डोकलाम से सेना हटाने को तैयार भारत और चीन

इमेज स्रोत, Getty Images
भारत और चीन के बीच पिछले कुछ महीनों से डोकलाम में चल रहे विवाद को हल करने की दिशा में अहम सहमति बनी है.
भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक़ दोनों देश डोकलाम से सेना हटाने को तैयार हो गए हैं.
भारतीय विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर बताया, "हाल के हफ्तों में डोकलाम को लेकर भारत और चीन ने कूटनीतिक बातचीत जारी रखी है. इस बातचीत में हमने एक दूसरे की चिंताओं और हितों पर बात की. इस आधार पर डोकलाम पर जारी विवाद को लेकर हमने सीमा पर सेना हटाने का फैसला किया है और इस पर कार्रवाई शुरू हो गई है."
चीन के विदेश मंत्रालय ने इस पर प्रतिक्रिया जताते हुए कहा है, "भारत सीमा पार करने अपने सैनिकों और मशीनों को हटाएगा और चीन ऐतिहासिक सीमा समझौते के तहत अपने संप्रभु अधिकारों का इस्तेमाल करता रहेगा."
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट X समाप्त
समझौते की संभावित वजह
दिल्ली स्थित इंस्टिट्यूट ऑफ़ चायनीज़ स्टडीज़ के सीनियर फ़ेलो अतुल भारद्वाज ने दोनों देशों की डोकाम पर बनी सहमति पर कहा, दोनों देशों के बीच डोकलाम को लेकर तीन महीनों से गतिरोध बना हुआ था. चीन ने युद्ध छेड़ने की लगभग चेतावनी दे दी थी. कोई नहीं जानता था कि युद्ध का स्वरूप क्या होगा.
वे कहते हैं, ऐसी स्थिति में समझौता ही एकमात्र विकल्प था. चूंकि वे इतनी बड़ी ताकत थे कि टकराव की स्थिति यूं ही बनी नहीं रह सकती थी. भारत ने अपने संबंधों और भूटान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को प्राथमिकता दी. लेकिन अब ये साफ है कि उन्होंने अपना मन बदल लिया है. भारत को चीनी बाज़ार और चीनी निवेश की जरूरत है.
अतुल भारद्वाज की राय में, भारत के लिए हमेशा से ये दुविधा की स्थिति रही है कि वो आर्थिक फायदे को तवज्जो दे या फिर सीमा सुरक्षा को प्राथमिकता दे. पहले सुरक्षा के मुद्दे को ऊपर रखा गया और अब आर्थिक सवालों ने उसकी जगह ले ली है.
क्या है विवाद
सीमा विवाद के कारण बीते कुछ महीनों से भारत और चीन के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई थी.
सीमा विवाद के कारण दोनों देश 1962 में युद्ध के मैदान में भी आमने-सामने खड़े हो चुके हैं, लेकिन अभी भी सीमा पर मौजूद कुछ इलाकों को लेकर विवाद है जो कभी-कभी तनाव की वजह बनता है.
मई में डोकलाम को लेकर शुरू हुए तनाव के बीच भारत और चीन ने सीमा पर अपनी फ़ौज की तैनाती बढ़ा दी और एक-दूसरे से उनकी सेना को वापस बुलाने के लिए कहा.
मामला तब शुरू हुआ जब भारत ने पठारी क्षेत्र डोकलाम में चीन के सड़क बनाने की कोशिश का विरोध किया. भारत में डोकलाम के नाम से जाने जाने वाले इस इलाके को चीन में डोंगलोंग नाम से जाना जाता है.

इमेज स्रोत, Getty Images
डोकलाम का इलाका
ये इलाका वहां है जहां चीन और भारत के उत्तर-पूर्व में मौजूद सिक्किम और भूटान की सीमाएं मिलती हैं. भूटान और चीन दोनों इस इलाके पर अपना दावा करते हैं और भारत भूटान के दावे का समर्थन करता है.
भारत को इस बात की चिंता है कि इस सड़क का काम पूरा हो गया तो देश के उत्तर पूर्वी राज्यों को देश से जोड़ने वाली 20 किलोमीटर चौड़ी कड़ी यानी मुर्गी की गरदन जैसे इस इलाके पर चीन की पहुंच बढ़ जाएगी.
ये वही इलाका है जो भारत को सेवन सिस्टर्स नाम से जानी जाने वाली उत्तर पूर्वी राज्यों से जोड़ता है और सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.













