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भारत में रिलीज़ हुई 'ख़ुदा के लिए' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान की फ़िल्म ख़ुदा के लिए शुक्रवार को भारत के सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई है. शोएब मंसूर की इस फ़िल्म को दुनियाभर में काफ़ी सराहना मिली है. चार दशक बाद भारत में रिलीज़ होने वाली पाकिस्तान की यह पहली व्यावसायिक फ़िल्म है. यह फ़िल्म 11 सितंबर 2001 को अमरीका में हुए धमाकों के बाद वहाँ के मुसलमानों के जीवन पर आधारित है. भारत और पाकिस्तान ने 1965 में हुए युद्ध के बाद अपने यहाँ एक दूसरे की फ़िल्में दिखाने पर प्रतिबंध लगा दिया था. बाद में दोनों देशों ने इसमें थोड़ी नरमी बरती थी. 2003 में फ़िल्म 'ख़ामोश पानी' को भारत के कुछ सिनेमाघरों में रिलीज़ किया गया था. पाकिस्तान ने भी 2006 में तीन भारतीय फ़िल्मों को अपने यहाँ दिखाए जाने की इजाज़त दी थी. 'ख़ुदा के लिए' फ़िल्म में भारतीय अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने भी काम किया है. पश्चिम को जवाब समाचार एजेंसी रॉयटर्स से बातचीत में अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने कहा, 'लंबे समय से आतंकवाद से मुसलमानों से जोड़ा जा रहा था, यह समुदाय आतंकवाद का पर्याय बना गया है.' उन्होंने कहा कि पश्चिम को जवाब देने का यह उचित समय है. यही कारण है कि फ़िल्म का अधिकांश भाग अंग्रेज़ी में बनाया गया है, जिससे पश्चिमी देशों के दर्शकों को भी संदेश दिया जा सके. फ़िल्म का प्रीमियर गुरुवार को मुंबई में हुआ था. निर्देशक मधुर भंडारकर ने कहा कि यह एक बहुत बढ़िया फ़िल्म है. इस तरह की फ़िल्में बनाई जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि 'ख़ुदा के लिए' जहाँ भी दिखाई गई है, वहाँ के दर्शकों ने इसकी तारीफ़ की है. 2006 में पाकिस्तान ने अपने यहां फ़िल्म 'मुग़ले आज़म', 'ताजमहल' और 'सोहनी महिवाल' को दिखाने की इजाज़त दी थी. अभी हाल ही में पाकिस्तान ने निर्देशक अब्बास-मस्तान की फ़िल्म रेस को भी दिखाने की इजाज़त दी थी. भारतीय फ़िल्में पाकिस्तान में काफ़ी लोकप्रिय हैं. |
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