रिपोर्ट छापने वाली न्यूज़ वेबसाइट 'द वायर' से जुड़े सात लोगों पर सोमवार को आपराधिक मानहानि का केस दायर कर दिया.
अहमदाबाद के मेट्रोपॉलिटन कोर्ट में जय अमितभाई शाह ने 'द वायर' की रिपोर्टर रोहिणी सिंह, फ़ाउंडर एडिटर सिद्धार्थ वरदराजन, सिद्धार्थ भाटिया, एमके वेणु, मोनोबिना गुप्ता, पामेला फिलिपोज़ को इस मानहानि केस में पार्टी बनाया है.
जय शाह ने 'द वायर' की मिल्कियत रखने वाले ट्रस्ट 'फ़ाउंडेशन फ़ॉर इंडिपेंडेंट जर्नलिज़्म' पर भी केस किया है.
रोहिणी सिंह वो रिपोर्टर हैं जिनके नाम से 'द वायर' ने जय अमित भाई शाह के कारोबार में हुई कथित अप्रत्याशित बढ़ोतरी पर रविवार को रिपोर्ट छापी थी.

विपक्ष के आरोप
विपक्ष के आरोपों का जवाब देने के लिए रेल मंत्री पीयूष गोयल ने रविवार को ही प्रेस कॉन्फ़्रेंस बुलाई.
उन्होंने कहा था, वेबसाइट पर छपी ख़बर गढ़ी गई है और अमित शाह के बेटे जय शाह सोमवार को अहमदाबाद में वेबसाइट के संपादक और रिपोर्टर के ख़िलाफ़ 100 करोड़ का मानहानि का आपराधिक मुक़दमा दर्ज कराएंगे.
कांग्रेस के प्रवक्ता कपिल सिब्बल ने वेबसाइट में प्रकाशित ख़बर का हवाला देते हुए आरोप लगाया था कि 2015-16 में जय शाह की कंपनी का सालाना कारोबार 50 हज़ार रुपये से बढ़कर 80.5 करोड़ रुपये तक पहुँचने की जाँच होनी चाहिए.
सिब्बल ने आरोप लगाया कि बीजेपी के सत्ता में आने के एक साल के भीतर ही शाह की कंपनी का टर्नओवर 16000 गुना बढ़ा.

रविवार को गोयल का बयान
- अमित शाह की छवि खराब करने की कोशिश की गई. वेबसाइट ने भ्रामक, अपमानजनक और आधारहीन ख़बर दी है. जय शाह संपादक पर 100 करोड़ रुपये के मानहानि का केस करेंगे.
- जब इस वेबसाइट के लेखक ने जय शाह से कुछ सवाल पूछे तो उन्होंने जवाब में उन्हें सब कुछ भेज दिया था. जय शाह ने रिपोर्टर के भेजे प्रत्येक प्रश्न का जवाब दिया.
- जय शाह कमोडिटी बिज़नेस में 8-9 साल तक रहे. जय शाह और जितेंद्र शाह कमोडिटी ट्रेडिंग में पार्टनर थे. दोनों साथ मिलकर देसी चना, सोयाबीन समेत कई एग्री कमोडिटी बिज़नेस में उतरे.
- जय शाह की कंपनी का एनबीएफसी से लोन लेना गलत नहीं है और साथ ही यह लेटर ऑफ़ क्रेडिट था.
- जहां तक कंपनी के 16,000 गुना टर्नओवर की बात है तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है. जब आप एक नए बिज़नेस की शुरुआत करते हैं, तो इसके बिज़नेस में बढ़ोतरी होना आम बात है. कमोडिटी बिज़नेस में 80 करोड़ बड़ी रक़म नहीं होती. हालांकि जय शाह की कंपनी को बाद में घाटा हुआ तो अक्टूबर 2016 में जय ने इस बिज़नेस को बंद कर दिया.
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