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फ़ॉक्स ने बॉलीवुड में रखा क़दम | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
हॉलीवुड की कई बेहतरीन और आलीशान फ़िल्मों में आपने अकसर ट्वेन्टियथ सेंचुरी फ़ॉक्स का लोगो देखा होगा. हॉलीवुड की कुछ सफलतम और बेहतरीन फ़िल्में इसी कंपनी ने दी हैं- टाइटैनिक, आइस ऐज, स्टार वार्स. ट्वेन्टियथ सेंचुरी फ़ॉक्स ने स्टार के साथ मिलकर अब अपने क़दम बॉलीवुड की ओर बढ़ाए हैं और भारतीय निर्माता-निर्देशक विपुल शाह के साथ एक बड़ा करार किया है. ये घोषणा लंदन में शुक्रवार देर शाम की गई. विपुल शाह बतौर निर्माता और निर्देशक कई फ़िल्में बना चुके हैं जिनमें सिंह इज़ किंग, नमस्ते लंदन और आँखें शामिल है. एशिया में बड़ी योजनाएँ फ़ॉक्स स्टार स्टूडियो दरअसल ट्वेन्टियथ सेंचुरी फ़ॉक्स और स्टार के बीच ज्वाइंट वेंचर है जो एशिया में बड़े पैमाने पर फ़िल्मों का निर्माण और डिस्ट्रिब्यूशन करेगा. इसकी शुरुआत कंपनी ने भारत से की है. विपुल शाह ने इस क़रार के बारे में बताया, "मेरी प्रोडक्शन कंपनी ने फ़ॉक्स दो फ़िल्मों की डील साइन की है जो भारत में पहली डील होगी. एक फ़िल्म रोमाटिंग कॉमेडी होगी और दूसरी फ़ैन्टसी एक्शन फ़िल्म होगी जिसमें विज़ुयल इफ़ेक्टस इस्तेमाल किए जाएँगे." बीबीसी से बातचीत में विपुल ने कहा, "कोशिश यही होगी कि कुछ ऐसी फ़िल्में बनाई जाएँ जो भारत के सिनेमा को नए स्तर पर ले जाए. फ़ॉक्स को ऐसा साझीदार चाहिए जिससे उसका फ़लसफ़ा मेल खाता हो. फ़ॉक्स के पास स्पेशल इफ़ेक्टस विभाग में, लेखन में हुनरमंद लोग हैं, मार्केटिंग, वितरण का अच्छा ख़ासा आधारभूत ढाँचा है. उसका फ़ायदा हमें मिलेगा." उन्होंने माना कि भले ही भारतीय सिनेमा आगे बढ़ा है लेकिन वैश्विक स्तर पर उसकी पहुँच भारतीय समुदाय के बाहर सीमित है और फ़ॉक्स से जुड़ने से इसे बदलने में मदद मिलेगी क्योंकि फ़ॉक्स का डिस्ट्रिब्यूशन नेटवर्क दुनिया भर में है. बाज़ार पर नज़र? फॉक्स स्टार स्टूडियो इंडिया प्राइवेट लिमिटिड के सीईओ विजय सिंह ने बीबीसी को बताया कि इरादा इस कंपनी को भारत में सिंग्ल स्टॉप शॉप बनाने का है यानी यहाँ निर्माण, मार्केटिंग, वितरण आदि सब कुछ एक ही जगह होगा. उन्होंने कहा कि ज़्यादातर निर्माताओं से अलग कंपनी मल्टीप्लेक्स मालिकों से ख़ुद समझौता करेगी. उनका कहना था कि अगर सब कुछ ठीक रहा तो अगले कुछ वर्षों में कंपनी का भारत में यशराज की तरह स्टूडियो भी होगा. साथ ही फ़ॉक्स आधिकारिक रूप से इजाज़त के साथ हिंदी में हॉलीवुड फ़िल्मों के रीमेक भी बनाएगा और हॉलीवुड फ़िल्में भारत में प्राथमिकता से रिलीज़ की जाएँगी. फ़ॉक्स भारतीय बाज़ार में क़दम क्यों रख रही है? क्या ये सृजनशीलता की दिशा में दो कंपनियों का करार भर है या फिर कंपनी नज़र भारतीय बाज़ार पर है? इस सवाल का सीधा-सपाट जवाव देने से सब लोग बचते रहे.
वैसे बॉलीवुड में ये हॉलीवुड का पहला क़दम नहीं है. पिछले साल सोनी पिक्चर्स ने सांवरिया का निर्माण किया था, वाल्ट डिज़नी ने यश राज के साथ हाथ मिलाया है. इसी महीने यशराज- डिज़नी की एनिमेशन फ़िल्म रोडसाइड रोमियो रिलीज़ होगी तो वार्नर ब्रदर्स भी बॉलीवुड में एंट्री ले चुका है. एक अनुमान के मुताबिक भारतीय फ़िल्म उद्योग अगले चार- पाँच सालों में दोगुनी दर से आगे बढ़ेगा यानी करीब 4.4 अरब डॉलर का कारोबार होगा. कई बड़ी हॉलीवुड फ़िल्में ख़ासकर एक्शन और विशेष इफ़ेक्टस वाली फ़िल्में भी भारत में अच्छा ख़ासा व्यवसाय करती हैं. फ़ॉक्स स्टार स्टूडियो भारत के अलावा दक्षिण पूर्व एशिया और चीन में बाज़ार में भी उतरना चाहता है. जब बाज़ार इतना लुभावना हो तो बाहरी निवेश आना लाज़मी है. लोगों की उम्मीद शायद बस इतनी भर होगी कि ऐसे तालमेल से उन्हें अच्छा सिनेमा देखने को नसीब हो. | इससे जुड़ी ख़बरें ऑस्कर लाइब्रेरी पहुँची 'नमस्ते लंदन' 16 जुलाई, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस पॉज़िटिव सोच बनाती है किंग: अक्षय07 अगस्त, 2008 | मनोरंजन एक्सप्रेस रुलाना आसान है, हँसाना मुश्किल'26 मार्च, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस 'सिंह इज़ किंग' के ख़िलाफ़ प्रदर्शन08 अगस्त, 2008 | मनोरंजन एक्सप्रेस सोनम बनेंगी अभिषेक की हीरोइन04 नवंबर, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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