रोहिंग्या मुसलमानों को शरण दी तो बनेंगे आर्थिक बोझ: मोहन भागवत

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विजयदशमी के मौके पर राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित किया.
अपने संबोधन में मोहन भागवत देश के आर्थिक हालात, रोहिंग्या मुसलमानों की समस्या से लेकर गौरक्षा जैसे मुद्दों पर बोले.

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इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और वरिष्ठ भाजपा नेता लाल कृष्ण आडवाणी समेत बीजेपी और संघ के कई बड़े नेताओं ने शिरकत की.
पढ़िए आरएसएस प्रमुख के भाषण की 10 बड़ी बातें
1. हम अपने इतिहास और संस्कृति को भूल गए, हमने अपने महापुरुषों के गौरव को भुला दिया, जबकि बाहर से आए लोगों ने हमें हमारे इतिहास के बारे में बताया. हमें अपने देश के वास्तविक इतिहास और परंपरा को याद करना होगा. राष्ट्र को कोई बना या बिगाड़ नहीं सकता, राष्ट्र तो पैदा होते हैं.
2. हम 70 साल से स्वतंत्र हैं, लेकिन पहली बार दुनिया को महसूस हो रहा है कि भारत उठ रहा है. सीमा पर और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हमने दुश्मनों को जवाब दिया है. डोकलाम जैसे मुद्दे पर हमने धैर्य के साथ काम लिया.

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3. आर्थिक विकास की गति थोड़ी मंद हो गई है, लेकिन फिर भी हम इस क्षेत्र में जिस तरह से आगे बढ़े हैं, इससे सारी दुनिया में हमारी प्रतिष्ठा बढ़ी है.
4. दो तीन महीने पहले कश्मीर के हालात ठीक नहीं थे, लेकिन जिस तरह से सेना और पुलिस को कार्रवाई करने की पूरी अनुमति दी गई, राष्ट्रविरोधी ताकतों की आर्थिक धारा को बंद कर दिया गया, पाकिस्तान से साथ संबंध रखने वालों को उजागर किया गया. इन सब प्रयासों का अच्छा परिणाम देखने को मिल रहा है. जम्मू-कश्मीर में इतने वर्षों के शासन में विकास नहीं पहुंचा, जम्मू और लद्दाख के नागरिकों के साथ सौतेला व्यवहार किया गया.
5. हमारी सुरक्षा के लिए सीमा पर जवान जान की बाजी लगाकर कर्तव्य का निर्वहन कर रहे हैं। उनको कैसी सुविधाएं मिल रही हैं. उनको साधन संपन्न बनाने के लिए हमें अपनी गति बढ़ानी पड़ेगी. शासन के अच्छे संकल्प तो हैं लेकिन इसको लागू कराना और पारदर्शिता का ध्यान रखना जरूरी है.

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6. केरल और बंगाल में जिहादी और राष्ट्रविरोधी ताकतें अपना खेल रही हैं. वहां की राज्य सरकारें इस मुद्दे पर गंभीरता से ध्यान नहीं दे रही हैं.
7. बांग्लादेशी अवैध घुसपैठियों की समस्या अभी तक नहीं सुलझी है. म्यांमार से खदेड़े गए रोहिंग्या मुसलमान हमारे देश में आ गए. रोहिंग्या मुसलमानों के संबंध चरमपंथी ताकतों के साथ हैं, इसलिए उनकी सरकार ने इन्हें अपने देश से खदेड़ दिया, अगर हम भारत में उन्हें जगह देंगे तो वे हमारे ऊपर आर्थिक बोझ बन जाएंगे. मानवता की बात से हटकर हमे देश की सुरक्षा पर भी ध्यान देना होगा.

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8. देश में अच्छी योजनाएं चली हैं, भ्रष्टाचार पर रोक लगाने के लिए प्रयास किए गए. पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था में असंतुलन बना हुआ है. बाकी देशों में विविधता कम है. जबकि हमारा देश विविध प्रकार से बना है. इसलिए हमें ऐसा आर्थिक तंत्र चाहिए जो सभी को साथ लेकर चल सके. कोई जरूरी नहीं की जीडीपी ही किसी देश के विकास का सूचक हो.
9. भारत के अनेक लोग गौरक्षा और गौपालन में लगे हैं. कई मुसलमान भी गौरक्षा के कार्यों लगे हैं. मैं ऐसे कई मुसलमानों को जानता हूं जो गौशाला चलाते हैं उसका प्रचार करते हैं, इनका संघ से कोई संबंध भी नहीं है. हमारे देश में गाय को दूध के लिए कम और गोबर और गौमूत्र के लिए ज्यादा पालते हैं. गौरक्षा के नाम पर हुई हिंसा में संघ का नाम न जाने क्यों जोड़ा जाता है. गौरक्षा से हिंसा का संबंध नहीं जोड़ना चाहिए.

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10. कानून औऱ संविधान का पालन करके ही गौरक्षा करनी चाहिए. देश में कानून-व्यवस्था ठीक रहे इसलिए उच्च पदस्थ लोग और सुप्रीम कोर्ट कुछ निर्णय लेते हैं, उनके शब्दों के आधार को बिगाड़ दिया जाता है. इसकी चिंता गौरक्षा करने वालों को नहीं होनी चाहिए, यह उनके लिए नहीं है. कई मुसलमान लोग खुद मुझसे गौरक्षा कानून बनाने के लिए बोलते हैं.
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