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शुक्रवार, 11 जनवरी, 2008 को 14:01 GMT तक के समाचार
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लखपति होना अब बड़ी बात नहीं रही

नैनो
कई लोगों को लखपति बना देगी नैनो कार
मेरे बचपन में लखपति होना बड़ी बात समझी जाती थी. अकसर मैंने अपने घर के लोगों को किसी का ज़िक्र यह कहते हुए सुना कि वे तो बड़े लोग हैं, लखपति हैं.

भारत में अब लखपतियों की संख्या कम नहीं है. कोई भी व्यक्ति जिसका अपना मकान या दुकान या कार है, लखपति है.

और अब लाख टके की नैनो के आने के बाद तो लखपतियों की तादाद और भी बढ़ जाएगी.

लोग उधार लेंगे, हो सकता है कुछ गिरवी रखें, लेकिन घरवालों की मांग होगी, अब हमारे पास भी कार होनी चाहिए.

कार के अपने फ़ायदे भी हैं. लू, बारिश, आँधी के थपेड़ों में पूरे परिवार को बाहर निकलना हो तो स्कूटर या मोटरसाइकिल से तो बहुत बेहतर है कार.

लेकिन हाँ तब जब उसके लिए पैसा आसानी से मुहैया हो.

संशय भरी प्रतिक्रिया

मेरे एक परिचित की नैनो पर प्रतिक्रिया थी-अब लोग दहेज में स्कूटर नहीं नैनो कार की मांग करेंगे.

लेकिन इस तरह के संशय को देखते हुए क्या एक अच्छे और सकारात्मक क़दम का स्वागत भी न किया जाए.

शादी
स्कूटर की जगह नैनो की मांग बढ़ेगी

यहाँ विदेशों में एक घर में दो-तीन कारें होना आम बात है. यह विलासिता नहीं है बल्कि मजबूरी है.

घर के सभी लोग काम कर रहे हैं और घर रेलवे स्टेशन से दूर है तो क्या करें.

हालाँकि यहाँ की सड़कों पर भी इतनी भीड़भाड़ है कि कम ही लोग कार ले कर शहर जाते हैं.

वे सुबह घर से कार में निकलते हैं. उसे क़रीब के ट्रेन स्टेशन पर पार्क करते हैं और ट्रेन से काम करने की जगह जाते हैं.

शाम को लौट कर वहीं से कार में बैठते हैं और घर आ जाते हैं.

पार्किंग की फ़ीस वैसे यहाँ लंदन में और दिल्ली में भी आसमान छू रही है.

तो यह मान कर चलिए कि कार के लिए एक लाख रुपया जुटाने से ही इति नहीं हो जाती.

पार्किंग सस्ती बनानी होगी. लोग कार ले कर बाहर निकलें और पार्किंग में ही पचास रुपये ख़र्च करदें तो उससे तो बस या टैक्सी ही भली.

और फिर पेट्रोल की क़ीमत...मध्यवर्ग के लोगों की तो पहुँच से बाहर है जल्दी टंकी भरवाना.

तो एक लाख रुपये क़ीमत की कार की घोषणा से ख़ुश होने वालों को यह मान कर चलना होगा कि यह कार अपने साथ और ख़र्चे भी ले कर आएगी.

दस-पंद्रह हज़ार रुपये महीने के वेतन से चलने वाले एक आम परिवार को बहुत सोच-समझ कर फ़ैसला करना होगा.

लेकिन इसके साथ यह भी अपनी जगह सही है कि चादर देख कर पाँव पसारा जाए तो कुछ भी महंगा नहीं है.

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