नोटबंदी के बाद मोदी सरकार के एजेंडे में क्या?

इमेज स्रोत, Getty Images
- Author, दिनेश उप्रेती
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
8 नवंबर को नोटबंदी की घोषणा के बाद इस बात पर भी चर्चा चल रही है कि काले धन को मुख्य मुद्दा बनाकर सत्ता में पहुँची मोदी सरकार आने वाले समय में और क्या-क्या फैसले ले सकती है. साथ ही नोटबंदी के बाद बने हालात का बजट घोषणाओं पर भी क्या कुछ असर दिख सकता है.
अर्थशास्त्रियों के मुताबिक नोटबंदी के दौरान दिन पर दिन, यहाँ तक कि घंटे दर घंटे, बदलते सरकारी रुख़ से इस बारे में कुछ भी पुख्ता कह पाना मुश्किल है.
घरेलू रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री धर्मकीर्ति जोशी और अर्थशास्त्री सुनील सिन्हा का कहना है कि 30 दिसंबर के बाद आयकर चोरी के संदिग्धों पर छापे बढ़ सकते हैं, बेनामी संपत्ति पर शिकंजा कसने के साथ-साथ सोने की ख़रीदारी पर भी अंकुश लगाने के लिए नियम कड़े किए जा सकते हैं.

धर्मकीर्ति जोशी और सुनील सिन्हा के मुताबिक नोटबंदी के बाद सरकार की नीति में लगातार बदलाव ने देश की अर्थव्यवस्था को भारी नुक़सान पहुँचाया है और आगे भी नुकसान हो सकता है.
सिन्हा कहते हैं, "नोटबंदी के दौरान नीति में लगातार बदलाव से निवेशकों पर बुरा असर पड़ा. नीति में स्थिरता होना ज़रूरी होती है, लेकिन इस मुद्दे पर लगातार असमंजस की स्थिति बनी और अभी तक जारी है."

इमेज स्रोत, Getty Images
अर्थशास्त्री सिन्हा कहते हैं, "सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर गिरी है और वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी का भी 1 अप्रैल से लागू हो पाना मुश्किल नज़र आ रहा है."
जीएसटी मोदी सरकार के आर्थिक सुधारों के एजेंडे में सबसे ऊपर रही है. हालाँकि ये विधेयक संसद से पारित हो चुका है, लेकिन इसके प्रशासनिक अधिकारों को लेकर राज्यों और केंद्र के बीच सहमति नहीं बन सकी है.
जीएसटी काउंसिल सहमति बनाने पर काम कर रही है. काउंसिल की 3-4 जनवरी को होने वाली बैठक में सहमति बनाने की कोशिश होगी.

सुनील सिन्हा कहते हैं कि हालाँकि आम बजट में वित्त मंत्री अरुण जेटली लोगों के लिए आयकर की सीमा बढ़ाने की घोषणा कर सकते हैं.
उनके मुताबिक, "सरकार ये बताना चाहेगी कि नोटबंदी से उसने काले धन की समानांतर अर्थव्यवस्था को खत्म करने की कोशिश की है और इसके बाद कर वसूली बढ़ेगी. इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए वो आयकर छूट की सीमा बढ़ा सकती है."

इमेज स्रोत, Getty Images
उनका मानना है कि इससे सरकार नोटबंदी की परेशानी से लोगों की नाराज़गी को कुछ हद तक दूर सकती है.
केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली 1 फ़रवरी को बजट पेश करेंगे.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)












