You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
क़तर संकटः किस हाल में हैं भारतीय कामगार?
- Author, इमरान क़ुरैशी
- पदनाम, बेंगलुरु से बीबीसी हिंदी के लिए
बीते 24 घंटे में क़तर में काम कर रहे भारतीय और भारत में उनके चिंतित रिश्तेदारों के बीच लगातार फ़ोन पर बात हो रही है. हालांकि क़तर में मौजूद वे लोग अपना हाल-चाल ठीक होने का आश्वासन दे रहे हैं.
सऊदी अरब, मिस्र, बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और यमन के क़तर से राजनयिक संबंध तोड़ लिए जाने के बाद क्षेत्र में उड़ान सेवा प्रभावित हुई है और कई उड़ानें रद्द भी की जा रही हैं.
इस घटना ने क़तर में कई वर्षों से काम कर रहे भारतीयों के परिवारों को बेचैन कर दिया है. उनमें से एक नफ़ीसा (बदला हुआ नाम) यहां पढ़ाई कर रहे अपने बेटे से मिलने भारत आई थीं, तभी उन्हें क़तर संकट की ख़बर मिली.
उन्होंने बीबीसी हिंदी से कहा, 'मैं बहुत परेशान हूं और सोच रही हूं कि हमारा भविष्य क्या होगा. मेरा बेटा यहां पढ़ाई करता है. मैं उससे मिलने यहां आई थी. जब मैंने अपने पति को फोन किया तो वो इससे बिल्कुल बेअसर थे.'
नफ़ीसा अप्रैल में क़तर से बेंगलुरु आई थीं. उनका बेटा बेंगलुरु के एक कॉलेज में पढ़ता है. यह परिवार केरल का रहने वाला है.
वो और उनके पति दोनों एक कंस्ट्रक्शन कंपनी में काम करते हैं. पहले वो एक पड़ोसी देश में काम करते थे, फिर कुछ साल पहले क़तर चले गए.
क़तर में क़रीब सात लाख भारतीय काम करते हैं. उनमें से लगभग आधे दक्षिण भारत के केरल राज्य से हैं. क़तर की कंपनियों में कई बड़े पदों पर यहां के लोग हैं और बहुत सारे कंस्ट्रक्शन उद्योग में मज़दूरी भी करते हैं.
नफ़ीसा कहती हैं, 'मेरे पति ने कहा कि कुछ नहीं होगा और सब कुछ ठीक हो जाएगा. बिल्कुल, पिछली रात जब वो बाज़ार गए थे तो उन्हें मछली या मुर्गा नहीं मिला, क्योंकि खाने का सारा सामान सऊदी अरब से आता है.'
ऐसा ही अनुभव दीपक कुमार शेट्टी का भी रहा जो क़तर की राजधानी दोहा में एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम करते हैं.
उन्होंने कहा, 'ये बात सही है कि सुपरबाज़ारों के सामने लंबी लाइनें लगाकर लोगों ने दस-दस दिनों का राशन जमा कर लिया है. हो सकता है कि मुर्गा या दूध मिलने में दिक़्क़त हो, लेकिन सरकार ने अपने बयान में कहा है कि चिंता की कोई ज़रूरत नहीं है.'
क़तर में प्राकृतिक गैस और तेल के बड़े भंडार हैं लेकिन खाने की चीज़ों के लिए यह पड़ोसी देश सऊदी अरब पर निर्भर है. हालांकि कुछ भारतीयों को उम्मीद है कि संकट बढ़ने पर ईरान से खाने की आपूर्ति हो सकती है.
दीपक शेट्टी कहते हैं, 'लेकिन यहां कोई खलबली जैसा माहौल नहीं है. सब कुछ शांतिपूर्ण है. मेरे घर कर्नाटक से मुझे कई फोन आए. दिल्ली से भी कई दोस्तों ने फ़ोन किया. मैंने सबको बताया कि हम सब यहां ठीक हैं.'
केरल से ही ताल्लुक़ रखने वाले एक और भारतीय ने पहचान न ज़ाहिर करने की शर्त पर कहा कि बड़ी संख्या में एयरलाइंस के टिकट रद्द कर दिए गए हैं. उन्होंने कहा, 'इसलिए व्यापारी चिंतित हैं. सिर्फ यात्रा के लिए नहीं, बल्कि व्यापार और निवेश के लिए भी.'
लेकिन दूसरे खाड़ी देश छोड़कर क़तर में आकर काम करने वाले कुछ लोगों की उम्मीदें क़ायम हैं.
क़तर में काम कर रहे एक और भारतीय ने नाम न ज़ाहिर करने की शर्त पर बताया, '2014 के आस-पास भी ऐसा ही संकट पैदा हुआ था, लेकिन हफ्ते भर में ही चीज़ें ठीक हो गई थीं. इस बार भी हमें यही उम्मीद है.'
इंडिया कल्चरल सेंटर के गिरीश कुमार कहते हैं, 'सच में, चिंता जैसी कोई बात नहीं है. मैं यहां 12 साल से हूं और घबराने जैसी कोई बात नहीं है. हां बाज़ारों के आगे लाइनें लग रही हैं, लेकिन पहले की तरह ये सब ठीक हो जाएगा.'
बल्कि, भारतीय संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भारतीय राजनयिक मिशन के अधिकारियों से भी मुलाक़ात की है जिन्होंने उन्हें आश्वस्त किया कि अभी घबराने जैसी कोई बात नहीं है.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)