BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
गुरुवार, 19 जुलाई, 2007 को 10:10 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
'भेजा फ़्राई की सफलता से दबाव बढ़ा है'

भेजाफ़्राई- फ़िल्म
कम बजट की फ़िल्म 'भेजा फ़्राई' ने बढ़िया कारोबार किया
सागर बेलारी अपनी पहली ही फ़िल्म 'भेजा फ़्राई' की अपार सफलता के बाद चर्चा में हैं.

कम बजट वाली और बिना किसी बड़े स्टार की मौजूदगी के इस फ़िल्म ने सिनेमा जगत में तहलका मचा दिया.

इस सफलता के बाद उनके पास ढेरों प्रस्ताव आए हैं लेकिन ज़्यादातर का मकसद पैसा बनाना था न कि अच्छी फ़िल्में.

सागर ने बीबीसी को बताया, "लोग मेरी तरफ इसलिए भी आकर्षित हुए क्योंकि मेरी 60 लाख की फ़िल्म ने इतना बढ़िया कारोबार किया. इस सबसे लगता है कि मैं जुआरी बन गया हूँ."

वो कहते हैं, " लोगों को 'भेजा फ़्राई' पसंद आई. लेकिन यह फ़िल्म मैंने कैसे बनाई मैं ही जानता हूँ. मैं कलाकारों और तकनीशियनों को पैसे नहीं दे पाया था."

 मुझ पर अच्छी फ़िल्म बनाने का बहुत अधिक दबाव है. मैं पटकथा पर ज़्यादा ध्यान दे रहा हूँ. मुझे मालूम है कि लोगों की मुझसे बहुत अपेक्षाएँ हैं और मैं उस पर खरा उतरने की कोशिश करूँगा
सागर बेलारी, फ़िल्म निर्देशक

उन्होंने बताया, " भेजा फ़्राई में मैंने अपना अभी तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन किया है और अब मैं इससे अच्छे अवसर की तलाश में हूँ."

सहारा वन मोशन पिक्चर्स ने सागर बल्लारी के साथ तीन फ़िल्मों का करार किया है.

सागर बताते हैं कि सहारा वन मोशन ने उन्हें काम करने की पूरी छूट दी है.

योजना

विनय पाठक
विनय पाठक ने पिछले कुछ सालों में हास्य अभिनेता के रूप में अपने को स्थापित किया है

सागर बेलारी की अगली फ़िल्म 'कच्चा लिंबू' भी हास्य प्रधान होगी.

बेलारी बताते हैं कि ये 13 साल के एक मोटे लड़के की कहानी है जो अपने घर, स्कूल, दोस्तों और अपने आप से परेशान होकर घर छोड़ देता है.

इस फ़िल्म के दौरान वो लड़का अपने को जानने की कोशिश करता है और कच्चा लिंबू से पक्का लिंबू बन जाता है.

सागर बताते हैं कि लंबे समय से किशोरों पर केंद्रित कोई अच्छी फ़िल्म नहीं आई है जो ठीक तरह से भारतीय बच्चों का प्रतिनिधित्व करती हो.

वो कहते हैं, "फ़ैंटेसी फ़िल्में तो आती रहती हैं पर यह भारतीय बच्चों की समस्याओं और वास्तविकताओं से परे है. इस वजह से मुझे लगा कि इस विषय पर फ़िल्म बनानी चाहिए."

सागर की सहारा मोशन के लिए अगली फ़िल्म पारिवारिक और मनोरंजक होगी जबकि तीसरी फ़िल्म एक प्रेम कथा होगी.

ये पूछे जाने पर कि पहली फ़िल्म की सफलता के बाद वो एक और अच्छी फ़िल्म देने का कितना दबाव महसूस करते हैं, वो कहते हैं, " बहुत अधिक दबाव है. मैं पटकथा पर ज़्यादा ध्यान दे रहा हूँ. मुझे मालूम है कि लोगों की मुझसे बहुत अपेक्षाएँ हैं और मैं उस पर खरा उतरने की कोशिश करूँगा."

राहुल बोसराहुल बोस कहते हैं
भारत में बिना ज़्यादा तकनीक के अच्छी बाल फ़िल्में बन सकती हैं.
फ़िल्म 'गांधी माई फ़ादर' का दृश्य'गांधी माई फ़ादर'
इस फ़िल्म की कहानी बापू और उनके बेटे के आपसी रिश्ते पर आधारित है.
इससे जुड़ी ख़बरें
संजय कपूर भी निर्माता बने
15 जुलाई, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस
'रूप की रानी' वापसी की तैयारी में
14 जुलाई, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस
गोविंदा-सलमान बने हैं 'पार्टनर'
15 जुलाई, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस
बाथरूम सिंगर जीत सकेंगे 25 लाख..
18 जुलाई, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस
अमिताभ बच्चन को डॉक्ट्रेट की उपाधि
20 जुलाई, 2006 | मनोरंजन एक्सप्रेस
ओथेलो या ओंकारा मानव भाव समान
31 जुलाई, 2006 | मनोरंजन एक्सप्रेस
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>