You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
एआईएमपीएलबी : ‘पर्सनल लॉ’ में दख़लंदाज़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी'
- Author, समीरात्मज मिश्र
- पदनाम, लखनऊ से बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
तीन तलाक़ पर देश भर में चल रही बहस के बीच ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने साफ़ कर दिया है कि शरीया क़ानून में किसी भी तरह की सरकारी दखलंदाज़ी के वो ख़िलाफ़ है.
लखनऊ के नदवा कॉलेज में दो दिन तक चली बोर्ड की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में बोर्ड के महासचिव मौलाना वली रहमानी ने दावा किया कि हिन्दुस्तान के ज़्यादातर मुसलमान मुस्लिम पर्सनल लॉ में किसी भी तरह का बदलाव नहीं चाहते.
बोर्ड में ये भी फ़ैसला लिया गया है कि मुस्लिम दहेज के बजाय संपत्ति में हिस्सा दें और तलाक़दा महिलाओं की मदद की जाए.
बोर्ड के महासचिव मौलाना वली रहमानी का कहना था, "देश में पर्सनल लॉ पर कुछ इस तरह चर्चा होने लगी है कि उनकी अहमियत और उपयोगिता पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं. साथ ही शरीअत के बारे में कोई जानकारी न रखने वाले लोगों ने इस पर उंगली उठाना शुरू कर दिया है. ऐसे हालात में शरीअत का सही रूप देश के सामने रखने के लिए बोर्ड की जिम्मेदारी और बढ़ गई है."
बोर्ड के पदाधिकारियों ने तमाम मुद्दों के अलावा तीन तलाक़, समान नागरिक संहिता और राम मंदिर विवाद पर भी चर्चा की.
बैठक के बाद बोर्ड के सदस्य सदस्य मौलाना ख़ालिद रशीद फिरंगी महली ने बीबीसी को बताया, "बोर्ड में एक महिला विंग का गठन किया गया है जो कि ट्रिपल तलाक़ के मामलों पर निगरानी रखेगी. ट्रिपल तलाक़ की वजहों की पड़ताल की जाएगी और महिलाओं को न्याय दिलाया जाएगा."
फिरंगीमहली ने बताया कि डॉक्टर असमा जेहरा को इस विंग का अध्यक्ष मनोनीत किया गया है.
बैठक में ये भी कहा गया है कि ट्रिपल तलाक़ के विवादित मामलों को रोकने की कोशिश की जाए और बेवजह तलाक़ देने वालों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाए.
बोर्ड के सदस्यों का कहना था कि ऐसे लोगों के सामाजिक बहिष्कार की कोशिश की जाएगी.
इसके अलावा तीन तलाक जैसे धार्मिक मुद्दों को लेकर कई मुस्लिम संगठनों ने ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के नेतृत्व में लॉ कमीशन ऑफ इंडिया के चेयरमैन जस्टिस बीएस चौहान से भी शनिवार को मुलाकात की.
बोर्ड ने जस्टिस चौहान से कहा कि उसने करोड़ों लोगों से मुस्लिम पर्सनल लॉ पर राय ली है, और वो नहीं चाहते कि धार्मिक मामलों और पर्सनल लॉ से जुड़े मुद्दों यानी निकाह, हलाला और तीन तलाक पर सरकार कोई दखल दे.
बोर्ड ने दावा किया है कि ट्रिप तलाक़ पर देश भर में चलाए गए हस्ताक्षर अभियान के बाद पांच करोड़ से ज़्यादा लोगों ने इसके समर्थन में हस्ताक्षर किए हैं जिनमें एक करोड़ से ज़्यादा हस्ताक्षर मुस्लिम महिलाओं के हैं.
महिलाओं के मुद्दों के अलावा बोर्ड की बैठक में अयोध्या में मंदिर मामले पर भी चर्चा हुई. फिरंगीमहली ने बताया कि फ़िलहाल इस मुद्दे पर बोर्ड कोर्ट के आदेश पर अमल करेगा.
11 मई से सुप्रीम कोर्ट में तीन तलाक पर रोजाना सुनवाई होनी है. पिछले कुछ समय से ये मुद्दा काफी ज़्यादा चर्चा में बना हुआ है. तीन तलाक के खिलाफ मुस्लिम महिलाएं एक के बाद एक खुलकर सामने आ रही हैं.
यही नहीं, तमाम महिलाएं और संगठन इस बारे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूपी के सीएम आदित्यनाथ योगी से इस पर प्रतिबंध लगाने और इसके ख़िलाफ़ सख़्त क़ानून बनाने की अपील कर रहे हैं.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)