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'विदेश यात्रा से घर में क्या बदलाव लाएँगे राहुल'
- Author, आदर्श राठौर
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के कैलिफ़ोर्निया के बर्कले यूनिवर्सिटी में दिए गए भाषण की चर्चा हो रही है. इस भाषण में राहुल गांधी ने नरेंद्र मोदी सरकार की कई नीतियों की आलोचना की है, तो कांग्रेस के भी आत्ममंथन की बात कही है.
लेकिन इन सबके बीच लगातार विदेश यात्रा करने के कारण राहुल गांधी आलोचना के भी घेरे में हैं. कांग्रेस पर नज़र रखने वाली पत्रकार अपर्णा द्विवेदी कहती हैं कि इस समय राहुल गांधी के विदेश दौरों से कांग्रेस को नुक़सान होगा.
बीबीसी के साथ बातचीत में अपर्णा द्विवेदी ने कहा, "पिछले एक-डेढ़ साल में ये राहुल गांधी की आठवीं विदेश यात्रा है. मेरे हिसाब से ये कांग्रेस के लिए घातक है. कांग्रेस कार्यकर्ताओं को इस समय राहुल गांधी के सहयोग की ज़रूरत है. उसका मनोबल गिरा हुआ है. लोकसभा में ख़राब प्रदर्शन के बाद पार्टी लगातार हार रही है. पंजाब के अलावा पार्टी कहीं जीती ही नहीं है."
क्या कांग्रेस विदेशों में रह रहे भारतीयों के बीच अपनी पहुँच बनाना चाहती है? वरिष्ठ पत्रकार विनोद शर्मा कहते हैं कि राहुल के इन विदेशी दौरों से कांग्रेस को भारत में कोई फ़ायदा नहीं होने वाला है.
संगठन पर ध्यान
विनोद शर्मा ने कहा, "विदेश यात्रा से घर में क्या बदलाव आएगा. कांग्रेस को अपने देश में अपने संगठन को मज़बूत बनाने की ज़रूरत है. बहुत से राज्य ऐसे हैं, जहाँ कांग्रेस की अपनी विरासत है. इसके बावजूद वहाँ कांग्रेस कोई छाप नहीं छोड़ पा रही है. ओडिशा को तो कांग्रेस ऐसे मान कर चल रही है जैसे वो देश का हिस्सा ही नहीं है. कांग्रेस की ग़ैर मौजूदगी के चलते बीजेपी ने वहाँ अपनी पकड़ मज़बूत बना ली है."
एक ओर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के विदेश दौरे हो रहे हैं, तो दूसरी ओर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह कई राज्यों में संगठन को मज़बूत करने में लगे हैं और लगातार इन राज्यों का दौरा कर रहे हैं.
विनोद शर्मा का मानना है कि बीजेपी ने पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस की छवि भ्रष्टाचार वाली पार्टी की बनाने में सफलता हासिल की थी. लेकिन अब तक कांग्रेस नेतृत्व इस छवि से छुटकारा पाने की कोशिश नहीं कर रहा है.
उन्होंने कहा, "जब भी बीजेपी सरकार कहीं फँसी होती है, वो कांग्रेस के भ्रष्टाचार का मुद्दा उठा देती है. इसका जवाब भी कांग्रेस पार्टी को ढूँढ़ना होगा. भारत में वही नेता माना जाता है जो अपनी पार्टी को चुनाव में जीत दिलाता है. ये बात राहुल गांधी और कांग्रेस को गांठ बांध लेनी चाहिए."
चुनौती
कांग्रेस ने हाल के दिनों में संगठन के कामकाज के लिए कई प्रोफ़ेशनल लोगों को जोड़ा है. हाल ही में ऑल इंडिया प्रोफ़ेशनल कांग्रेस का गठन हुआ है जिसकी कमान शशि थरूर के पास है. इसमें मिलिंद देवड़ा, गीता रेड्डी, गौरव गोगोई और सलमान सोज़ जैसे युवा नेता शामिल हैं. लेकिन क्या ये पार्टी के लिए मददगार होगा?
इस पर अपर्णा द्विवेदी कहती हैं, "अगर प्रोफ़ेशनल आएँगे और अपने तरह से मदद करेंगे तो ये कांग्रेस के लिए अच्छी स्थिति होगी. लेकिन सवाल नेतृत्व की समझदारी का है. राहुल गांधी बाहर जाकर लोगों को समझा रहे हैं, वो ठीक है. लेकिन पहले वे देश की राजनीति को समझें."
जानकार बताते हैं कि राहुल गांधी को पहले अपना घर संभालना होगा और चुनाव के मोर्चे पर अपने को साबित करना होगा और यही उनकी सबसे बड़ी चुनौती है.
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