अरविंद पनगढ़िया का नीति आयोग के उपाध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा

अरविंद पनगढ़िया

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इमेज कैप्शन, देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म भूषण से भी नवाजे जा चुके हैं पनगढ़िया

जाने-माने भारतीय-अमरीकी अर्थशास्त्री अरविंद पनगढ़िया ने नीति आयोग के उपाध्यक्ष के पद से इस्तीफ़ा दे दिया है. पनगढ़िया को जनवरी 2015 में नीति आयोग का पहला उपाध्यक्ष बनाया गया था.

64 वर्षीय अरविंद पनगढ़िया ने बताया कि कोलंबिया यूनिवर्सिटी उन्हें और एक्सटेंशन नहीं दे रहा. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि फ़िलहाल वो 31 अगस्त तक इस पद पर बने रहेंगे. उन्होंने कहा, "मैंने करीब दो महीने पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 31 अगस्त तक पद छोड़ने की इच्छा जता दी थी."

उन्होंने कहा, "मुझे चयन करना था क्योंकि कोलंबिया यूनिवर्सिटी की तरह का जॉब मिलना आसान नहीं है. अमेरिकी यूनिवर्सिटी में जब तक आपकी तबीयत दुरुस्त है तब तक आप जॉब कर सकते हैं. अगर मैं 40 साल का होता तो मुझे जॉब कहीं भी मिल जाती. जिस तरह का जॉब मैं कोलंबिया यूनिवर्सिटी में कर रहा हूं वो इस उम्र में मिलना लगभग नामुमकिन है."

नीति आयोग में अपने कार्यकाल के विषय में पनगढ़िया ने कहा, "हालांकि शुरू में यह कठिन था, लेकिन जैसे जैसे मैं इसके खांचे में ढलता गया चीज़ें आसान होती गईं."

पनगढ़िया के कहा कि उन्हें इस बात की तसल्ली है कि उनके कार्यकाल में भारतीय अर्थव्यवस्था ने उच्च वृद्धि दर बनाए रखी. अपने कार्यकाल की अन्य उपलब्धियों में पनगढ़िया ने बीमार सेक्टर के निजीकरण, ख़ासकर एयर इंडिया को लेकर, और चिकित्सा, उच्च शिक्षा समेत कई क्षेत्रों में सुधार के लिए जमीन तैयार करने को गिनाया.

भारतीय प्रधानमंत्री के प्रमुख वित्तीय सलाहकारों में से एक बनने से पहले पनगढ़िया कोलंबिया यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र के प्रोफ़ेसर थे.

गौरतलब है कि 1 जनवरी 2015 को भारत सरकार द्वारा गठित नीति आयोग (नेशनल इंस्टीट्यूट फ़ॉर ट्रांसफ़ॉर्मिंग इंडिया) ने योजना आयोग की जगह सरकार के प्रमुख नीति परामर्श संस्था के रूप में योजना आयोग की जगह ली थी.

गुजरात मॉडल के समर्थक

नरेंद्र मोदी

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पनगढ़िया को नरेंद्र मोदी के गुजरात मॉडल का समर्थक समझा जाता है. उन्होंने 2014 के आम चुनावों से पहले गुजरात के विकास मॉडल के पक्ष में लेख लिखे थे.

अरविंद पनगढ़िया राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की आर्थिक सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं और राजस्थान में हुए श्रम सुधारों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है.

कोलंबिया यूनिवर्सिटी की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार, अरविंद पनगढ़िया ने 1970 के दशक में राजस्थान विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में बीए और एमए किया था और प्रिंस्टन यूनिवर्सिटी से पीएचडी की.

वो एशियन डेवेलपमेंट बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री भी रह चुके हैं और विश्व बैंक, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, विश्व व्यापार संगठन और व्यापार एवं विकास पर संयुक्त राष्ट्र के साथ भी काम कर चुके हैं.

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