तेलंगाना के किसान 24 घंटे बिजली का विरोध क्यों कर रहे हैं?

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तेलंगाना के किसान गांवों में 24 घंटे बिजली दिए जाने से परेशान हैं. उन्हें डर है कि लगातार बिजली दिए जाने से ज़मीन से पानी की निकासी अधिक होगी और उन्हें भविष्य में सूखा का सामना करना पड़ेगा.
येर्रम अंजीरेड्डी ने बीबीसी तेलुगू से कहा, "मोटर ज़मीन से पानी की निकासी करेंगे तो उनके बोरिंग के कुएं सूख जाएंगे."
सरकार ने जुलाई में घोषणा की थी कि राज्य के तीन ज़िलों को 24 घंटे बिजली मुहैया कराई जाएगी.
लेकिन किसानों की मांग है कि बिजली में नौ घंटे तक कटौती की जाए.
जहां देश के नेता चुनावों के वक्त 24 घंटे बिजली देने का वादा करते हैं, किसानों की यह मांग अजीब सी प्रतीत होती है.

अधिकतर किसानों के पास ऐसे मोटर हैं, जो बिजली आते ही चालू हो जाती है. किसानों का कहना है कि मोटर बंद करने पर भी उन्हें पानी की कमी झेलनी पड़ सकती है क्योंकि दूसरे किसान इसे चालू छोड़ देंगे.
तीनों ज़िलों में जल स्तर तेजी से घटा है, जिससे सूखे की स्थिति उत्पन्न हुई है. यहां अधिकतर किसान बोरिंग के कुएं से पानी निकालते हैं.
अंजीरेड्डी कहते हैं, "हमलोग किसानी के लिए पूरी तरह से बोरिंग के कुएं पर आश्रित हैं. 24 घंटे बिजली हमारे भविष्य के लिए बड़ा ख़तरा है."
अधिकारियों ने बीबीसी को बताया कि 24 घंटे बिजली न देने से संबंधित किसानों के आवेदन मिले हैं. मेडक, नलगोंडा और करीमनगर में करीब दस लाख किसान हैं.
एक अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि बिजली 24 घंटे न देकर 12 घंटे दी जा रही है, हालांकि कटौती की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है.
नलगोंडा जिला के किसान सतीश कहते हैं, "हमलोगों ने 9 घंटे बिजली बाधित करने को कहा था लेकिन वो 12 घंटे बिजली काट रहे हैं."
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