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'कट्टर इस्लाम को तीन तलाक़ दें, बीवी को नहीं'
तीन तलाक़ के मुद्दे पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणी पर सोशल मीडिया में जमकर बहस हो रही है.
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तीन तलाक़ का हवाला देते हुए पूछा है, "क्या मुस्लिम महिलाओं को ये क्रूरता सहते रहना चाहिए? क्या उनकी परेशानी कम करने के लिए पर्सनल लॉ को बदलना नहीं चाहिए?"
सोशल मीडिया पर बहुत से लोग इस फ़ैसले का समर्थन कर रहे हैं तो कई इससे जोड़ कर दूसरे सवाल भी उठाए रहे हैं.
@kamalmarazak ने लिखा है , '' तीन तलाक़ के फ़ैसले का स्वागत होना चाहिए. तीन तलाक़ महिलाओं और पुरुषों के लिए प्रतिबंधित होना चाहिए. लैंगिक समानता सबके लिए होनी चाहिए.''
इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने ट्विटर पर लिखा है, "इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने अच्छे फ़ैसले में कहा है कोई भी पर्सनल लॉ बोर्ड संविधान के ऊपर नहीं है क्या इसका मतलब खाप पंचायत से भी है?"
वहीं ट्विटर हैंडल @ay_yuck ने लिखा है कि जो ट्रिपल तलाक की आलोचना करते हैं वो बजरंग दल के गुंडों की तरफ़ से मुस्लिम महिला के रेप, शोषण और मारपीट की निंदा करना भूल जाते हैं.
@ayhussain ने लिखा है कि तीन तलाक़ पर अदालत के फ़ैसले से मुस्लिम महिलाओं को बहुत मदद नहीं मिलेगी लेकिन मुसलमानों में असुरक्षा ज़रूर बढ़ेगी.
कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने लिखा है , '' मैं बड़ी विनम्रता से माननीय अदालतों से अनुरोध करना चाहूंगा कि उन्हें धर्म और धर्मों के रीति रिवाज़ में दख़लअंदाज़ी नहीं करना चाहिए.''
वहीं इसके जवाब में कई लोगों ने ट्वीट किए.
एक ट्विटर यूज़र अमित @Mr_Pandey13 ने लिखा है कि @TarekFatah जिस इस्लाम की बात करते हैं उसे मानें. कट्टर इस्लाम को तीन तलाक़ कहें न कि अपनी पत्नी को.
वहीं फ़रज़ान ख़ान @AIMIM_faraz ने लिखा है कि इकॉनॉमिक्स टाइम्स की ख़बर के हवाले से लिखा है कि भाजपा नेता सुब्रम्णयम स्वामी के साथ बहस में कहा कि तीन तलाक के मामले काफ़ी कम हैं.
उन्होंने लिखा है, '' @asadowaisi ने @Swamy39 के साथ बहस में दावा किया कि तीन तलाक के मामले बहुत कम हैं .''
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