अहमद पटेल को जिताने और अमित शाह का खेल बिगाड़ने वाले?

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राज्यसभा की एक सीट के लिए दो राजनीतिक दलों के बीच ऐसी तीखी जंग पिछली बार कब लड़ी गई थी, जानकारों को याद नहीं पड़ता.
गुजरात विधानसभा के रास्ते भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और स्मृति ईरानी आसानी से ऊपरी सदन पहुंच गए लेकिन जो सीट नाक की लड़ाई बन गई थी उस पर कांग्रेसी अहमद पटेल ने शाह और उनके सिपहसालारों को गच्चा दे दिया.
दो कांग्रेसी विधायकों के अपने वोट पार्टी प्रतिनिधि के अलावा भाजपा नेताओं को दिखाने के मामले में कांग्रेस ने चुनाव आयोग का दरवाज़ा खटखटाया और लंबे सियासी ड्रामे के बाद आख़िरकार चुनाव आयोग ने अम्पायर बनकर कांग्रेस के पक्ष में फ़ैसला सुनाया और ये दोनों वोट रद्द कर दिए गए.

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लेकिन ऐसा नहीं कि इस पूरी कशमकश में महज़ इन दो वोट से ही सारा खेल बदला. इन दो के अलावा चार और ऐसे विधायक थे, जिनके वोट को लेकर कयासों का दौर जारी रहा.
कुल मिलाकर क्रॉस वोटिंग करने वाले वो छह विधायक जिन्होंने क्लाइमैक्स को दिलचस्प बनाए रखा और रतजगे को ज़रा भी बोरिंग नहीं होने दिया.
नलिन कोटडिया, भाजपा
पिछले दो साल से पाटिदार आंदोलन से जुड़े रहे नलिन से जब पूछा गया कि उन्होंने किसे वोट दिया, ''मैं आपको ये नहीं बताऊंगा लेकिन ये ज़रूर कहूंगा कि मैंने पाटिदार समुदाय के पक्ष में मतदान किया है...जब मैंने अपना वोट (गुजरात में मंत्री) प्रदीप सिंह जडेजा को दिखाया तो उनका चेहरा तमतमा गया था.''
कोटडिया ने फ़ेसबुक पर भी इस बात के संकेत दिए कि उन्होंने भाजपा के पक्ष में वोट नहीं दिया है.

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छोटू वसावा, जनता दल युनाइटेड
गुजरात में जद यू के इकलौते विधायक के वोट को लेकर भी काफ़ी बवाल रहा. हाल में बिहार में राष्ट्रीय जनता दल से नाता तोड़कर भाजपा से हाथ मिलाने वाली जनता दल युनाइटेड के नेता को पार्टी की तरफ़ से अहमद पटेल के ख़िलाफ़ वोट डालने के निर्देश दिए गए थे.
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक मतदान के बाद जब उनसे पूछा गया कि उन्होंने किसे वोट दिया है, तो उनका जवाब था, ''मैंने देश की सुरक्षा के लिए वोट दिया है.''
कंधाल जडेजा, एनसीपी
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) का दावा है कि उसके दोनों विधायकों ने कांग्रेस को वोट दिया लेकिन जडेजा ने संकेत दिया कि उनका वोट भाजपा के खाते में गया है. पोरबंदर की 'गॉडमदर' के नाम से जानी गईं संतोखबेन जडेजा के बेटे कंधाल ने 2012 में पहली बार चुनाव लड़ा था.

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जयंत पटेल, एनसीपी
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के दूसरे विधायक जयंत पटेल ने वोट डालने के बाद सिर्फ़ इतना कहा कि उनकी पार्टी यूपीए का हिस्सा है. इसके बाद वो अपनी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ रवाना हो गए.
इन चार के अलावा हाल में कांग्रेस से बगावत करने वाले शंकरसिंह वाघेला ने वोट डालने के बाद साफ़ कहा कि इस चुनाव में अहमद पटेल हारने वाले हैं ऐसे में उन्होंने अपना वोट ख़राब नहीं किया.
राघवजी पटेल और भोला गोहेल

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अब बात उन दो विधायकों की जिनके वोट रद्द होने से सारा खेल बदल गया.
कांग्रेस ने चुनाव आयोग में अपने दो बाग़ी विधायकों के वोट रद्द करने की मांग की थी. बीजेपी के सीनियर नेताओं और कुछ केंद्रीय मंत्रियों ने चुनाव आयोग जाकर कांग्रेस की मांग का विरोध किया. दोनों पक्षों की तरफ़ से चुनाव आयोग कई टीमें पहुंचीं.
चुनाव आयोग ने आधी रात के क़रीब अपना फ़ैसला सुनाया. चुनाव आयोग ने कांग्रेस के दो बाग़ी विधायकों के वोट रद्द करने का फ़ैसला लिया. इसका मतलब यह हुआ कि इस सीट को जीतने के लिए दोनों प्रत्याशियों को 45 की तुलना में 44 वोटों की ज़रूरत रह गई थी.
चुनाव आयोग ने कांग्रेस के दो विधायकों के वोटों को रद्द करने का फ़ैसला इसलिए लिया क्योंकि दोनों विधायकों ने मतदान के दौरान बीजेपी पोलिंग एजेंट को अपना बैलेट दिखाया था. चुनाव आयोग का फ़ैसला अहमद पटेल के हक़ में गया.
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