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बुधवार, 16 अप्रैल, 2008 को 12:56 GMT तक के समाचार
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'कारनेज बाई एंजेल्स' उतरेगी पर्दे पर

कारनेज बाई एंजेल्स
वाईपी सिंह अपनी कारनेज बाई एंजेल्स पर आधारित एक फ़िल्म बना रहे हैं
आईपीएस अफ़सर की नौकरी छोड़ वकालत का पेशा अपनाने वाले मुंबई के जानेमाने वकील वाईपी सिंह अपनी पुस्तक 'कारनेज बाई एंजेल्स' पर अब एक फ़िल्म बनाने जा रहे हैं.

उनकी इस फ़िल्म को प्रोड्यूस कर रहे हैं बॉलीवुड के जानेमाने प्रोड्यूसर फारुक नाडियाडवाला. फारुक ने इससे पहले फ़िल्म ऑफिसर निर्देशित की थी जिसमें सुनील शेट्टी और रवीना टंडन ने अभिनय किया था.

कहते हैं कि जब चोट दिल पर हो तो असर आंसूओं से या शब्दों के ज़रिए बाहर निकलता है. कुछ ऐसी ही कहानी है पूर्व आईपीएस अधिकारी वाई.पी. सिंह की.

एक प्रतिष्ठित नौकरी को वाई.पी. सिंह ने उस वक्त छोड़ा जब वो एक उच्च पद पर तैनात थे.

दिल पर कुछ ऐसी चोटें लगीं कि शब्दों के ज़रिए एक किताब की शक्ल में लोगों के सामने आ गईं. बाद में ये किताब लोगों द्वारा इतनी सराही गई कि अब वो इस पर एक फ़िल्म बनाने की तैयारी कर चुके हैं.

वाईपी सिंह ने बीबीसी से अपनी किताब और उस पर आधारित फ़िल्म के बारे में लंबी बातचीत की.

ये पूछे जाने पर कि कब उन्हें लगा कि इस पर एक फ़िल्म बननी चाहिए वो कहते हैं, " अपनी पुस्तक के विमोचन के वक्त मैने इसके कुछ पन्ने लोगों को पढ़कर सुनाए थे जिसे सुनने के बाद कई लोगों की आँखों में आंसू आ गए थे,उसी समय मुझे किसी ने राय दी थी कि अगर इस किताब को एक फिल्म की शक्ल में लोगों के सामने लाया जाए तो उसका असर काफ़ी व्यापक होगा. तब से ही मेरे दिमाग़ में ये बात थी."

कारनेज बाई एंजेल्स

फ़िल्म की कहानी 25 साल के एक नौजवान की है जो आईपीएस की नौकरी शुरु करता है और किस तरह से उसे अपनी अलग अलग पोस्टिंग के दौरान तकलीफों का सामना करना पड़ता है.

फ़िल्म का पूरा ताना-बाना इस दौरान उसके जीवन में उभरे भावनात्मक द्वंद को दर्शाने की कोशिश के इर्द गिर्द होगा.

वाईपी सिंह कहते हैं कि ये फ़िल्म बॉलीवुड की किसी फ़ॉर्मूला फ़िल्म की तरह नहीं होगी जहां गोलियों और खून के ज़रिए कहानी आगे बढ़ेगी बल्कि एक ऐसे आदमी की कहानी होगी जिसके ज़रिए पुलिस महकमे की कार्य प्रणाली को वास्तविक आधार पर दर्शाया जाएगा.

पहली बार वो किसी फ़िल्म को निर्देशित करने जा रहे हैं तो क्या वो इसके लिए पूरी तरह से तैयार हैं? वो कहते हैं ये विषय मेरे दिल के इतने करीब है कि मुझे लगा कि केवल मैं ही इसके साथ पूरी तरह से न्याय कर पाउंगा.

वाईपी सिंह अपनी इस फ़िल्म की शूटिंग वास्तविक लोकेशन पर करना चाहते हैं और वो इसके लिए महाराष्ट्र के गृहमंत्री से जल्द ही मिलने वाले भी हैं.

वो कहते हैं कि उन्हें पूरी उम्मीद है कि उन्हें महाराष्ट्र् के पुलिस स्टेशनों और थानों में ही शूटिंग की इजाज़त मिल जाएगी लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ तो वो दूसरे राज्य में जाकर शूटिंग करेंगे.

कारनेज बाई एंजेल्स एक ऐसे आईपीएस अधिकारी रघु कुमार की कहानी है जो एक दुखद घटना को सुनने के बाद अपनी पूरी सर्विस के दौरान ईमानदार रहने की ठान लेता है.

ये किताब मुंबई पुलिस खासकर आईपीएस अधिकारियों और उनकी पत्नियों में भ्रष्टाचार,अश्लीलता और सेक्स के कड़वे सच को उजागर करती है .इसे 2003 में रीलिज किया गया था.

ऐसा पहली बार नहीं है जब पुलिस व्यवस्था में भ्रष्टाचार पर कोई फ़िल्म बन रही है. इससे पहले भी शूल और गंगाजल जैसी कई फिल्में आईं हैं.

लेकिन इस बार ये फ़िल्म खुद एक पूर्व आईपीएस अफ़सर बने रहे हैं इसलिए इसे देखना खासा दिलचस्प होगा.

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