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नज़रिया: विदेशों में मलिन हो रहा है पीएम मोदी का जलवा?
- Author, शकील अख़्तर
- पदनाम, संवाददाता, बीबीसी उर्दू
इस महीने की शुरुआत में कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी अमेरिका की यात्रा पर गए थे. अमरीका में राहुल गांधी ने कई थिंक टैंकों के सदस्यों से मुलाक़ात की और यूनिवर्सिटी में छात्रों को संबोधित भी किया.
इस दौरान राहुल ने कई सवालों के जवाब भी दिए. राहुल ने भारत की वर्तमान स्थिति और राजनीति को भी कटघरे में खड़ा किया.
उन्होंने कई पत्रिकाओं और अख़बारों को साक्षात्कार भी दिया. राहुल की यात्रा को मीडिया में अच्छी-ख़ासी जगह भी मिली. राहुल ने इस दौरान जो बातें कहीं उनकी तारीफ़ भी हुई.
भारत में पहली बार सत्ताधारी बीजेपी ने महसूस किया कि विदेश में मोदी का जादू कम हो रहा है और राहुल गांधी को लोग गंभीरता से ले रहे हैं.
भारत की अर्थव्यवस्था की बिगड़ती सेहत के कारण प्रधानमंत्री मोदी की आलोचना हो रही है. शुरू में ऐसा लगा था कि मोदी भारतीय अर्थव्यवस्था में व्यापक पैमाने पर बदलाव लाने जा रहे हैं, लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि अभी तक कोई बड़ा सुधार ज़मीन पर नहीं उतर पाया है.
भारत की अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 6 फ़ीसदी से भी कम हो गई है. अर्थव्यवस्था में सुस्ती को साफ़ तौर पर महसूस किया जा रहा है. सरकार इस बात का आकलन नहीं कर पाई कि उसकी नीतियों से ग़रीबों को फ़ायदा नहीं हो रहा है.
ग़रीबों को फ़ायदा नहीं
आने वाले महीनों में भारत के कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं. मोदी सरकार को लेकर जैसी बातें हो रही हैं, उस माहौल में बीजेपी की लिए चुनाव लड़ना आसान नहीं होगा.
गुजरात और हिमाचल प्रदेश में नवंबर और दिसंबर महीने में चुनाव हैं. गुजरात चुनाव का ख़ास महत्व है. गुजरात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गृह राज्य है और वो वहां के मुख्यमंत्री भी रहे हैं.
बीजेपी गुजरात में लंबे समय से सत्ता में रही है. गुजरात में अभी जैसा माहौल है उसमें बदलाव के संकेत साफ़ दिख रहे हैं, लेकिन क्या कांग्रेस इसका फ़ायदा उठा पाएगी? राहुल गांधी अमरीका से आने के बाद गुजरात दौरे पर गए. गुजरात में राहुल ने दौरे की शुरुआत एक बड़े मंदिर में पूजा से की.
वो गुजरात में कई स्थानों पर गए, लेकिन उनके हर दौरे में किसी न किसी मंदिर में पूजा का कार्यक्रम तय था. राहुल के मंदिर जाने और पूजा-अर्चना को मीडिया में काफ़ी तवज्जो मिली.
नरम हिंदुत्व का सहारा
कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राहुल का मंदिर जाना अनायास नहीं था बल्कि यह कांग्रेस की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा था.
कई विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस सत्ता में लौटने के लिए नरम हिन्दुत्व का सहारा ले रही है. बीजेपी कांग्रेस की धर्मनिरपेक्षता पर हमेशा सवाल उठाती रही है. राहुल गांधी के गुजरात दौरे को सफल बताया जा रहा है.
मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी के लिए गुजरात नाक का सवाल है. बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह भी गुजरात के ही हैं.
दूसरी तरफ़ कांग्रेस के लिए भी यह चुनाव काफ़ी अहम है. अगर गुजरात विधानसभा चुनाव कांग्रेस जीत लेती है तो भारत की राजनीति में यह 'गेमचेंजर' साबित हो सकता है.
गुजरात में सत्ता परिवर्तन की आकांक्षा है, लेकिन एक मजबूत विकल्प की तलाश है. अगर कांग्रेस को लगता है कि वो गुजरात में बीजेपी के आक्रामक हिन्दुत्व का मुक़ाबला नरम हिन्दुत्व से ही कर पाएगी तो उसके लिए चुनाव जीतना मुश्किल है. अगर कांग्रेस सत्ता में वापसी करना चाहती है तो उसे मजबूत विकल्प और मुकम्मल योजनाओं के साथ आना होगा.
कांग्रेस के पास भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ एक इरादा होना चाहिए और उसे बताना होगा कि राज्य की वर्तमान सरकार से उसकी सरकार बेहतर होगी. कांग्रेस को वक़्त पर तैयारी के साथ जनता के बीच आना होगा. राहुल गांधी को नीति और योजनाओं को दुरुस्त करना चाहिए.
राहुल मोदी की आलोचना करने के बजाय अपने सकारात्मक कार्यक्रमों को जनता के बीच लेकर जाएं. गुजरात चुनाव कांग्रेस के लिए एक बेहतरीन अवसर है लेकिन इसे लपकने के लिए कांग्रेस के पास ठोस रणनीति का होना बहुत ज़रूरी है.
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