एसी, सोफ़ा, कालीन शहीद के परिवार का तो नहीं थाः योगी प्रशासन

इमेज स्रोत, Samiratmaj mishra
- Author, समीरात्मज मिश्र
- पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तानी कार्रवाई में मारे गए बीएसएफ़ के हेड कांस्टेबल प्रेम सागर के घर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी के आने से पहले एसी, सोफ़ा और कालीन लगाने और जाने के बाद उन्हें हटवाने को लेकर विवाद पर स्थानीय प्रशासन हैरान है.
देवरिया ज़िले में भाटपाररानी के एसडीएम रामकृष्ण यादव ने बीबीसी से कहा, "इसमें ग़लत क्या है? एसी, सोफ़ा या जो भी सामान वहां लगाया गया वो शहीद के परिवार का तो था नहीं."
वो कहते हैं, "पीडब्ल्यूडी ने उसे वहां पहुंचाया था और जब मुख्यमंत्री चले गए तो पीडब्ल्यूडी के लोगों ने उन्हें हटा लिया."
एसडीएम रामकृष्ण यादव इस बात पर हैरानी जताते हैं कि इसे लेकर इतनी चर्चा क्यों हो रही है?

इमेज स्रोत, Samiratmaj Mishra
उनका कहना है कि प्रशासन ने उनके घर का कोई सामान तो उठाया नहीं.
दरअसल, शुक्रवार यानी 12 मई को मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी देवरिया में भाटपाररानी तहसील के टीकमपार गांव स्थित प्रेम सागर के घर पर आए थे.
प्रेम सागर के कच्चे घर में एक कमरे को प्रशासन की ओर से 'मुख्यमंत्री के बैठने लायक़' तैयार किया गया और उसमें एसी, सोफ़ा, कालीन और कुछ दूसरे सामान रखवाए गए.
हालांकि मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ख़ुद अपने आवास पर एसी में नहीं रहते हैं लेकिन प्रशासन ने उनकी सुविधा के लिए ये सारी व्यवस्था की थी.
प्रेम सागर के भाई दयाशंकर ने बीबीसी को बताया, "जिस दिन मुख्यमंत्री जी को आना था उसी दिन ये सब सामान लोग ले आए और रखवा गए. मुख्यमंत्री जी के जाने के आधे घंटे बाद ही उठा ले गए."
दयाशंकर कहते हैं कि वैसे तो गांव में बिजली भी कभी-कभी ही आती है लेकिन उस दिन सारे दिन बिजली थी और एसी चल भी रहा था.
प्रेम सागर बीएसएफ़ में हेड कांस्टेबल थे और इस समय जम्मू कश्मीर में तैनात थे.

इमेज स्रोत, samiratmaj mishra
पिछले दिनों सांभा सेक्टर में पाकिस्तानी गोलीबारी में वो मारे गए थे और फिर उनके शव को उत्तर प्रदेश के देवरिया में टीकमपार गांव लाया गया था.
उनके गांव वालों और परिवार वालों ने मुख्यमंत्री को गांव में बुलाने की मांग की थी और कहा था कि जब तक मुख्यमंत्री नहीं आएंगे तब तक प्रेम सागर का अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा.
मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने प्रेमसागर के परिवार वालों से बात करके ख़ुद ये आश्वासन दिया था कि वो दस दिन के भीतर वहां आएंगे.
इसी आश्वासन के बाद प्रेम सागर का अंतिम संस्कार किया गया.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)












