क्या 20 साल बाद सबा और फ़राह के सिर अलग हो सकेंगे

सबा और फ़राह

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    • Author, मनीष शांडिल्य
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए, पटना से

सिर से जुड़े ओडिशा के दो बच्चों जगन्नाथ और बलराम को अलग करने के ऑपरेशन का पहला चरण नई दिल्ली के एम्स में कामयाब रहा है. दोनों फिलहाल आईसीयू में हैं. मगर पटना की सिर से जुड़ी ऐसी ही दो जुड़वां बहनें सबा और फ़राह अलग होने की उम्मीद लगभग खो चुकी हैं.

इन बहनों को सवा दो साल के जगन्नाथ और बलराम के ऑपरेशन की जानकारी नहीं थी. जब उन्हें बताया गया तो सबा ने कहा, "हम दुआ करेंगे कि ऑपरेशन पूरी तरह कामयाब हो और उनकी सेहत पूरी तरह से ठीक हो जाए."

फ़राह का कहना था, "हम चाहते हैं कि वो दोनों अपना सारा काम खुद से कर सकें."

पटना के निम्न मध्यमवर्गीय मोहल्ले समनपुर के एक साधारण घर में रहने वाली 20 वर्षीय दोनों बहनों के सिर जन्म से ही आपस में जुड़े हुए हैं और उन्हें इस दर्द का बखूबी एहसास है.

सबा, फ़राह और उनके पिता

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इमेज कैप्शन, सिर से जुड़ी बहनें सबा, फ़राह और उनके पिता शक़ील अहमद

जान का जोख़िम

इनके पिता शक़ील अहमद कहते हैं, "ऑपरेशन के बारे में हमने कभी सोचा ही नहीं. ये दोनों अल्लाह की अमानत हैं. अभी हम इन दोनों की सेवा करना चाहते हैं."

उन्होंने बताया, "ऑपरेशन में जान का जोख़िम है. इस कारण हम इस बारे में नहीं सोचते."

असल में सबा और फ़राह की दयनीय हालत को देखते हुए काफ़ी पहले सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को उन्हें इलाज़ के लिए दिल्ली लाने का आदेश दिया था.

लेकिन उनकी मां राबिया खातून ने बीबीसी से तब कहा था, "हम सुप्रीम कोर्ट का शुक्रिया अदा करते हैं लेकिन अगर ऑपरेशन होता है तो बच्चों की जान खतरे में पड़ जाएगी."

परिवार ने उस समय मासिक गुज़ारे भत्ते की मांग की थी और कहा था कि सरकार पटना में ही उनका इलाज़ कराए.

पटना के डॉक्टर दिवाकर तेजस्वी ने कई सालों तक दोनों बहनों का इलाज़ किया है.

डॉक्टर दिवाकर तेजस्वी
इमेज कैप्शन, डॉक्टर दिवाकर तेजस्वी के मुताबिक कोशिश होनी चाहिए कि इन बच्चों के जीवन स्तर में सुधार हो

सबा के शरीर में नहीं है किडनी

डॉक्टर दिवाकर तेजस्वी कहते हैं, "इन दोनों का मामला थोड़ा अलग है. ऐसे जुड़वा लोगों के दूसरे मामलों में दोनों शरीर में ज़रूरी अंग अलग-अलग होते हैं. लेकिन सबा-फ़राह के मामले में किडनी जैसा अहम अंग एक के ही शरीर में है. इसके बावजूद इन दोनों को एक बार एम्स की एक्सपर्ट टीम से मिलना चाहिए."

सबा के शरीर में कोई गुर्दा नहीं है और वो फ़राह के गुर्दे पर ही जीवित हैं.

जगन्नाथ और बलराम की उम्र अभी केवल सवा दो साल है जबकि सबा-फ़राह करीब बीस साल की हैं. लेकिन डॉक्टर दिवाकर तेजस्वी का मानना है कि सबा-फ़राह की अधिक उम्र उनके ऑपरेशन में बाधा नहीं बनेगी.

घरवालों कहना है कि शौच को छोड़ ये दोनों अपना सारा काम लगभग खुद ही कर लेती हैं, बल्कि घर के कामों में छोटी-छोटी मदद भी करती हैं.

मैंने वहां रहते सबा को आलू तो फ़राह को लहसुन साफ़ करते देखा, लेकिन कपड़े पहनने से लेकर खाना खाने और शौचालय जाने तक की उनकी रोज़ाना की दिक्कतों की कल्पना करना आम इंसान के लिए आसान नहीं है.

अभी सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर उन्हें बिहार सरकार से हर महीने आर्थिक मदद मिलती है. साथ ही चिकित्सकों की टीम समय-समय पर सबा-फ़राह के घर आकर उनकी जांच भी करती है.

सबा और फ़राह

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फिर सलमान से मिलने की चाहत

इसके अलावा दोनों बहनों की छोटी सी आर्थिक मदद बॉलीवुड स्टार सलमान ख़ान ने भी की थी. दोनों उनसे दो बार मिल चुकी हैं और सलमान को भाई मानती हैं.

फ़राह कहती हैं, "हम उनकी सभी फ़िल्में देखते हैं. हमने ट्यूबलाइट भी देखी है."

दोनों इस बार सलमान से मिलकर उन्हें राखी बांधना चाहती थीं. इसके लिए उन्होंने राखी भी मंगवा ली थी. लेकिन उनकी शिकायत है कि स्थानीय मीडिया ने उनकी यह ख़्वाहिश सलमान तक पहुंचाने में मदद नहीं की.

सबा अपनी दूसरी ख़्वाहिशों के बारे में बताती हैं, "हमें दिल्ली और अजमेर घूमने की बहुत ख़्वाहिश है. सलमान खान से फिर से मिलना भी चाहते हैं."

लगता है कि इन बहनों ने मुश्किल हालात से समझौता कर छोटी छोटी बातों में खुशियां ढूंढना सीख लिया है.

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