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प्रेस रिव्यू- 'नॉर्वे में भारतीय दंपति को बेटे से अलग किया'
इंडियन एक्सप्रेस का कहना है कि पांच साल में तीसरी ऐसी घटना में नॉर्वे की सरकार ने वहां भारतीय मूल के एक दंपति को उनके बच्चे से अलग कर दिया है.
ऑस्लो में भारतीय मूल के माता पिता पर पांच साल के अपने बेटे को पीटने का आरोप लगाया गया है.
ऑस्लो से इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए बच्चे के पिता अनिल कुमार ने कहा, "नॉर्वे में बाल कल्याण विभाग ने 13 दिसंबर सुबह मेरे साढ़े पांच साल के बेटे को उसके किंडरगार्टन स्कूल से अपनी कस्टडी में ले लिया था."
अख़बार के अनुसार उन्होंने कहा- "हमें पहले से कोई जानकारी नहीं दी गई थी. सुबह 10 बजे चार पुलिस अधिकारी मेरे घर आए और मेरी पत्नी को हिरासत में ले लिया. उनसे दोपहर तक पूछताछ की गई. मेरे बेटे को ऑस्लो से 150 किलोमीटर दूर हमार में बाल कल्याण केंद्र में रखा गया है."
उन्होंने बताया कि उनके बच्चे से डेढ़ घंटे तक पूछताछ की गई और इसका वीडियो उन्हें दिखाया गया है.
अनिल कुमार नॉर्वे में एक भारतीय रेस्त्रां चलाते हैं और वहां ओवरसीज़ फ्रेंड्ज़ ऑफ़ बीजेपी के उपाध्यक्ष रहे हैं. उन्होंने दिल्ली में भाजपा नेताओं और भारत सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है.
द हिंदू ने लिखा है कि अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन ने ग्लोबल वेज रिपोर्ट 2016-2017 जारी की है.
इसके मुताबिक़ भारत में महिलाओं और पुरुषों में एक सी नौकरियों के लिए मिलने वाले वेतन में तीस फ़ीसदी से ज़्यादा का अंतर है.
सिंगापुर में ये अंतर केवल तीन फ़ीसदी है. विकसित अर्थव्यवस्थाओं में सिर्फ़ दक्षिण कोरिया में ही ये अंतर भारत से ज़्यादा है, दक्षिण कोरिया में ये 37 फ़ीसदी है.
भारत में सबसे कम वेतन पाने वाले वर्ग में 60 फ़ीसदी महिलाएं हैं और सबसे ज़्यादा वेतन पाने वालों में केवल 15 प्रतिशत महिलाएं हैं.
अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के ज़ेवियर एस्टूपिनान ने कहा, " न सिर्फ़ ज़्यादा वेतन वर्ग में महिलाओं की संख्या कम है बल्कि कम वेतन वाली नौकरियों में भी भारत में महिला-पुरुष के वेतन में भारी अंतर है.''
इंडियन एक्सप्रेस ने लिखा है कि मणिपुर के मुख्यमंत्री ओकराम इबोबी सिंह ने नगा समुदाय के लोगों को हिंसा के लिए ज़िम्मेदार ठहराया है. उन्होंने केंद्र सरकार पर नगा लोगों पर दबाव न डालने का आरोप भी लगाया है.
उनका कहना है कि केंद्र सरकार एनएससीएन (आईएम) के साथ वार्ता में शामिल है, इसलिए केंद्र सरकार को एनएससीएन (आईएम) को आर्थिक नाकेबंदी हटाने के लिए कहना चाहिए.
टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने लिखा है कि जो परिवार साथ में हवाई यात्रा करना चाहते हैं उन्हें विमान में साथ की सीटों पर बैठने के लिए ज़्यादा कीमत चुकानी होगी.
सीट चुनने के लिए अलग से फ़ी या 'फ़ैमिली फ़ी' सुविधा दुनिया भर की विभिन्न एयरलाइन कंपनियों ने करीब आठ साल पहले शुरु की थी लेकिन भारत में इस साल पहली बार इसे लागू किया जा रहा है.
एयर इंडिया ने मई में इसे लागू किया तो निजी एयरलाइन कंपनी जेट एयरवेज़ ने हाल ही में 'सीट सिलेक्शन फ़ी' में बदलाव किया है.
अख़बार के मुताबिक, मान लीजिए कि तीन सदस्यों का एक परिवार मुंबई से लंदन जा रहा है तो एक साथ बैठने के लिए एयर इंडिया इसके लिए 9,000 रुपए अतिरिक्त लेती है, जबकि जेट एयरवेज़ में ये रक़म 4,500 रुपए होगी.
टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने लिखा है कि कर्नाटक में कृषि को छोड़ कर निजी उद्योगों में मज़दूरी की नैकरियों पाने वालों के लिए सरकार आरक्षण की तैयारी कर रही है.
अख़बार के मुताबिक, इसमें कन्नड लोगों के लिए 100 फ़ीसदी आरक्षण करने की तैयारी हो रही है.
कर्नाटक के श्रम विभाग ने कर्नाटक इंटस्ट्रियल एंप्लॉयमेंट कानून में बदलाव का मसौदा जारी किया है.
कन्नड लोगों के लिए 100 फ़ीसदी आरक्षण का प्रस्ताव इंफ़ोटेक और बायोटेक सेक्टर को छोड़कर निजी उद्योगों के लिए लाया जा रहा है.
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