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'जयललिता को किसी ने धक्का दिया था'
एआईएडीमके के एक वरिष्ठ नेता पी एच पांडियन ने पूर्व मुख्यमंत्री जे जयललिता की मृत्यु पर संदेह जताते हुए दावा किया है कि उनकी मृत्यु स्वाभाविक परिस्थितियों में नहीं हुई.
पांडियन ने चेन्नई में मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा,"मुझे पता चला था कि जया डिप्रेस्ड थीं और पोएज़ गार्डन में उनकी किसी से बहस हुई थी और किसी ने उनको धक्का दिया जिसके बाद वो गिर गईं."
उन्होंने दावा किया कि किसी को संदेह ना हो इसलिए उन्हें अस्पताल ले जाया गया.
उन्होंने पार्टी में शशिकला को पार्टी महासचिव और विधायक दल का नेता चुने जाने के फ़ैसले पर भी सवाल उठाया है.
एआईएडीएमके में असंतोष होने की अटकलों के बीच पहली बार किसी बड़े नेता ने ख़ुलकर ऐसा गंभीर बयान दिया है.
पांडियन पार्टी के संस्थापक सदस्य और पूर्व विधानसभा स्पीकर रहे हैं.
पांडियन के दावे से एक दिन पहले ही एक ब्रिटिश डॉक्टर ने एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर कहा था कि जयललिता की मृत्यु स्वाभाविक कारणों से हुई थी.
अस्पताल के ब्यौरे पर संदेह
पी एच पांडियन ने कहा कि 22 सितंबर को जयललिता को अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया मगर अस्पताल ने जो ब्यौरा दिया है वो संदिग्ध है.
उन्होंने कहा कि कुछ समाचारपत्रों में तब ख़बर छपी थी कि जयललिता को उनके पोएज़ गार्डन स्थित घर पर किसी ने धक्का दिया था जिससे वो गिर गई थीं.
पांडियन ने कहा,"मैं उन्हें देखने अपोलो हॉस्पिटल गया था मगर वहाँ उनके बारे में किसी ने कोई जानकारी नहीं दी. बाद में मुख्यमंत्री के अंगरक्षकों ने मुझसे कहा कि उनकी तबीयत ठीक है जिसके बाद मैं घर लौट आया."
पांडियन ने कहा कि ऐसा कई दिनों तक चलता रहा.
उंगलियों के लिए गए निशान
उन्होंने कहा कि बाद में राज्य में दो सीटों पर हुए उपचुनाव के दौरान जयललिता के अंगूठों के निशान से चुनाव के फ़ैसलों पर उनकी मंज़ूरी लिए जाने की ख़बरें आईं और तब भी मैंने सवाल पूछा मगर मुझे संतोषजनक जवाब नहीं मिला.
पांडियन ने कहा कि इसके बाद 5 दिसंबर को बताया गया कि जयललिता को अचानक दिल का दौरा पड़ा है.
उन्होंने कहा,"उस रात शशिकला अपने परिवार के साथ अस्पताल से बाहर निकलीं, मगर उनके चेहरे पर मुझे कोई दुःख नहीं नज़र आया."
पांडियन ने ये भी संदेह जताया कि जयललिता की ऊँगलियों के निशान का इस्तेमाल कर उनकी संपत्ति भी चुराई जा सकती है.
शशिकला पर सवाल
प्रेस कॉन्फ़्रेंस में मौजूद पी एच पांडियन के बेटे और एआईएडीएमके नेता मनोज पांडियन ने दावा किया कि जयललिता नहीं चाहती थीं कि शशिकला तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनें.
उन्होंने कहा कि शशिकला को पार्टी का अस्थायी प्रभार दिया गया था और उनपर आर्थिक अपराधों में लिप्त रहने के भी आरोप हैं जिससे उन्हें मुख्यमंत्री नहीं बनाया जा सकता.
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