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शनिवार, 27 अक्तूबर, 2007 को 11:57 GMT तक के समाचार
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वाइल्डलाइफ़ फ़ोटो पुरस्कार ब्रितानी को
ये फ़ोटो सर्वश्रेष्ठ चुनी गई
78 देशों 32 हज़ार से भी ज़्यादा प्रविष्टियों आईं
बोत्सवाना के दूसरे बड़े नेशनल पार्क चोबे में मिट्टी में पैर मारते और मिट्टी उछालते हुए एक हाथी का फ़ोटो खींचने वाले फ़ोटोग्राफ़र ने इस साल का शेल वाइल्डलाइफ़ पुरस्कार जीत लिया है.

यह दुनिया की प्रतिष्ठित प्रतियोगिताओं में से एक है जिसे बीबीसी वाइल्डलाइफ़ पत्रिका और लंदन का नेचुरल हिस्ट्री म्यूज़ियम आयोजित करते हैं. तेल कंपनी शेल इसकी प्रायोजक है.

इस प्रतियोगिता के लिए 78 देशों 32 हज़ार से भी ज़्यादा प्रविष्टियों आईं और निर्णय करने में तीन महीने का समय लगा.

बेन ओसबॉर्न ने इस तस्वीर को चोबे नेशनल पार्क में तीन सप्ताह लंबे प्रवास के दौरान कैमरे में क़ैद किया.

ओसबॉर्न का कहना था, "मुझे इस तस्वीर में निहित ऊर्जा बहुत पसंद है. यह जीवविज्ञान से ज़्यादा भौतिकी से संबंधित है."

46 वर्ष का इतिहास

इस आयोजन के 46 वर्ष के इतिहास में प्रविष्टियों की रिकार्ड संख्या पर टिप्पणी करते हुए प्रतियोगिता मैनेजर डैबी सेज ने कहा, "इस वर्ष के विजेताओं ने प्रकृति के ऐसे दुर्लभ लम्हों को क़ैद करने में ख़ासी मेहनत की है."

उनका कहना था कि ये तस्वीरें बेहतरीन हैं और हमें सौंदर्य, ड्रामा और प्रकृति के विविधता दर्शाती हैं.

ओसबॉर्न इंग्लैंड में रहते हैं और एक 'फ़्रीलांस' फ़ोटोग्राफ़र हैं. उन्होंने अपने 25 साल के कैरियर में सभी सातों महाद्वीपों पर काम किया है.

वन्य जीवन, प्रकृति चित्रण, और पर्यावरण पर उनका विशेष काम है. उनका काम बीबीसी के 'प्लेनेट अर्थ' समेत कई प्रमुख टीवी श्रृंखलाओं में दिखाया गया है.

 इस वर्ष के विजेताओं ने प्रकृति के ऐसे दुर्लभ लम्हों को कैद करने में खासी मेहनत की है. यह तस्वीरें दुनिया में बेहतरीन हैं और हमें सौंदर्य, ड्रामा और प्रकृति की विविधता को दर्शाती हैं.
प्रतियोगिता मैनेजर डैबी सेज

अपने तीन सप्ताह के प्रवास के दौरान ओसबॉर्न ने अपनी गाड़ी को ही अपने छिपने का स्थान बनाया.

जब उस बड़े से हाथी का वह 'विजयी लम्हा' आया तो उन्होंने सुबह की मंद रोशनी में धीमी गति वाले शटर का प्रयोग किया.

अपनी तस्वीर को भौतिकी से संबंधित बताने के बारे में उनका कहना था, "मंद रोशनी, टेक्सचर, बल, गति और तीव्रता आदि के मिश्रण को एक समय में ड्रामाई अंदाज़ में एकसाथ कैद किया गया है."

हाथी अब प्रकृति के संरक्षकों के लिए भी महत्वपूर्ण प्रजाति हो गई है. 1980 के दशक में हाथी दांत के व्यापार के कारण इनकी संख्या आधी रह गई थी. फिर 1989 में दुनिया भर में इस पर प्रतिबंध के बाद दक्षिण अफ़्रीका में इनकी संख्या में इज़ाफा हुआ.

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