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फ्लिपर लगाकर कछुए को बचाया
- Author, अश्विन अघोर
- पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
मुंबई के पास दहानु के माछुआरे के जाल में पिछले हफ़्ते एक कछुआ फंसा तो उसे देखकर वो चौंक गए.
क्योंकि उस कछुए का अगला दांया फ्लिपर कटा हुआ था जिसकी वजह से वह न तो उस कछुए को वापस समंदर में छोड़ सकते थे और ना ही अपने पास रख सकते थे.
तैरने के लिए सबसे ज़रूरी अंग न होने की वजह से उस कछुए का ज़िंदा रहना भी काफी मुश्किल लग रहा था. लेकिन दहानु के टर्टल रेस्क्यू एंड ट्रांजिट सेंटर में डॉक्टरों और स्वयंसेवी कार्यकर्ताओं ने इस कछुए को बचाने की ठानी.
डॉक्टर दिनेश विन्हेरकर इस सेंटर में सेवा देते हैं. जब उन्हें इस कछुए के बारे में पता चला तब उन्होंने इसकी जाँच के बाद एक कृत्रिम फ्लिपर लगाने का फ़ैसला लिया.
डॉ विन्हेरकर ने बीबीसी को बताया, "यह ठीक वैसा ही है जैसे किसी इंसान को कृत्रिम हाथ या पैर लगाया जाता है. जब इस कछुए की जाँच की गई तब पता चला कि वह मादा ओलिव रिडली टर्टल है और उसका दायाँ फ्लिपर टूटा हुआ है, जिसकी वजह से वह तैर नहीं पा रहा थी. दायाँ फ्लिपर भले ही टूटा हो लेकिन, उसका थोड़ा सा हिस्सा, जिसे बड कहते है, अभी भी मौजूद था. यह एक अच्छी निशानी थी और हमने इसका उपयोग कर उसे कृत्रिम फ्लिपर लगाने का निर्णय लिया."
इसके बाद काफी जाँच पड़ताल की गई. आख़िरकार इस कछुए के लिए प्लास्टिक का एक फ्लिपर बनाया गया.
इसके लगने के बाद यह कछुआ अब सेंटर के तालाब में मज़े से तैर रहा है. इस फ्लिपर पर आगे और भी रिसर्च किया जाएगा, ताकि इसकी मदद से कछुए पानी में गहराई तक जा सके.
डॉक्टर विन्हेरकर ने बताया, "चुंकि यह कृत्रिम फ्लिपर है इसलिए इस कछुए को समंदर में नहीं छोड़ा जा सकता. वहाँ इसके दूसरे जलचर जानवरों का शिकार बनाने की काफी संभावना है. इसलिए, इसे सेंटर के तालाब में ही रखा जाएगा."
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