क्या-क्या हो सकता है तमिलनाडु में?

वीके शशिकला.

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    • Author, इमरान क़ुरैशी
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए

राजनीतिक अस्थिरता ने तमिलनाडु को अपनी गिरफ़्त में ले लिया है. परिस्थितियां कभी भी बदल सकती हैं. लेकिन इस खेल के हर खिलाड़ी के पास अपने-अपने पत्ते हैं.

राज्यपाल विद्यासागर राव ने ओ पनीरसेल्वम को नई व्यवस्था होने तक कार्यवाहक मुख्यमंत्री के रूप में काम करते रहने को कहा है.

एआईएडीएमके के विधायक दल ने वीके शशिकला को अपना नेता बनाने का प्रस्ताव पास कर उसे राजभवन को भेज दिया है.

सामान्य परिस्थितियों में राज्यपाल को वीके शशिकला को पद और गोपनीयता की शपथ दिला देनी चाहिए. लेकिन राज्यपाल मुंबई के राजभवन से अभी बाहर नहीं निकले हैं ( महाराष्ट्र के राज्यपाल विद्यासागर राव के पास तमिलनाड़ु के राज्यपाल का अतिरिक्त कार्यभार है)

जयललिता के साथ वीके शशिकला.

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कार्यवाहक मुख्यमंत्री पनीरसेल्वम ने सार्वजनिक तौर पर कहा है कि उन्हें इस्तीफ़ा देने के लिए मजबूर किया गया. उन्होंने यह भी कहा है कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि विधायक दल की बैठक नए नेता के चुनाव के लिए बुलाई गई है. परंपरा के मुताबिक़ विधायक दल का नेता ही इस तरह की बैठक बुला सकता है.

अब ऐसे में सवाल उठता है कि तमिलनाडु की राजनीति के इन खिलाड़ियों के पास विकल्प क्या-क्या हैं.

राज्यपाल विद्यासागर राव

वो एआईएडीएमके के विधायक दल के प्रस्ताव के मुताबिक वीके शशिकला को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिला सकते हैं. इसके बाद वो पनीरसेल्वम की ओर से सार्वजनिक तौर पर लगाए गए आरोपों को देखते हुए वो शशिकला को एक निश्चित समय सीमा में बहुमत साबित करने के लिए कह सकते हैं.

ओ पनीरसेल्वम.

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वो किसी ऐसे नेता को बुला सकते हैं जिसे लगता है कि वो सदन में बहुमत साबित कर देगा.

वो शशिकला को शपथ दिलाने में देरी कर सकते हैं, क्योंकि अभी राज्य में कार्यवाहक मुख्यमंत्री पनीरसेल्वम की सरकार है.

राज्यपाल विद्यासागर राव, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी.

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पनीरसेल्वम ने कहा है कि उन्होंने दबाव में आकर इस्तीफ़ा दिया है, इसलिए राज्यपाल यह कह सकते हैं कि वो मुख्यमंत्री के इस्तीफ़े पर पुनर्विचार कर रहे हैं. वो पनीरसेल्वम को विधानसभा में बहुमत साबित करने के लिए कह सकते हैं.

ओ पनीरसेल्वम

वो अपना इस्तीफ़ा वापस नहीं ले सकते हैं, क्योंकि राज्यपाल ने उसे मंज़ूर कर लिया है.

ओ पनीरसेल्वम.

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वो जितना भी संभव हो उतने विधायकों का समर्थन जुटाएं. ( उन्होंने 50 से अधिक विधायकों का समर्थन होने का दावा किया है.)

अगर राज्यपाल ने उन्हें पहले विधानसभा में बहुमत साबित करने के लिए कहते हैं तो वो अधिक विधायकों के समर्थन की उम्मीद कर सकते हैं.

विधानसभा में अलग गुट बनाने के लिए उन्हें कम से कम 90 विधायकों की ज़रूरत होगी. यह संख्या एआईएडीएमके के 133 विधायकों की दो तिहाई है. तमिलनाडु की विधानसभा में 234 सीट है. जयललिता के निधन की वजह से एक सीट खाली है.

वीके शशिकला

सदन में बहुमत साबित करने के लिए वो अधिक विधायकों का समर्थन जुटा सकती हैं.

लोगों का अभिवादन करतीं वीके शशिकला.

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विधानसभा का सत्र शुरू होने पर वो अपनी पार्टी के विधायकों को ह्विप जारी कर सदन में मौजूद रहने और उनके पक्ष में समर्थन करने के लिए कह सकती हैं. जिससे उनका वोट सदन में बहुमत साबित करते समय गिना जा सके.

राज्यपाल अगर एआईएडीएमके के विधायक दल की ओर से पारित प्रस्ताव के आधार पर चलते हैं, तो वो शशिकला को सरकार बनाने और बहुमत साबित करने के लिए कहेंगे.

संवैधानिक रूप से उनका आधार पनीरसेल्वम से अधिक मज़बूत है. वो अगले हफ़्ते विधानसभा का सत्र बुलाने की अपील कर सकती हैं.

आय से अधिक संपत्ति के मामले में सुप्रीम कोर्ट अगले हफ़्ते फ़ैसला सुना सकता है. इसमें दोषी पाए जाने पर वो ख़ुद ही मुख्यमंत्री पद के अयोग्य हो जाएंगी.

पार्टी कार्यकर्ता और जनता

ऐसे पार्टी कार्यकर्ता और आम लोग जो शशिकला को पसंद नहीं करते हैं और उनसे नाराज़ हैं, क्योंकि उन्होंने उन्हें उनकी अम्मा से दूर रखा. ऐसे लोग पनीरसेल्वम के समर्थन में सड़क पर उतर सकते हैं. शशिकला के समर्थक विधायक भी पाला बदल सकते हैं.

अगर राज्यपाल पनीरसेल्वम को दस दिन से अधिक समय बहुमत साबित करने के लिए देते हैं तो पार्टी के अधिक से अधिक विधायक उनके खेमे में चले जाएंगे.

पार्टी कार्यकर्ताओं का अभिवादन करतीं शशिकला.

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अगर सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला शशिकला के पक्ष में आया तो पासा पलट सकता है.

एआईएडीएमके ने चुनाव आयोग के दो फ़रवरी के उस पत्र का जवाब भी नहीं दिया है, जिसमें कहा गया है कि पार्टी में कार्यवाहक महासचिव के चुनाव का प्रावधान नहीं है. इसका मतलब यह हुआ है शशिकला का चुनाव स्थायी नहीं था.

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