केरल में 'माहवारी का जश्न'

सेलिब्रेट मेंस्ट्रुएशन

इमेज स्रोत, Pragit Parameswaran

    • Author, प्रगीत परमेशरन
    • पदनाम, तिरुअनंतपुरम से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए

लंबे समय से माहवारी के लेकर एक टैबू और खामोश शर्मिंदगी का सबब रहा है.

माहवारी की स्वाभाविक जीव विज्ञान की प्रक्रिया से जुड़ा यह टैबू सैनिट्री नैपकिन्स के लेन देन में भी दिखता है.

आम तौर पर दुकानदार इसे पॉलीथीन में लपेट कर देते हैं. लेकिन केरल में इस धारणा को चुनौती देने की कोशिश हुई है.

तिरुअनंतपुरम में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च के मौके पर 'सेलिब्रेट मेंस्ट्रुएशन' यानी 'माहवारी का जश्न' के नाम से एक फ़ेस्टिवल आयोजित किया गया.

इसका आयोजन सस्टनेबल मेंस्ट्रुएशन केरला कलेक्टिव (एसएमकेसी) ने किया था.

सेलिब्रेट मेंस्ट्रुएशन

इमेज स्रोत, Pragit Parameswaran

इसके तहत माहवारी से जुड़ी धारणाओं के ख़िलाफ़ आंदोलनों को एक मंच पर लाया गया है.

इस पहलकदमी में कोझिकोड़ के रेड साइकिल, #HappytoBleed अभियान, हाइकू और कोडरेड के अलावा एक स्थानीय एनजीओ थनल शामिल हैं.

आयोजन की संयोजकों में से एक थनल की श्रद्धा श्रीजया कहती हैं, "माहवारी से संबधित साफ सफाई के लिए वैकल्पिक तौर तरीक़ों और उत्पादों के के बारे में जागरूकता पैदा करना और इन्हें प्रोत्साहित करना इसका मुख्य उद्देश्य है."

श्रीजया के अनुसार, "अध्ययन बताते हैं कि बहुत सारी महिलाएं, खासकर छात्राएं सैनिट्री नैपकिन्स से निकलने वाले केमिकल्स से होने वाले सर्वाइकल कैंसर जैसी तमाम बीमारियों से ग्रसित हो रही हैं."

इस दिन, एसएमके ने माहवारी से जुड़ी ग़लतफ़हमियों को दूर करने के लिए कई गतिविधियां कराईं जिनमें चर्चा, कला प्रदर्शनी, नुक्कड़ नाटक और उन्नीकृष्णन द्वारा निर्देशित चर्चित डॉक्युमेंट्री 'वुमननेस' की स्क्रीनिंग हुई.

सेलिब्रेट मेंस्ट्रुएशन

इमेज स्रोत, Pragit Parameswaran

इमेज कैप्शन, श्रद्धा श्रीजया

इस दौरान माहवारी में इस्तेमाल किए जाने वाले वी कप (थ्रिसूर), नमस्कृति (थ्रिसूर), शोमोटा पैड (कोलकाता), हाईजीन एंड यू (डेलही) एंड इकोफेम (ऑरोविले) जैसे वैकल्पिक उत्पादों के स्टॉल लगाए गए थे.

कार्यकर्ताओं और अन्य लोगों के अलावा इस फ़ेस्टिवल में नौजवान और स्टूडेंट्स की काफ़ी संख्या थी.

असल में यह फ़ेस्टिवल कलेक्टिव के उस अभियान की शुरुआत है, जिसे पूरे साल भर राज्य में चलाया जाएगा.

श्रद्धा ने बताया कि पहले चरण में माहवारी को लेकर वैकल्पिक साफ़ सुथरे तौर तरीकों के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने का अभियान चलाया जाएगा. दूसरे चरण में सरकार से ऐसे तौर तरीक़ों के पक्ष में कानून बनाने पर जोर देना है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)