क्या अपनी छवि सुधारने विदेश गए हैं राहुल गांधी?

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी अमरीकी दौरे पर हैं. वहां छात्रों से रूबरू हो रहे हैं, अपने भाषणों और साक्षात्कारों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाना बना रहे हैं.

वो देश की नीतियों पर सवाल कर रहे हैं और अपनी पार्टी पर उठने वाले सवालों का भी जवाब दे रहे हैं. छवि निर्माण के लिहाज़ से उनका यह दौरा काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

बीबीसी से बातचीत में वरिष्ठ पत्रकार विनोद शर्मा कहते हैं, "राहुल देश के प्रधानमंत्री और लंबे अरसे तक सत्तारूढ़ रही कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष बनना चाहते हैं तो उन्हें विदेश में अपनी अलग छाप छोड़नी होगी."

वो कहते हैं, "राहुल गांधी की छवि एक नासमझ व्यक्ति के रूप में बनाई गई. उन्हें नाकाबिल साबित करने की कोशिश की गई. मैं समझता हूं कि अपनी बनाई छवि तोड़ने की दिशा में यह दौरा राहुल के लिए अच्छी शुरुआत है."

विदेशी ज़मीन पर छींटाकशी कितनी सही?

बीबीसी से बातचीत में वरिष्ठ पत्रकार तवलीन सिंह राहुल के इस दौरे को बहुत फायदे वाला नहीं मानतीं. वे कहती हैं, "जो बातें राहुल ने अमरीका में कहीं, वह भारत में भी कहते तो भी लोग सुनते."

तवलीन सिंह के मुताबिक, "वो (राहुल) एक तरह से मोदी की ही नकल कर रहे हैं. मोदी के विदेश दौरे के बाद उनका क़द काफी बढ़ा था. मुझे लगता है कि राहुल गांधी भी इसी राह पर चल रहे हैं."

पहले नरेंद्र मोदी ने विदेशी ज़मीन पर कांग्रेस की आलोचना की और अब राहुल मोदी की कर रहे हैं. विदेशी ज़मीन पर इस छींटाकशी को विनोद शर्मा अनुचित मानते हैं. वह कहते हैं, "सरहद पार हम लोग एक हैं. इस परंपरा को हाल के राजनेताओं ने तोड़ा है."

वो कहते हैं, "पहले के नेताओं ने घर से बाहर एकता का परिचय दिया है. इस परंपरा को आगे भी बनाए रखने की ज़रूरत है. इसकी अवहेलना सरकार और विपक्ष दोनों तरफ से हो रही है."

वंशवाद पर उनके उदाहरण कैसे थे?

भारत में वंशवाद चलता है, उनका ये बयान कितना सही था, इस पर विनोद शर्मा ने कहा, "वंशवाद पर उन्होंने जो उदाहरण दिए वो सही नहीं थे. वो अच्छे उदाहरण दे सकते थे. वो बांग्लादेश, पाकिस्तान, श्रीलंका के परिवारवाद का उदाहण दे सकते थे."

वे कहते हैं, "उनको यह कहना चाहिए था कि यह एक अच्छी प्रणाली नहीं है, लेकिन एक समय ऐसा आएगा कि पार्टी में परिवार का उतना हस्तक्षेप नहीं रहेगा."

इस पर तवलीन सिंह कहती हैं, "वंशवाद का मुद्दा बड़ा है, इसे देश का मतदाता ही ख़त्म करेगा. क्या भाजपा में वंशवाद नहीं है? क्या इसके बड़े नेताओं ने अपने बच्चों को नहीं बढ़ाया है? लेकिन जिस तरह से राहुल ने यह बात रखी वो ठीक नहीं थी. उन्होंने बिजनेस में वंशवाद की बात की, इस क्षेत्र में वंशवाद तो स्वाभाविक बात है."

तवलीन सिंह का ये भी मानना है कि राहुल गांधी नरेंद्र मोदी के सामने चुनौती तो हैं, लेकिन उनको अभी बहुत काम करना होगा क्योंकि तीन साल में जो छवि उनकी बनी है वो अच्छी नहीं है.

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