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सेक्सी इमेज बदलना चाहती हैं बिपाशा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अभिनेत्री बिपाशा बसु अब अपनी सेक्सी इमेज बदलना चाहती हैं इसलिए अपनी पहली बांग्ला फ़िल्म ‘सब चरित्र काल्पनिक’ में उन्होंने पारंपरिक साड़ी को अपना लिया है. वे कहती हैं, “पता नहीं लोग ऐसा क्यों सोचते हैं कि यथार्थवादी किरदार निभाना मुश्किल है, ऋतुपर्णो की फ़िल्म में मैं सूती साड़ी, लंबे ब्लाउज में नजर आऊंगी.” वे बताती हैं, “प्रसेनजीत जैसे टॉलीवुड के शीर्ष अभिनेता के साथ काम करना बेहतरीन अनुभव रहा. वे बंगाल के श्रेष्ठ अभिनेताओं में से एक हैं. वे वह हर सीन को बेहतरीन बनाने की कोशिश करते हैं.” फ़िल्म के पहले दौर की शूटिंग पूरी हो चुकी है. बिपाशा एक ही शेड्यूल में फ़िल्म पूरी करना चाहती हैं इसलिए अब 28 जनवरी से दोबारा इसकी शूटिंग शुरू होगी. बेहद उत्साहित हमेशा ग्लैमरस परिधानों में दिखने वाली बिपाशा इस फ़िल्म में पारंपरिक बंगाली साड़ियों में दिखेंगी और इसीलिए वे इस फ़िल्म को लेकर काफ़ी उत्साहित हैं. वे बताती हैं, “ कॉटन साड़ियां, लंबे ब्लाउज और बड़ी-बड़ी बिंदी में मुझे देखना दर्शकों के लिए अलग अनुभव होगा. मैं अपने इस पहनावे पर दर्शकों की प्रतिक्रिया देखने का इंतज़ार कर रही हूँ.” इस फ़िल्म की शूटिंग के बहाने बिपाशा को अपने गृह नगर कोलकाता में परिजनों के साथ समय बिताने का भी भरपूर मौका मिला. उनकी पिछली फिल्म ‘गोल’ बॉक्स ऑफ़िस पर ख़ास क़माल नहीं कर पाई थी, लेकिन उसमें बिपाशा दर्शकों का दिल जीतने में ज़रूर कामयाब रहीं. बिपाशा ने ऋतुपर्णो की इस फ़िल्म में एक ऐसी बंगाली आप्रवासी भारतीय महिला की भूमिका निभाई है जो कोलकाता में अपनी जड़ों के पास लौटना चाहती हैं. इस भूमिका में उन्होंने अपनी भावनाओं से जूझती एक महिला की भूमिका को बख़ूबी निभाया है. बिपाशा की प्रतिभा यूनिट के सदस्य बताते हैं कि भूमिका के मुताबिक बिपाशा को हर सीन में अलग-अलग साड़ी पहननी है और वे इतनी जल्दी साड़ी बदलती हैं कि सभी अचरज में पड़ जाते हैं.
घोष बताते हैं, “बिपाशा के बांग्ला बोलने का लहजा इस भूमिका के लिए एकदम उपयुक्त है.” वे बताते हैं, “कोलकाता में बिपाशा की पहली सौंदर्य प्रतियोगिता में मैं जज था. वह प्रतियोगिता अपर्णा सेन की पत्रिका की ओर से आयोजित की गई थी.” रसगुल्ले खाना और कोलकाता में अपने पुराने दोस्तों के साथ गपशप करना (बांग्ला में कहें तो अड्डा मारना) बिपाशा का पसंदीदा शगल है. यही वजह है कि बांग्ला फ़िल्म का प्रस्ताव मिलते ही उन्होंने फ़ौरन हामी भर दी. वे बताती हैं, “फ़िल्म के सेट पर रोज़ाना दो तरह की मछलियां परोसी जाती थीं. इसके अलावा मीठा दही और मिठाई तो है ही. मैं जमकर खाती हूं और रोजाना जिम भी जाती हूँ.” इस फ़िल्म की शूटिंग से उनकी ऋतु दा के साथ काम करने की वर्षों पुरानी हसरत भी पूरी हो गई है. ऋतुपर्णो पहले उनके साथ हिंदी फ़िल्म ‘द्रौपदी’ की योजना बना रहे थे और बिपाशा ने इसके लिए हामी भी भर दी थी. वह फिल्म तो अभी ठंडे बस्ते में है, लेकिन ऋतुपर्णो ने बाद में उनको अपनी नई फ़िल्म ‘सब चरित्र काल्पनिक’ का प्रस्ताव दे दिया. बिपाशा मानती हैं, “ऋतुपर्णो घोष जिस तरह की फ़िल्में बनाते हैं, वैसी फिल्में हिंदी में नहीं बनतीं.” बांग्ला से लगाव बिपाशा को इस फ़िल्म में अपनी मातृभाषा बोलने का मौका मिला इसलिए वे बहुत ख़ुश हैं. सेट पर भी किसी बांग्लाभाषी से वे बांग्ला में ही बात करना पसंद करती हैं. ऋतुपर्णो कहते हैं, “मैं नंदीग्राम मुद्दे पर व्यस्त था. दूसरे किसी काम के लिए समय नहीं निकाल पा रहा था. इस फ़िल्म पर काम करना तभी संभव हुआ जब इसकी पटकथा समय पर तैयार हो गई और बिपाशा ने सहमति दे दी.” उनके काम और लगन से प्रभावित ऋतुपर्णो कहते हैं, “बिपाशा इस फ़िल्म की शूटिंग के लिए अपनी सालाना छुट्टियां भी भूल गईं.” वो कहते हैं, “मैं ऐसी फ़िल्म बनाना चाहता हूँ जिस पर उन्हें गर्व हो. मुझे पूरा विश्वास है कि मैं उनकी प्रतिभा का भरपूर इस्तेमाल कर पाऊंगा.” बिपाशा बताती हैं, “फ़िल्म के सेट पर हर आदमी परिवार के सदस्य की तरह था.” उन्होंने अपने किरदार के लिए पूरी तैयारी भी की थी. फ़िल्म में अपने किरदार के मुताबिक़ पूरी तरह ढलने की ठान चुकी बिपाशा ने अपने कपड़ों के अलावा पटकथा और संवाद अदायगी पर भी काफ़ी मेहनत की है. |
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