रोहिंग्या मुसलमान घुसपैठिए और देश के लिए ख़तरा हैं: गोविंदाचार्य

- Author, आदर्श राठौर
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन के संस्थापक केएन गोविंदाचार्य ने रोहिंग्या मुसलमानों को भारत के लिए ख़तरा बताते हुए उन्हें वापस भेजने की मांग की है.
गोविंदाचार्य ने शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय से रोहिंग्या शरणार्थियों के मामले में उन्हें भी पक्षकार बनाने की मांग की थी. अदालत सोमवार को इस पर सुनवाई कर सकती है.
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े और भारतीय जनता पार्टी के सिद्धांतकार रह चुके केएन गोविंदाचार्य ने कहा, "रोहिंग्या अवैध घुसपैठिए हैं. हम उन्हें अपने देश में रखें, इस पर कोई अंतरराष्ट्रीय या संवैधानिक दबाव नहीं है."
म्यांमार के रखाइन प्रांत में हिंसा के कारण बड़ी संख्या में रोहिंग्या मुसलमान वहाँ से भागकर बांग्लादेश में शरण ले रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र ने कहा है बांग्लादेश में शरण लेने वाले रोहिंग्या शरणार्थियों की संख्या दो लाख 70 हज़ार हो गई है.
रखाइन प्रांत में हिंसा की शुरुआत 25 अगस्त को हुई थी जब रोहिंग्या मुस्लिम चरमपंथियों ने कई पुलिस थानों में आग लगा दी थी.
बौद्ध बहुल देश म्यांमार में अल्पसंख्यक रोहिंग्या मुस्लिमों का कहना है कि सेना और रखाइन बौद्ध समुदाय उनके ख़िलाफ़ दमनकारी अभियान चला रहे हैं.
ख़तरा हैं रोहिंग्या
गोविंदाचार्य ने दो टूक कहा कि रोहिंग्या भारत के लिए ख़तरा हैं.
उन्होंने कहा, "रोहिंग्या के आतंकवादी समूहों से संपर्क की भी ख़बरें मीडिया में आ चुकी हैं. इनको देश में न रखा जाए. इसके समाधान के लिए कूटनीतिक और बाकी प्रयास किए जाएं लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जाए."
उन्होंने कहा, "हमें अपनी सुरक्षा का ध्यान रखना पड़ेगा. हमें अपने संसाधनों का भारत के नागरिकों के लिए संविधान सम्मत उपयोग करने का अधिकार है."

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'हस्तक्षेप से पहले न्यायपालिका करे इंतज़ार'
गोविंदाचार्य ने कहा कि ये सरकार का फ़ैसला है, ये सरकार का काम है और इसका हिस्सा न्यायपालिका भी है.
उन्होंने कहा, "इस संवेदनशील मामले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की म्यांमार के सत्ता प्रमुखों से बातचीत ज़रूर हुई होगी. इस पर बगैर कुछ जाने न्यायपालिका को हस्तक्षेप करने का इंतज़ार करना चाहिए."
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि रोहिंग्या मुस्लिमों के चरमपंथी संगठनों अल-क़ायदा और लश्कर-ए-तैयबा से संबंध की बातें भी मीडिया में आ चुकी हैं.
गोविंदाचार्य ने कहा, "संसाधनों पर दबाव की ही बात केवल नहीं है. वैश्विक आतंकवाद में लगे लश्कर या अल क़ायदा के लोगों के रोहिंग्या समाज के अंदर संपर्क की बात भी आई है. तो यकीनन राष्ट्रीय सुरक्षा का पहलू भी है."

कश्मीर में रोहिंग्या कौन?
इस दौरान गोविंदाचार्य ने जम्मू-कश्मीर में रोहिंग्या मुसलमानों की मौजूदगी पर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा, "आखिर जम्मू-कश्मीर में 40 हज़ार लोगों की क्या आवश्यकता. संयुक्त राष्ट्र के अनुसार तो केवल 16 हज़ार लोग ही आईडी प्राप्त हैं, फ़िर बाकी के 24 हज़ार लोग कौन हैं? इन सभी बातों पर विचार करना होगा."
उन्होंने कहा, "40 हज़ार रोहिंग्या लोगों के लिए जिन सुविधाओं की बात की जा रही है ये इस मसले और इसकी यथास्थिति का अति सरलीकरण है."
गोविंदाचार्य ने कहा, "केवल मानवीय पहलुओं को सोचा जाए तो यह यथार्थ से मुंह मोड़ना होगा. अपनी सीमा में भारत को परराष्ट्रहितों के बारे में निर्णय करने के लिए केवल राष्ट्र हित ही कसौटी हो सकता है. मानवीय मूल्यों को भी राष्ट्रहित के संदर्भ में सोचना होगा."
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