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क़तरः 'मीडिया के झूठ' से सोशल मीडिया सावधान
- Author, ज़ैनुल आबिद
- पदनाम, बीबीसी मॉनिटरिंग
क़तर में रह रहे भारतीय समुदाय के लोग मौजूदा राजनयिक संकट में अपने बारे में फ़ैलाई जा रही ग़लत जानकारियों के बारे में भ्रम सोशल मीडिया के ज़रिए दूर कर रहे हैं.
मलयालम भाषाई मीडिया में ऐसी कई ख़बरें आई हैं जिनमें बताया गया है कि दोहा में गंभीर संकट पैदा हो गया है और वहां लोगों को खाने-पीने के सामान की भी दिक्कत हो रही हैं.
सऊदी अरब, मिस्र, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन और यमन ने क़तर से संबंध तोड़ लिए हैं, जिसके बाद से मध्य पूर्व का अमीर देश क़तर अलग-थलग पड़ गया है.
क़तर में भारतीय समुदाय के लोग बड़ी तादाद में रहते हैं, इनमें से अधिकतर केरल के हैं. ये लोग सोशल मीडिया के ज़रिए बता रहे हैं कि क़तर में सबकुछ सामान्य है और उनके जीवन पर ताज़ा राजनयिक संकट का कोई ख़ास असर नहीं हुआ है.
लोगों ने मीडिया वेबसाइटों और समाचार चैनलों की भी परिस्थिति को बढ़ा चढ़ाकर पेश करने की आलोचना की है. वे सोशल मीडिया के ज़रिए लोगों को ऐसी ख़बरें शेयर करने के बारे में सचेत कर रहे हैं.
यही नहीं खाड़ी देशों में रहे भारतीय समुदाय के लोग इस विवाद में कोई भी पक्ष लेने से बचने के बारे में भी एक-दूसरे को समझा रहे हैं.
क़तर में लगभग साढ़े छह लाख भारतीय रहते हैं जो वहां की कुल आबादी के एक चौथाई हैं. इनमें से साढ़े चार लाख सिर्फ़ केरल से हैं.
पत्रकार का वीडियो
फ़ेसबुक पर पोस्ट किया गया दोहा में रहने वाले एक भारतीय पत्रकार का वीडियो वायरल हो गया है.
इस वीडियो में चर्चित रेडियो जॉकी सूरज ने मीडिया की क़तर के बारे में भ्रामक जानकारियां प्रसारित करने के लिए आलोचना की है. उनका कहना है कि मीडिया ग़लत जानकारियां दे रहा है और हालात को इतना ख़राब बता रहा है जैसे युद्ध छिड़ गया हो.
लोगों से परेशान न होने की अपील करते हुए वो कहते हैं, "यहां जीवन पहले जैसा चल रहा है. हम सब बिल्कुल ठीक हैं. हमने तनाव महसूस नहीं किया है. ऑनलाइन न्यूज़ मीडिया में आ रही ख़बरों को पढ़कर परेशान न हों. वो सिर्फ़ अपनी रेटिंग बढ़ाने के लिए ऐसा लिख रहे हैं."
सूरज ने भारत से मिले उन संदेशों के स्क्रीनशॉट भी पोस्ट किए हैं जो भारतीय परिवारों ने शुक्रिया करते हुए उन्हें भेजे हैं.
खाड़ी देशों में केरल समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले एक मुख्य समूह की क़तर इकाई के प्रमुख एसएएम बशीर ने फ़ेसबुक पर लिखा, "घबराओ मत, अफ़वाहें मत फैलाओ. हम अपने इस प्यारे देश में अल्लाह के करम से बिलकुल ठीक हैं. यहां सबकुछ सामान्य है. हम हालात को लेकर आशावादी हैं."
यात्रा संकट
हालांकि, क़तर राजनयिक संकट का यात्राओं पर व्यापक असर हुआ है. गर्मियों की छुट्टियों में महीने के अंत में भारत आने की योजना बना रहे भारतीय पर इसका बहुत बुरा असर हुआ है क्योंकि क़तर पर सऊदी अरब, मिस्र, यमन, बहरनी और संयुक्त अरब अमरीता के हवाई क्षेत्र के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई है. इससे दोहा आने जाने वाली उड़ाने बुरी तरह प्रभावित हुई हैं.
बहुत से लोग प्लाइटें रद्द होने, देरी से उड़ने और किरायों में बेतहाशा बढ़ोत्तरी की शिकायत कर रहे हैं.
दोहा से यात्रा करने वाले लोगों को वैकल्पिक इंतज़ाम करने की सलाह देने वाली एक पोस्ट फ़ेसबुक पर वायरल हो गई है.
अन्य खाड़ी देशों से होकर जाने वाली उड़ाने में टिकट बुक करने वाले लोगों से अपनी यात्रा दोबारा से प्लान करने के लिए कहा गया है. ऐसे लोगों के लिए किराया बहुत ज़्यादा बढ़ गया है.
एक फ़ेसबुक यूज़र ने मक्का यात्रा पर गए और वहां फंस गए अपने परिवार का अनुभव साझा किया है. फ़ेसबुक पर ए बशीर ने बताया कि परिवार को आख़िरकार कोलंबो के लिए उड़ान भरनी पड़ी और फिर वो वहां से दोहा आए.
इसी बीच, केरल सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से उड़ाने के मुद्दे में हस्तक्षेप करने की अपील की है. क़तर में सालाना गर्मियों की छुट्टियां 22 जून से शूरू होती हैं और इस दौरान भारतीय परिवार स्वदेश लौटते हैं.
केरल के स्थानीय प्रशासन मंत्री केटी जलील ने कहा, "जब स्कूल बंद हो जाएंगे और विदेशी एयरलाइनें वहां से उड़ानें नहीं भरेंगी तो बहुत सी समस्याएं होंगी. एयर इंडिया को को अधिक उड़ाने सुनिश्चित करनी चाहिए."
कुछ रिपोर्टों के मुताबिक दोहा से आ रहे भारतीय को एयरपोर्ट पर क़तर के रियाल बदलने में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. बताया गया है कि बैंक और फॉरेन एक्सचेंज क़तर के रियाल बदलने से मना कर रहे हैं.
(बीबीसी मॉनिटरिंग दुनिया भर के टीवी, रेडियो, वेब और प्रिंट माध्यमों में प्रकाशित होने वाली ख़बरों पर रिपोर्टिंग और विश्लेषण करता है. आप बीबीसी मॉनिटरिंग की ख़बरें ट्विटर और फ़ेसबुक पर भी पढ़ सकते हैं.)