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'हम भी अच्छी बाल फ़िल्में बना सकते हैं' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अभी पिछले सप्ताह रिलीज़ हुई बच्चों की फ़िल्म 'चेन खुली की मेन खुली' में राहुल बोस ने भारतीय कप्तान की भूमिका निभाई है. बच्चों के लिए राहुल की यह पहली फ़िल्म है. इस फ़िल्म के बारे में बीबीसी से बातचीत करते राहुल बताते हैं कि कुछ अलग करने की ख़्वाहिश ने उन्हें बच्चों की फ़िल्म में काम करने के लिए प्रेरित किया. राहुल कहते हैं,"भारत में बच्चों की फ़िल्म के क्षेत्र में बहुत कम काम हुआ है. हम भी बिना मंहगे स्पेशल इफ़ेक्ट्स का इस्तेमाल किए अच्छी बाल फ़िल्में बना सकते हैं. इसके लिए अच्छी पटकथा, कहानी और अभिनय की ज़रूरत है." सशक्त अभिनेता राहुल बोस का नाम सार्थक फ़िल्मों के सशक्त अभिनेता के रूप में लिया जाता है - चाहे वो 'मिस्टर एंड मिसेज़ अय्यर' में जहाँगीर चौधरी का भावना प्रधान अभिनय हो या फिर 'प्यार के साइड इफ़ेक्ट्स' में रोमांटिक कॉमेडी. अपने काम में पूरी सतर्कता और ईमानदारी बरतने वाले राहुल बोस कहते हैं कि वो काम में अपनी तरफ से सौ प्रतिशत देकर ख़ुश होते हैं वरना उन्हें दुख होता है और अपने पर गुस्सा भी आता है. किसी भी फ़िल्मों को चुनने से पहले राहुल बोस पांच चीज़ों पर गौर करते हैं - अच्छी पटकथा, भूमिका,सह-कलाकार, निर्देशक और कहानी. जब वो आर्ट फ़िल्म करने के बाद थक जाते हैं तो कुछ अलग तरह के रोल जैसे 'तक्षक' मे खलनायक और 'झंकार बीट्स' में म्यूजिकल कॉमेडी कर लेते हैं. राहुल का कहना है कि वो एक्शन फ़िल्में भी कर सकते हैं बशर्ते किरदार बहुत अच्छे से लिखे गए हों. आने वाली फ़िल्में उनकी आने वाली फ़िल्में हैं - द विस्पेरस, जपैनीज़ वाइफ़ और शौर्य. अंग्रेजी भाषा में बनी फ़िल्म में 'द विस्पेरस' में उनके साथ मनोज बाजपेई भी हैं. इस फ़िल्म ने ह्यूस्टन फ़िल्म फ़ेस्टिवल में दो पुरस्कार भी जीते हैं और यह भारत में दिसंबर तक रिलीज़ होगी. अपर्णा सेन के निर्देशन में बन रही फ़िल्म 'जपैनीज़ वाइफ़' में अंग्रेजी और बांग्ला भाषा के संवाद हैं. यह फ़िल्म बंगाली पुरुष और जापानी महिला की कहानी है जहाँ दोनों पत्रों के जरिए शादी कर लेते हैं पर कभी मिलते नहीं हैं. 'शौर्य' में राहुल बोस बचाव पक्ष के वकील की भूमिका में नज़र आएंगे. रग्बी रग्बी के बेहतरीन खिलाड़ी राहुल बोस कभी भी भारतीय रगबी टीम की तरफ से खेलने का मौका नहीं चूकते. अभी पैर में मोच खाए बैठे राहुल को उम्मीद है कि वो जुलाई में मनीला में भारत और फिलीपींस के बीच होने वाले रग्बी मुक़ाबले में ज़रूर खेलेंगे. राहुल समाज सेवी संस्थाओं से भी जुड़े हुए हैं. उनकी संस्था द फ़ाउंडेशन सुनामी प्रभावित इलाक़ों में काम कर रही है. यह पूछे जाने पर कि इन सब के लिए समय कैसे मिल पाता है तो राहुल बताते हैं,"अगर कुछ करने की चाहत हो तो समय मिल ही जाता है." | इससे जुड़ी ख़बरें प्यार की अलग भाषा है....06 अप्रैल, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस राहुल फेलुदा के चरित्र को आवाज़ देंगे15 जनवरी, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस 'काम में सौ प्रतिशत प्रतिबद्धता ज़रूरी'25 अगस्त, 2006 | मनोरंजन एक्सप्रेस सेंसरशिप ज़रूरी नहीं: राहुल बोस10 सितंबर, 2004 | मनोरंजन एक्सप्रेस | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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