BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
मंगलवार, 11 दिसंबर, 2007 को 13:15 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
रामबाबू सक्सेना और चकबस्त

कविता
दोहा-क़तर में एक साहित्यिक संस्था है, नाम है फरोग़ अदब एवॉर्ड. हर साल इस संस्था की तरफ से दो साहित्यकारों का सम्मान किया जाता है.

इनमें एक भारत से और दूसरा पाकिस्तान से होता है.

यह संस्था 1996 में कायम हुई थी. तब से अब तक हिंद-पाक के 20 साहित्यकार सम्मानित किए जा चुके हैं.

इनामों को दिए जाने के बाद एक आलमी स्तर का मुशायरा भी होता है. इस बार एवॉर्ड कमेटी ने असद मुहम्मद खाँ के नाम का चयन किया था.

असद मुहम्मद खाँ कहानीकार भी हैं और शायर भी. उनकी कथा-यात्रा जो मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से शुरू हुई, कराची में कई पुस्तकों की दूरियों से गुज़र चुकी है. इन पुस्तकों में 'खिड़की भर आसमान' से 'तीसरे पहर की कहानियों' तक, वह आम आदमी अलग-अलग चेहरों में चलता फिरता दिखाई देता है. जो आज़ादी से पहले प्रेमचंद्र की कहानी ‘कफ़न’ में नज़र आया था. आज़ादी के बाद वह भोपाल आया. भोपाल से फिर सरहद पार करके कराची चला गया.

लेकिन इतना लंबा सफ़र करने के बाद भी वह जैसा पहले था वैसा ही अब भी है. उनकी कलम समाज के उस निचले वर्ग की तस्वीरें उतारती है-जो एक मुल्क के तीन हिस्सों में बँट कर भी जीवन को जीवन की तरह जीने के लिए हाथ-पाँव मारता है.

इस्मत चुगताई की कथाओं ‘नन्हीं की नानी’, ‘चौथी का जोड़ा’ या ‘दोज़खी’ में, जीवन का जो दुख-दर्द कहानी का रूप लेता है, वही दूसरे स्तर पर असद मुहम्मद खाँ के लेखन को धार देता है. प्रेमचंद्र की जन्म शताब्दी पर, उनके उपन्यास 'गोदान' में होरी के पात्र पर मैने एक दोहा लिखा था,

मुंशी धनपत राय तो, टंगे हैं बन कर गद्य
सुनने वाला कौन है, होरी की फ़रियाद

दोहा क़तर के मुशायरे में असद मुहम्मद खाँ ने शायर की हैसियत से भी शिरकत की थी. उस मुशायरे में उनकी सुनाई गई कई नज्मों में एक छोटी सी नज्म यूँ थी,

रात को सोने से पहले
अपने सारे गीत लिख लो
अपनी सब नज्मों का इमला ठीक कर लो
सुबह को शायद कफ़न लेकर
मुअर्रिख़ (इतिहासकार) आएगा
रामबाबू सक्सेना आएगा.

पाकिस्तान के शायर की नज़्म की अंतिम पंक्ति में रामबाबू सक्सेना का नाम सुनकर मैं चौंका. इस चौंकने की वजह भी थी. पिछले दिनों फ़ेडरल सर सैयद कॉलेज, रावलपिंडी से पाकिस्तानी अदब के नाम से जो किताबें प्रकाशित हुई थीं उनमें शायरी की शुरूआत डॉक्टर इक़बाल की नज़्म तुलू-ए-इस्लाम (इस्लाम का उदय) से की गई थी. इसमें फैज़ तो थे, लेकिन उनके वे समकालीन जो भारत में रह गए थे जैसे सरदार जाफ़री, जाँ निसार, मजाज़ आदि के नाम और उनकी रचनाएँ नहीं थीं.

लेकिन मेरी उत्सुकता उस वक्त शांत हुई जब मुझे याद आया कि असद मुहम्मद खाँ वर्ष 1950 में भोपाल से पाकिस्तान गए थे और जिस उम्र में वह पाकिस्तानी बने थे, उस वक़्त उनकी विरासत में मीर-ओ-ग़ालिब के साथ दयाशंकर नसीम और रामबाबू सक्सेना भी शिरकत कर चुके थे. रामबाबू सक्सेना बरेली निवासी थे, उनकी किताब ‘तारीख़-ए-अदब उर्दू’, जो उन्होंने अंग्रेज़ी में लिखी थी और जिसका उर्दू अनुवाद 1926 में सामने आया, को उर्दू साहित्य के इतिहास की पहली मेयारी किताब समझा जाता है.

यह किताब जो भाषा की शुरूआत से हाली के युग तक साहित्य की हर विधा को तारीख़वार बयान करती है. रामबाबू सक्सेना की यह किताब एक ऐसा अदबी वाकया है जो शायद कभी भुलाया न जा सके.

चकबस्त की शायरी

इस ऐतिहासिक किताब के ज़रिए ही, स्कूल के दिनों में बृजनारायण चकबस्त से मेरा पहला परिचय हुआ था.

बृजनारायण चकबस्त 1882 में फैज़ाबाद में पैदा हुए. बचपन में ही फैज़ाबाद से लखनऊ आ गए. जहाँ उन्होंने 1905 में कैनिंग कॉलेज से बीए किया और वहीं से 1908 में क़ानून की डिग्री हासिल की.

मैंने चकबस्त के बारे में पढ़ा था महफिलों में उनके शेर सुने थे, ख़ासकर वे शेर जो पिछले सवा सौ साल से मुहाविरों की सूरत हर जगह बोलचाल का हिस्सा बन चुके हैं.

उन्होंने नौ बरस की उम्र में पहली ग़ज़ल कही थी. चक्बस्त की शायरी, हाली और इक़बाल के बाद वजूद में आई, लेकिन इसमें जो इंसान नज़र आता है, जो सबको एक बनाता है. उन्होंने अपनी शायरी के सेक्यूलर अंदाज़ के बारे में ख़ुद एक जगह लिखा है,

नया मसलक नया रंग-ए-सुख़न ईजाद करते हैं
उरुसे शेर (शेर की दुल्हन) को हम क़ैद से आज़ाद करते हैं

चकबस्त ने बहुत कम लिखा है. कुदरत ने उन्हें ज़िंदगी भी कम ही दी थी. लेकिन इस छोटी ज़िंदगी में उन्होंने जितना लिखा, वह ऐसा लिखा, जो उर्दू साहित्य के इतिहास में उनके नाम को ज़िंदा रखने के लिए काफ़ी है.

भारत में प्रगतिशील आंदोलन 1935-36 से शुरू होता है. बृज नारायण चकबस्त का कारनामा यह है कि सज्जाद ज़हीर और मुल्काराज आनंद के साथ साहित्य में जिस इंसान का परिचय मिलता है, उसके लिए चकबस्त 10 वर्ष पहले रास्ता हमवार कर चुके थे.

ज़िंदगी क्या है अनासिर में ज़हूरे तरतीब
मौत क्या है इन्हीं अज्ज़ा का परेशाँ होना

कमाले बुज़दिली है पस्त होना अपनी आँखो में
अगर थोड़ी सी हिम्मत हो तो फिर क्या हो नहीं सकता

उभरने ही नहीं देती हमें बेमायगी दिल की
नहीं तो कौन कतरा है, जो दरिया हो नहीं सकता

दिल में इस तरह से अरमान हैं आज़ादी के
जैसे गंगा में झलकती है चमक तारों की

बृजनारायण चकबस्त का लखनऊ, बड़े-बड़े उस्ताद-ओ-अजीज़, सूफी, साक़िब आदि का लखनऊ था. लेकिन अंग्रेज़ी तालीम ने उन्हें उस समय की शायरी के आम अंदाज़, मौत के मातम, ज़िंदगी के ग़म, बनते-बिगड़ते आलम जैसे विषयों से हमेशा दूर रखा.

वह मौत के नहीं हौसलों के शायर थे. इस लिहाज़ से वह यगाना चंगेजी के ज़्यादा क़रीब थे.

कई साल पहले की बात है, मैं लखनऊ के रेडियो स्टेशन में था, जहाँ मैं बैठा था मेरे सामने एक बहुत खूबसूरत चेहरे की लड़की बैठी थी. यह लड़की भी चकबस्त सरनेम की थी. बृजनारायण की तीसरी पीढ़ी से थी.

उसके सरनेम से मेरे ज़हन में चकबस्त की कई कौमी नज़्में जागने लगीं. फिर यूँ हुआ वह लड़की अचानक खड़ी हुई और मैने देखा उसके दोनों पाँव बेकार थे.

उसके चेहरे के हुस्न और पैरों की अपाहिजी ने मुझे रामबाबू सक्सेना के लफ़्ज याद दिला दिए.

बृजनारायण चकबस्त ने बड़े हसरतनाक़ तरीके से इंतकाल किया. ऐन जवानी में 1926 को रायबरेली रेलवे स्टेशन पर उन पर फालिज का हमला हुआ और उसी दिन वो गुज़र गए.

चित्रांकन-रत्नाकरअंदाज़-ए-बयाँ और...
ग़ज़नवी तलवार के सिपाही थे तो नियाज़ी कायनात में क़ुदरत की रहमत के गवाह.
निदा फ़ाज़लीअंदाज़-ए-बयाँ और...
निदा फ़ाज़ली बात कर रहे हैं गुजराती शायर चीनू मोदी के इरशादनामे की.
दीवालीअंदाज़े बयाँ और...
निदा फ़ाज़ली बात कर रहे हैं उस उम्र की जब हर त्योहार अच्छा लगता है.
अली सरदार जाफ़रीअंदाज़-ए-बयाँ और...
कैफ़ी और जाफ़री के बहाने निदा याद कर रहे हैं बदलते वक़्त और तहज़ीब को...
निदा फ़ाज़लीअंदाज़-ए-बयाँ और...
पुरुष प्रधान समाज में स्त्री की व्यथा बयान कर रहे हैं निदा फ़ाज़ली.
दुष्यंत कुमारअंदाज़े बयाँ और...
दुष्यंत कुमार के 75वें जन्मवर्ष पर उन्हें याद कर रहे हैं निदा फ़ाज़ली
अंदाज़-ए-बयाँ और...
एक शहर हम सबकी यादों में होता है...निदा फ़ाज़ली की यादों में भी एक शहर है.
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>