ELECTION SPECIAL: विधानसभा सीट जिसको मायावती का है इंतज़ार

- Author, दिव्या आर्य
- पदनाम, हरौड़ा से, बीबीसी संवाददाता
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के एक ग्रामीण क्षेत्र की किस्मत क़रीब 20 साल पहले तब चमक गई, जब मायावती यहां से जीतकर विधायक बनीं.
अक्तूबर 1996 में हरौड़ा विधानसभा सीट जीत मायावती ने उसपर पहली बार बहुजन समाज पार्टी की मोहर लगाई.
छह महीने बाद मायावती उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनीं. उस दौर में हरौड़ा में आई विकास की लहर के निशान आज भी दिखाई देते हैं.
इसलिए नहीं कि इतना वक़्त बीतने के बाद भी उनकी चमक बरक़रार है बल्कि इसलिए क्योंकि मायावती के दो बार के कार्यकाल के बाद ये लहर थम गई.
और ये तब जब इलाके में बहुजन समाज पार्टी का ही दबदबा रहा. नतीजा ये कि हरौड़ा में स्कूल-कॉलेज और पॉलिटेकनिक तो हैं पर वहां से पढ़ कर निकलनेवालों के लिए रोज़गार नहीं.
ख़ास लड़कियों के लिए बनाए गए 'सावित्री बाई फूले पॉलिटेकनिक' में कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई कर रही हिना को इसी की चिंता है.
मायावती के चलते विकास
हिना बताती हैं, "हमारे यहां से सारी प्लेसमेंट गुड़गांव, नोएडा और राजस्थान में होती है पर अक़्सर मां-बाप हमें वहां नहीं जाने देते, अगर कंपनियां यहां होतीं तो हमें भी ख़ुद को साबित करने का एक मौका मिल पाता."

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हरौड़ा विधानसभा क्षेत्र जो साल 2008 के परिसीमन के बाद 'सहारनपुर देहात' बन गया, ग्रामीण इलाका है. उस लिहाज़ से यहां कई सरकारी स्कूल, महिला इंटर कॉलेज, डिग्री कॉलेज, पॉलिटेकनिक और मेडिकल कॉलेज हैं.
इन सबकी नींव रखने या शुरू करवाने का श्रेय मायावती को ही दिया जाता है. 1996 के बाद वो साल 2002 में भी यहां से विधायक चुनी गईं थी.
उसी दौर में उन्होंने कम्यूनिटी हेलथ सेंटर (सीएचसी) और प्राइमेरी हेल्थ सेंटर (पीएचसी) भी बनवाए. पर इन सेंटरों में डॉक्टरों की भारी कमी है और आज तक किसी महिला डॉक्टर की नियुक्ति ही नहीं हुई है.
हरौड़ा के सीएचसी के अधीक्षक डॉ के.डी. चौधरी के मुताबिक क्षेत्र में 155 डॉक्टर्स की पोस्ट हैं पर उनमें से 45 ही भरी गई हैं, यानी दो-तिहाई खाली हैं.
सीएचसी के रास्ते में मुझे कई ऐसे लोग मिले जिन्होंने मुफ़्त दवा और इलाज ना मिलने की शिकायत की.
सुविधाओं का अभाव
इन सबसे तो डॉ. चौधरी ने इनकार किया पर माना कि उनके सीएचसी में चिकित्सा की कई सुविधाएं हैं ही नहीं.
वो बोले, "बच्चों के वॉर्ड, ट्रेन्ड गाइनेकॉलोजिस्ट, हड्डियों के डॉक्टर और सर्जन होने चाहिए, पर हैं नहीं, इसलिए हमें कई केस ज़िला अस्पताल भेजने पड़ते हैं."
विधानसभा क्षेत्र की सरपट दौड़ती सड़कों से, लखनऊ जैसा विशाल तो नहीं, पर उसी की याद दिलाता 'डॉ. भीमराव अंबेडकर पार्क' दिखता है.

पर नज़दीक जाएं तो पाएंगे कि ये भी दो साल से बंद पड़ा है. छोटे से इस बगीचे के आसपास बनी दो झीलों से बदबू आती है.
वहां काम कर रहे वन संरक्षण विभाग के अधिकारी बताते हैं कि आसपास के गांवों से नाली का पानी इन झीलों में आकर मिलता है और इसके निकास या ट्रीटमेंट की कोई सुविधा नहीं बनाई गई है.
वैसे इन सड़कों से एक और नज़ारा भी देखने को मिलता है. सड़क किनारे ताश खेलते नौजवान और अधेड़ उम्र के लोगों का.
इनमें से एक मुरसलीन कहते हैं, "बी.ए. करने के बाद भी यहां कोई रोज़गार नहीं है, दिहाड़ी मज़दूरी ही करनी पड़ती है वो भी दूसरे शहरों में जाकर, ऐसे में बिजली-सड़क-पानी का हम क्या करें."
परेशानियां कम नहीं
इलाके में कई दशक पहले एक मीट फ़ैक्टरी लगाई गई थी, पर उसके बाद यहां ऐसा कोई निवेश नहीं हुआ.
गांवों में दाख़िल हों तो गांववाले सड़कें टूटी, पीने का पानी गंदा और नालियों की निकासी नहीं- जैसी परेशानियों की झड़ी लगा देते हैं.

हालांकि ये भी सच है कि मायावती ने अपने कार्यकाल में यहां 70 गांवों को 'आंबेडकर गांव' घोषित किया जिसके बाद उनका काफ़ी विकास हुआ.
गांववाले बताते हैं कि उस दौर में बिजली कटौती होती ही नहीं थी. आज ज़्यादातर गांवों में बिजली आती तो है लेकिन रात के कुछ घंटों के लिए ही.
साल 2003 के उप-चुनाव में इस सीट के समाजवादी पार्टी के पास जाने के अलावा पिछले 20 सालों से ये हमेशा बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के पास ही रही है.
सवा तीन लाख मतदाताओं वाले इस विधानसभा क्षेत्र में क़रीब सवा लाख दलित समुदाय से हैं और उतने ही मुसलमान हैं.
मायावती के बाद यहां से बसपा के जगपाल सिंह चार बार विधान सभा चुनाव जीत चुके हैं.

उनसे मिलने के इंतज़ार में रात हो गई. एक गांव के प्रधान की 'घेर' में टिमटिमाते बल्ब की रौशनी में आंखें गड़ाए बैठे रहे.
बोलचाल और हावभाव में बेहद साधारण लगनेवाले जगपाल सिंह जब पहुंचे तो मायावती की तारीफ़ों के पुल बांधने लगे.
मायावती पर ही भरोसा?
मैंने क्षेत्र के विकास के बारे में पूछा तो खुद चार बार विधायक रहने के बावजूद उन्होंने स्वास्थ्य, शिक्षा और संसाधनों से जुड़े सभी कार्यों का श्रेय मायावती को दे डाला.
हार कर जब रोज़गार की कमी और गांवों के अंदर नालियों की कमी के बारे में पूछा तो विधायक जगपाल ने कहा, "इसकी वजह और निदान तो बहन मायावती ही बताएंगी, जब वो कोई ऐलान कर देंगी हम उसपर अमल करेंगे."

शायद यही वजह है कि इस विधानसभा क्षेत्र को विकास के लिए फ़िर मायावती का ही इंतज़ार है.
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