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ELECTION SPECIAL: मुसलमान वोट किसको मिलेगा, किसका कटेगा?
- Author, ज़ुबैर अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, मुरादाबाद से
मुरादाबाद शहर में लगभग 50 कार्यकर्ताओं से घिरे ऑल इंडिया मजलिस इतिहादुल मुस्लमीन के उम्मीदवार हाजी शहाबुद्दीन घर-घर जाकर लोगों से वोट माँग रहे हैं.
हाजी साहब ख़ुद से अधिक पार्टी के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी का नाम लेते हैं और उत्तर प्रदेश में परिवर्तन लाने पर ज़ोर देते हैं.
हाजी शहाबुद्दीन स्थानीय हैं लेकिन उनकी परेशानी ये है कि उनकी पार्टी को 'बाहर' की पार्टी कहा जा रहा है. पीतल के एक कारख़ाने के मालिक अख़्तर अली कहते हैं "ओवैसी की पार्टी बाहर की है. यहाँ उनकी दाल नहीं गलेगी"
ऑल इंडिया मजलिस इतिहादुल मुस्लमीन ने उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव में 34 उम्मीदवार खड़े किए हैं. राज्य में हैदराबाद की ये पार्टी पहली बार चुनाव लड़ रही है.
हाजी शहाबुद्दीन के कार्यकर्ता उनके साथ रोड शो में ख़ूब जोश में नारे लगा रहे हैं. हमारे कैमरे को देख कर उनकी आवाज़ और भी बुलंद हो जाती है.
लेकिन उनके जोश को देख कर मतदाताओं में कोई जोश नज़र नहीं आता.
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ओवैसी की पार्टी वोट काटेगी
मुरादाबाद के लोगों का कहना है कि मजलिस केवल मुसलमानों के वोट काटने का काम करेगी. एक वोटर ने कहा कि यूपी में उनका खाता भी नहीं खुलेगा. मगर वो मुस्लिम वोट काट सकते हैं.
मुरादाबाद शहर से समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार और मौजूदा विधायक हाजी यूसुफ़ अंसारी मजलिस को भाजपा का एजेंट कहते हैं. उनका आरोप है कि मजलिस ने भाजपा को फ़ायदा पहुँचाने के लिए राज्य में 35 उम्मीदवार खड़े किए हैं.
वो कहते हैं "अगर ओवैसी मुसलमानों के मसीहा बनते हैं तो उन्हीं सीटों पर उम्मीदवार क्यों खड़े किए हैं जहाँ मुसलमान वोटरों की भारी संख्या है?" वो आगे कहते हैं कि उनकी पार्टी का यूपी में भी वही हाल होगा जो 2015 के बिहार विधान सभा चुनाव में हुआ था जहाँ उन्हें एक भी सीट नहीं मिली.
मुस्लिम वोट बंटेंगे
तो क्या यूपी विधानसभा चुनाव में मुसलमानों के वोट बँटने की संभावना है? और मुस्लिम वोट बँटे तो इससे फ़ायदा किसको होगा?
मुस्लिम समुदाय अपने वोटों के बँटने के ख़तरे से इनकार नहीं करता. इस बार का चुनाव तीनतरफ़ा है. अधिकतर सीटों पर मुक़ाबला भाजपा, बसपा और सपा-कांग्रेस गठबंधन के बीच है.
देवबंद की एक प्रमुख मुस्लिम हस्ती हसीब सिद्दीक़ी कहते हैं कि जहाँ दो बड़े मुस्लिम उम्मीदवार मैदान में हैं वहाँ मुस्लिम वोट विभाजित होंगे.
वो बताते हैं, "जिन सीटों पर बसपा और सपा-कांग्रेस गठबंधन ने मुस्लिम उम्मीदवार खड़े किए हैं वहाँ मुस्लिम वोटों के बंटने की सम्भावना है. इसका फ़ायदा निश्चित रूप से भाजपा को होगा."
सिद्दीक़ी देवबंद का उदाहरण देते हुए कहते हैं कि इस विधान सभा सीट पर समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार मुस्लिम हैं और दोनों लोकप्रिय नेता हैं. उनके अनुसार मुस्लिम वोट को ना बंटने देने का प्रयास चल रहा है.
दुकानदार नज़ाकत अंसारी कहते हैं उन्हें डर है कि देवनंद में कहीं मुस्लिम वोट विभाजित ना हो जाए और अगर ऐसा हुआ तो उनके अनुसार भाजपा इसका फ़ायदा उठा सकती है
बहुजन समाज पार्टी ने यूपी चुनावों में 97 मुस्लिम उम्मीदवार खड़े किए हैं. किसी और पार्टी ने मुसलमानों को इतनी बड़ी संख्या में टिकट नहीं दिया है. भाजपा ने तो एक भी मुस्लिम उम्मीदवार को मैदान में नहीं उतारा है.
पिछली विधान सभा में समाजवादी पार्टी ने 64 उम्मीदवार खड़े किए थे जिनमें 41 जीते थे.
मुसलमानों के वोटों को सभी पार्टियाँ हासिल करना चाहती हैं. राज्य के कुल मतदाताओं का 20 प्रतिशत हिस्सा मुसलमान हैं. कहा जाता है कि राज्य की 403 सीटों में से 105 पर मुस्लिम वोट चुनाव के परिणाम को प्रभावित करेगा.
लेकिन हाजी शहाबुद्दीन के अनुसार मुस्लिम समाज एक सामूहिक फ़ैसला करके वोट नहीं देता. उनके अनुसार आज का मुस्लिम वोटर होशियार है. वो पार्टी को भी देख कर वोट नहीं देता. वो कहते हैं इस बार मुसलमान मतदाता उम्मीदवारों को देख कर अपना मतों का इस्तेमाल करेंगे.
इसीलिए हाजी साहब कहते हैं कि वो मुस्लिम-हिंदू वोट बैंक के चक्कर में नहीं पड़ते. "हम सभी समुदाय का वोट चाहते हैं"
लेकिन उनका रोड शो कुछ और दर्शाता है. इसमें ना केवल उनके सभी कार्यकर्ता मुसलमान थे बल्कि वो रोड शो भी मुस्लिम मोहल्लों में कर रहे थे.
बुधवार को रामपुर से समाजवादी पार्टी के विवादास्पद नेता आज़म ख़ान मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के साथ मिल कर एक सभा कर रहे थे.
नेताओं के आने से पहले मंच से भाषण देने वाले सभी समुदाय के नेता मौजूद थे. भीड़ में हिंदू मुस्लिम और सिख सभी नज़र आए. आज़म ख़ान ने सभी समुदाय से वोट माँगे.
रामपुर मुस्लिम बहुमत वाली सीट है. भीड़ में मौजूद कई मुस्लिम मतदाताओं ने कहा कि कोई मुस्लिम उम्मीदवार यहाँ तक कि आज़म ख़ान भी हिंदू वोटरों के समर्थन के बग़ैर चुनाव जीत नहीं सकते.