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शनिवार, 23 फ़रवरी, 2008 को 13:17 GMT तक के समाचार
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'जोधा-अकबर' पर मध्य प्रदेश में रोक

फ़िल्म जोधा-अकबर का एक दृश्य
जोधा-अकबर में ऋतिक रौशन और ऐश्वर्या राय बच्चन की प्रमुख भूमिकाएँ है
मुस्लिम कट्टरपंथियों का निशाना बनी बांग्लादेशी लेखिका तसलीमा नसरीन की अभिव्यक्ति की आज़ादी का समर्थन करने वाली मध्य प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी सरकार ने प्रदेश में हिंदी फ़िल्म जोधा-अकबर के प्रदर्शन पर रोक लगा दी है.

एक आधिकारिक आदेश में कहा गया है की जोधा-अकबर के ''प्रदर्शन के विरोध में कुछ स्थानों पर आंदोलन हुए हैं तथा शांति भंग होने की स्थिति बनी है. इस तरह की संभावनाओं को देखते हुए राज्य शासन... जोधा-अकबर का प्रदर्शन प्रदेश के समस्त छविगृहों में तत्काल प्रभाव से स्थगित करता है."

वाणिज्य कर मंत्री बाबूलाल गौड़ ने बीबीसी से कहा की राजपूत समुदाय का एक प्रतिनिधि दल उनसे मिला था और उन्होंने इस फ़िल्म में इतिहास को तोड़-मरोड़ कर दिखाए जाने का आरोप लगते हुए फ़िल्म के प्रदर्शन पर रोक लगाए जाने की मांग की थी.

देश के कई इलाकों में सिनेमा घरों ने निर्माण के समय से ही विवादों में घिरी आशुतोष गोवारीकर की इस फ़िल्म का प्रदर्शन ख़ुद ही नहीं किया लेकिन मध्य प्रदेश पहला राज्य है जहाँ आधिकारिक तौर पर जोधा-अकबर पर रोक लगाई गई है.

कांग्रेस के राजपूत नेता गोबिंद सिंह ने "जन भावनाओं और देश भर में क्षत्रिय समाज के विरोध को देखते हुए फ़िल्म पर लगाए गए प्रतिबंध के लिए" शिवराज सिंह सरकार को धन्यवाद दिया.

हालाँकि उनका कहना था कि जब फ़िल्म निर्माता ने स्पष्ट कर दिया है कि उसकी कहानी काल्पनिक है तो यह विरोध समाप्त हो जाना चाहिए था.

वाणिज्य कर मंत्री का तर्क है कि जोधा-अकबर उसी दिक्कत का सामना कर रही है जो ऐतिहासिक घटनाओं को आधार बना कर बनाई गई फिल्मों, नाटकों और पुस्तकों को कई बार भुगतना होता है जिसमें अगर आप किरदार, घटना और परिवेश से थोडी बहुत छेड़छाड़ करें तो उसपर हंगामा खड़ा हो उठता है.

असल कारण?

बाबूलाल गौड़ का कहना था, "अब अगर आप भगवान राम पर कोई फ़िल्म बनाएँ और उन्हें उनकी जानी पहचानी वेशभूषा कि जगह पैंट-बुशशर्ट में दिखाएँ तो उसपर हंगामा होना लाज़मी है."

 एतिहासिक तथ्यों को आधार बनाकर राजपूत समाज द्वारा उठाए गए विरोध का कोई और कारण तो नहीं? क्योंकि हिंदू-मुस्लिम प्रेम पर आधारित बनी फिल्में: वीर-जारा, ग़दर, बॉम्बे और हिना जैसी फ़िल्मों में लड़की हमेशा मुसलमान दिखाई गई.
इतिहासकार मुकुल केशवन

मशहूर इतिहासकार मुकुल केशवन ने एक पत्रिका को दिए गए अपने बयान में सवाल उठाया है, "एतिहासिक तथ्यों को आधार बनाकर राजपूत समाज द्वारा उठाए गए विरोध का कोई और कारण तो नहीं? क्योंकि हिंदू-मुस्लिम प्रेम पर आधारित बनी फिल्में: वीर-जारा, ग़दर, बॉम्बे और हिना जैसी फ़िल्मों में लड़की हमेशा मुसलमान दिखाई गई."

साठ के दशक की मशहूर फ़िल्म मुग़लेआज़म में जोधाबाई को अकबर की पत्नी दिखाया गया था और गुलज़ार की फ़िल्म 'लेकिन' में ऐसे ही एक जोड़े में पत्नी हिंदू है लेकिन यह सभी किरदार मुख्य भूमिका में नहीं थे.

चार राज्यों में फैले सेन्ट्रल सर्किट सिने एसोसिएशन के महासचिव जीतेंद्र जैन ने "एक समुदाय का वोट बटोरने के लिए किए गए इस फैसले" का विरोध किया है और कहा है डेढ़ करोड़ रुपए की लागत से मध्य प्रदेश क्षेत्र में वितरित जोधा-अकबर पर प्रतिबंध लगने से उद्योग को भारी नुक़सान होगा.

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