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शनिवार, 01 दिसंबर, 2007 को 11:08 GMT तक के समाचार
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'शर्तें पूरी करें तो आजा नच ले दिखा सकते हैं'
माधुरी दीक्षित
फ़िल्म के गाने की एक पंक्ति पर आपत्ति जताई गई
उत्तर प्रदेश सरकार ने आदेश दिया है कि सिनेमाघर यशराज फ़िल्म्स की नई रिलीज़ 'आजा नच ले' कुछ शर्तें पूरी करने के बाद दिखा सकते हैं.

सरकार का कहना है कि जिस जातिसूचक शब्द के इस्तेमाल के कारण रोक लगाई गई थी, यदि वह हटा लिया जाता है तो फ़िल्म दिखाई जा सकती है.

शुक्रवार को ही रिलीज़ हुई इस फ़िल्म पर उत्तर प्रदेश की मायावती सरकार ने तत्काल प्रभाव से रोक लगाते हुए शुक्रवार को देर रात के शो भी रोक दिए थे.

इस फ़िल्म के साथ माधुरी दीक्षित कई साल बाद हिंदी फ़िल्मों में अपनी वापसी कर रही हैं.

उत्तर प्रदेश और फिर पंजाब में ये फ़िल्म दिखाए जाने पर रोक लगने के बाद फ़िल्म निर्माता यशराज फ़िल्म्स ने माफ़ी माँगी थी और घोषणा की थी कि आपत्तिजनक लाइन को पूरे देश में दिखाई जा रही फ़िल्म के प्रिंट से हटाया जा रहा है.

राज्य की मुख्यमंत्री के मुख्य सचिव शैलेषकृष्ण ने बीबीसी संवाददाता रामदत्त त्रिपाठी को बताया, "यदि सिनेमा घर फ़िल्म के गाने से विवादास्पद लाइन हटा देते हैं तो वे इसे दिखा सकते हैं."

 यदि सिनेमा घर फ़िल्म के गाने से विवादास्पद लाइन हटा देते हैं तो वे इसे दिखा सकते हैं
मुख्यमंत्री के मुख्य सचिव

उनका कहना था, "सिनेमा घरों के प्रबंधन को संशोधित फ़िल्म प्रिंट को स्थानीय फ़िल्म इंस्पेक्टर को दिखाना होगा और उनसे सर्टीफ़िकेट लेना होगा. फिर ज़िला मजिस्ट्रेट फ़िल्म दिखाने की अनुमति दे देंगे क्योंकि रोक के आदेश सीआरपीसी के दफ़ा 144 के अंतरगत उन्हीं के कार्यालय ने दिए हैं."

माफ़ी माँगी

यशराज फ़िल्म ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में कहा - "हम उन सभी लोगों से माफ़ी माँगते हैं जिनकी भावनाएँ 'आजा नच ले' में एक गाने में एक पंक्ति से आहत हुई हैं. ऐसा करने की हमारी कोई मंशा नहीं थी."

फ़िल्म निर्माता ने ये भी कहा, "हमने इस ग़लती को तत्काल सुधारने के क़दम उठाए हैं और वितरकों को शुक्रवार रात ही आदेश दिया गया कि आपत्तिजनक शब्दों को प्रिंट से हटा दिया जाए."

 हम उन सभी लोगों से माफ़ी माँगते हैं जिनकी भावनाएँ 'आजा नच ले' में एक गाने में एक पंक्ति से आहत हुई हैं. हमारी ऐसा करने की मंशा नहीं थी
फ़िल्म निर्माता यश चोपड़ा

यश चोपड़ा का कहना था, "हमारी ऐसी मंशा नहीं थी कि हम अपने महान देश के किसी व्यक्ति या समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुँचाएँ. यदि हमसे ऐसा हुआ है तो मैं इसके लिए माफ़ी माँगता हूँ. तत्काल ये ग़लती सुधारी जा रही है."

सेंसर बोर्ड की अध्यक्ष शर्मिला टैगोर ने कहा, "हमने उस शब्द पर ध्यान नहीं दिया. समिति ने 'मोची' शब्द को एक व्यवसाय की तरह लिया जबकि जिन्होंने इस पर आपत्ति जताई उन्होंने इसे जातिसूचक शब्द की तरह लिया. यहाँ कुछ ग़लती हुई और हम इसके लिए माफ़ी माँगते हैं."

उनका कहना था, "यदि लोगों ने इसे अपना अपमान माना है तो उन्हें बताना चाहते हैं कि ये जानबूझकर नहीं हुआ."

जातिसूचक शब्द

 समिति ने 'मोची' शब्द को एक व्यवसाय की तरह लिया जबकि जिन्होंने इस पर आपत्ति जताई उन्होंने इसे जातिसूचक शब्द की तरह लिया. यहाँ कुछ ग़लती हुई और हम इसके लिए माफ़ी माँगते हैं
सेंसर बोर्ड अध्यक्ष

उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिखकर इस फ़िल्म पर पूरे देश में रोक लगाने की माँग की थी.

दूसरी तरफ़ फ़िल्म के निर्देशक अनिल मेहता ने कहा है कि उनका इरादा किसी की भावनाओं को आहत करने का नहीं था और यदि किसी सरकार ने फ़िल्म पर प्रतिबंध लगाने जैसा बड़ा फ़ैसला किया है तो वे गाने की वो पंक्तियाँ हटा लेंगे.

आपत्ति करने वालों का कहना था कि 'मोची' शब्द का इस्तेमाल किया गया है जो दलितों के लिए अपमानजनक है.

उत्तर प्रदेश के प्रमुख सूचना सचिव शैलेषकृष्ण ने कहा था कि फ़िल्म में जातिसूचक शब्द 'मोची' का इस्तेमाल किया गया है, जो कि असंवैधानिक है इसीलिए फ़िल्म पर रोक लगा दी गई.

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