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महेश शाह के बारे में कितना जानते हैं आप?
- Author, नितिन श्रीवास्तव
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
अहमदाबाद के एक मध्यमवर्गीय इलाके में मंगलजोत अपार्टमेंट्स का गेट बंद है.
बाहर चाय, पान-सिगरेट और जनरल स्टोर की दुकानें हैं और सभी दुकानदारों की नज़र गेट पर रहती है.
अपार्टमेंट के दूसरे फ़्लोर पर फ़्लैट नंबर 206 है जिसके पास फटकने की इजाज़त कुछ ही लोगों को है.
दोपहर को गार्ड से मिन्नतें कर हम बिल्डिंग में दाखिल हुए और फ़्लैट की तस्वीर ले ही रहे थे कि एक शख्स ने दरवाज़ा खोला और उतनी तेज़ी से बंद भी कर दिया.
ये 67 साल के महेश शाह हैं जिन्हें अब गुजरात ही नहीं देश-विदेशों तक लोग जानते हैं.
घर के बाहर चाय की दुकान पर कटिंग चाय पीने वाले महेश शाह को पड़ोस में कम लोगों ने देखा है.
चाय बेचने वाले कांतिलाल मीणा ने बताया, "अक्सर आते थे लेकिन कभी ऐसा कुछ नहीं लगा कि इतने पैसे वाले होंगे".
चाय की दुकान के पीछे रमेश पटेल की बड़ी सी पान की दुकान है.
रमेश ने कहा, "हमारे यहाँ ग्राहक आते रहते हैं. महेश शाह भी उनमें से एक थे. उन्हें एक महंगी ब्रांड वाली सिगरेट पीने का शौक है."
30 सितंबर, 2016 को सरकार की 'इनकम डिस्क्लोज़र स्कीम' के आखिरी घंटों में महेश शाह ने 13,860 करोड़ अघोषित आय का फ़ॉर्म भरा.
हालांकि उन्हें पहली किस्त में ही 1000 करोड़ रूपए जमा करने थे जो उन्होंने नहीं किए.
इसके बाद कुछ दिन तक महेश शाह लापता रहे जबकि इनकम टैक्स विभाग ने उनके घर, दफ़्तर और रिश्तेदारों के यहाँ तलाश जारी रखी.
हफ़्तों बाद महेश शाह एक टेलीविज़न चैनल पर लाइव दिखे और कहा, "मैंने सरकारी स्कीम के तहत 13,860 करोड़ रुपये के काले धन के बारे में बताया है. लेकिन ये पैसा मेरा नहीं बल्कि कई नेताओं, बिज़नेसमैनों और बिल्डरों का है".
उन्होंने कहा, "दूसरों की अघोषित आय की घोषणा करने का उनका फैसला गलत था लेकिन अधिकारियों के सामने वे सबको बेनक़ाब कर देंगे."
बेहद नाटकीय अंदाज़ में इसी टीवी लाइव के दौरान स्थानीय पुलिस और आयकर विभाग अधिकारी महेश शाह को पूछताछ के लिए ले गए.
घंटों पूछताछ के बाद, सख्त हिदायतों के बीच पुलिस की पोशाक पहना कर महेश शाह को आयकर विभाग दफ़्तर से घर तक छुपा के पहुंचाया गया था.
इस मामले की जांच अभी भी कथित तौर पर जारी है कि पुलिस पोशाक वाला 'आइडिया' किसका था.
इस बीच महेश शाह के परिवार वालों पर मीडिया की नज़रें निरंतर बनी रही है.
24 नवंबर, 2016 को हमने दोबारा उनके फ़्लैट का दरवाज़ा खटखटाया तो उनकी पत्नी और बेटी ने कहा, "वे किसी से बात नहीं करेंगे".
अगले दिन, यानी 25 नवंबर को कैंसर से पीड़ित उनकी पत्नी का देहांत हो गया.
जानकार बताते हैं कि महेश महेश शाह रहते भले अहमदाबाद में ज़्यादा हों लेकिन उनके बिज़नेस मुंबई में ज़्यादा रहे हैं.
मिसाल के तौर पर साल 2008 में रजिस्टर्ड हुई उनकी रियल एस्टेट कंपनी बेटी के नाम है और महेश शाह के बेटे मोनितेश शाह 'बिज़नेस के सिलसिले में मुंबई ज़्यादा रहते हैं'.
महेश के चार्टर्ड एकाउंटेंट तेहमुल सेठना ने कुछ पत्रकारों से कहा था, "महेश ज़्यादातर ज़मीन के कारोबार में रहे हैं. वे दिल के मरीज़ हैं और स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता. जब आईडीएस स्कीम आई मैंने ही उनसे मानसिक तनाव से बचने के लिए ऐसा करने की राय दी थी."
इस दौरान आयकर विभाग महेश शाह से अपने अहमदाबाद दफ़्तर में कई बार, घंटो-घंटों तक पूछताछ कर चुका है.
पत्नी की मृत्यु के पहले अपनी गिरफ़्तारी की आशंका से महेश शाह ने अग्रिम ज़मानत याचिका दायर की थी जिसे नामंज़ूर कर दिया गया है.
इस बीच कांग्रेस और कुछ विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार से महेश शाह से अभी तक मिली जानकारी को उजागर करने की मांग बढ़ा दी है.
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