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टाटा एयरलाइंस कैसे बनी थी एयर इंडिया?
- Author, सलमान रावी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
साल 2017 के जून महीने की शुरुआत में नीति आयोग ने एक रिपोर्ट में कहा था कि उन्होंने भारत सरकार से एयर इंडिया के विनिवेश की सिफारिश की है.
इसके कुछ दिन बाद एक अख़बार को दिए इंटरव्यू में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि अगर उन्हें मौक़ा मिला तो वो घाटे में चल रहे एयर इंडिया को बेच देंगे. इस ख़बर के बाद अटकलों का बाज़ार गर्म हो गया.
मीडिया में छपी ख़बरों के अनुसार 52,000 करोड़ रुपये के घाटे में चल रही एयर इंडिया को खरीदने के लिए टाटा ग्रुप सरकार से बात कर रही है.
हालांकि कंपनी ने इसकी पुष्टि नहीं की. लेकिन यदि ऐसा हुआ तो एयर इंडिया वापस वहीं चली जाएगी जहां उसका जन्म हुआ था.
टाटा का एयर इंडिया कनेक्शन
अप्रैल 1932 में एयर इंडिया का जन्म हुआ था. उस समय के उद्योगपति जेआरडी टाटा ने इसकी स्थापना की थी मगर इसका नाम एयर इंडिया नहीं था. तब इसका नाम टाटा एयरलाइंस हुआ करता था.
टाटा एयरलाइंस की शुरुआत यूं तो साल 1932 में हुई थी मगर जेआरडी टाटा ने वर्ष 1919 में ही पहली बार हवाई जहाज़ तब शौकिया तौर पर उड़ाया था जब वो सिर्फ 15 साल के थे.
फिर उन्होंने अपना पायलट का लाइसेंस लिया. मगर पहली व्यावसायिक उड़ान उन्होंने 15 अक्टूबर को भरी जब वो सिंगल इंजन वाले 'हैवीलैंड पस मोथ' हवाई जहाज़ को अहमदाबाद से होते हुए कराची से मुंबई ले गए थे.
इस उड़ान में सवारियां नहीं थीं बल्कि 25 किलो चिट्ठियां थीं.
यह चिट्ठियां लंदन से 'इम्पीरियल एयरवेज' द्वारा कराची लाई गईं थीं. 'इम्पीरियल एयरवेज़' ब्रिटेन का राजसी विमान वाहक हुआ करता था.
फिर नियमित रूप से डाक लाने ले-जाने का सिलसिला शुरू हुआ. मगर भारत में तत्कालीन ब्रितानी सरकार ने टाटा एयरलाइंस को कोई आर्थिक मदद नहीं दी थी. सिर्फ हर चिट्ठी पर चार आने दिए. उसके लिए भी डाक टिकट चिपकाना था.
शुरूआती दौर में टाटा एयरलाइंस मुंबई के जुहू के पास एक मिट्टी के मकान से संचालित होता रहा. वहीं मौजूद एक मैदान 'रनवे' के रूप में इस्तेमाल किया जाने लगा.
सिर्फ़ दो जहाज़ से शुरू हुई कंपनी
जब भी बरसात होती या मानसून आता तो इस मैदान में पानी भर जाया करता था. उस वक़्त 'टाटा एयरलाइंस' के पास दो छोटे सिंगल इंजन वाले हवाई जहाज़, दो पायलट और तीन मैकेनिक हुआ करते थे. पानी भर जाने की सूरत में जेआरडी टाटा अपने हवाई जहाज़ पूना से संचालित करते थे.
टाटा एयरलाइंस के लिए साल 1933 पहला व्यावसायिक वर्ष रहा. 'टाटा संस' की दो लाख की लागत से स्थापित कंपनी ने इसी वर्ष 155 पैसेंजरों और लगभग 11 टन डाक भी ढोई.
टाटा एयरलाइन्स के जहाज़ों ने एक ही साल में कुल मिलाकर 160, 000 मील तक की उड़ान भरी.
ब्रितानी शाही 'रॉयल एयर फोर्स' के पायलट होमी भरूचा टाटा एयरलाइंस के पहले पायलट थे जबकि जेआरडी टाटा और और विंसेंट दूसरे और तीसरे पायलट थे.
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जब विमान सेवाओं को बहाल किया गया तब 29 जुलाई 1946 को टाटा एयरलाइंस 'पब्लिक लिमिटेड' कंपनी बन गयी और उसका नाम बदलकर 'एयर इंडिया लिमिटेड' रखा गया.
आज़ादी के बाद यानी साल 1947 में भारत सरकार ने एयर इंडिया में 49 प्रतिशत की भागेदारी ले ली थी.
'एयर इंडिया' की 30वीं बरसी यानी 15 अक्टूबर 1962, को जेआरडी टाटा ने एक बार फिर से कराची से मुंबई की उड़ान भरी थी.
वो हवाई जहाज़ खुद चला रहे थे. मगर इस बार जहाज़ था पहले से ज़्यादा विकसित जिसका नाम 'लेपर्ड मोथ' था.
फिर 50वीं बरसी यानी 15 अक्टूबर 1982 को जेआरडी टाटा ने कराची से मुंबई की उड़ान भी भरी थी.