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प्यार की अलग भाषा है.... | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
36 चौरंगी लेन, मिस्टर एंड मिसेज़ अय्यर और 15 पार्क एवेन्यू जैसी कम बजट और लीक से अलग फ़िल्में बनाने वाली अपर्णा सेन इन दिनों एक बड़े बजट की फ़िल्म में व्यस्त हैं. यह पहला मौक़ा है जब वो कोई बड़ी बजट की फ़िल्म एक साथ तीन भाषाओं में बन रही है. 'द जैपेनीज़ वाइफ़' नाम की इस फ़िल्म में अपर्णा की दूसरी फ़िल्मों की तरह ही इस बार भी महिला पात्रों की प्रधानता होगी. दो महिला पात्रों- चिगासू ताकाकू और राइमा सेन के बीच एक ही पुरुष पात्र (राहुल बोस) है. इस फ़िल्म का संदेश है कि प्यार की कोई भाषा नहीं होती. जापानी युवती के प्रेम में पड़े राहुल को न तो ठीक से अंग्रेज़ी आती है और न ही जापानी. इसी तरह जापानी युवती की अंग्रेज़ी भी अच्छी नहीं है. अपर्णा सेन ने बताया कि यह पहला मौक़ा है जब वो किसी दूसरे की कहानी पर फ़िल्म बना रही हैं. फ़िल्म की शूटिंग इसी सप्ताह शुरू हो गई है और ज़ल्द ही पूरी यूनिट शूटिंग के लिए जापान जाएगी. इस फ़िल्म की शूटिंग कोलकाता के अलावा सुंदरबन और जापान में होगी. राहुल बोस, मौसमी चटर्जी और राइमा सेन के अलावा इसमें एक जापानी अभिनेत्री चिगासू ताकाकू की भी मुख्य भूमिका है. यह फ़िल्म लेखक कुणाल बोस के ज़ल्दी ही प्रकाशित होने वाले एक उपन्यास पर आधारित है. फ़िल्म की शूटिंग जून तक पूरी हो जाएगी. यह फ़िल्म सुंदरबन इलाक़े के एक स्कूल शिक्षक और एक शर्मीली जापानी युवती की प्रेम कहानी है जो पत्र-मित्र बन जाते हैं. तैयारी इस फ़िल्म के लिए राहुल बोस ने तो वीज़ा और टिकट होने के बावज़ूद विश्वकप देखने का अपना वेस्टइंडीज़ दौरा तक रद्द कर दिया.
राहुल कहते हैं कि,"अपर्णा सेन की फ़िल्म 'द जैपेनीज वाइफ़' के लिए जितनी उम्मीद थी उससे कहीं ज़्यादा तैयारी की ज़रूरत थी इसलिए मैंने अपना वेस्टइंडीज़ दौरा रद्द कर दिया." कोलकाता में एक सप्ताह तक कार्यशाला में हिस्सा लेने के बाद वे कहते हैं "यह मेरे फ़िल्मी जीवन की सबसे कठिन भूमिका है." अपर्णा सेन ख़ुद इस फ़िल्म के बारे में ज़्यादा बात नहीं करना चाहतीं. वे कहती हैं "यह बंगाल के सुंदरबन इलाक़े के एक स्कूल शिक्षक और एक जापानी युवती की प्रेम कहानी है. वे दोनों पत्र-मित्र बन जाते हैं. उनके बीच होने वाला पत्र-व्यवहार इसलिए काफ़ी दिलचस्प बन गया है क्योंकि दोनों अच्छी अंग्रेज़ी नहीं जानते." सेन की हाल की फ़िल्मों में काम करने वाली उनकी बेटी कोंकणा सेन दूसरी फिल्मों में व्यस्त होने की वजह से इस फ़िल्म में काम नहीं कर रही हैं. लेकिन कोंकणा ने ही मुनमुन सेन की पुत्री राइमा सेन को फ़िल्म में एक नौकरानी की भूमिका के लिए तैयार किया है. राइमा सेन पहले इस भूमिका के लिए राज़ी नहीं थीं. उनकी दलील थी कि उन्होंने पहले कभी नौकरानी की भूमिका नहीं निभाई है. लेकिन कोंकणा के कहने पर वे तैयार हुईं. नौकरानी का काम सीखने के लिए वे एक सप्ताह तक लगातार कोंकणा के घर जाकर उनकी नौकरानी का काम-काज देखती रहीं. बीच-बीच में राइमा ने नौकरानी की मदद भी की. एक सप्ताह के भीतर वे झाड़ू-पोंछा लगाना सीख गईं. राइमा कहती हैं,"बांग्ला मेरी मातृभाषा है इसलिए मैंने इस फ़िल्म में नौकरानी की भूमिका भी मंज़ूर कर ली. अब मुझे यह काफ़ी रास आ रही है." जून में शूटिंग पूरी हो जाने के बाद ज़ल्द ही इस फ़िल्म को रिलीज़ करने की भी योजना है. कुणाल बोस की जिस पुस्तक पर ये फ़िल्म आधारित है उसे ज़ल्दी ही 'हार्पर कॉलिंस' प्रकाशित करेगा. | इससे जुड़ी ख़बरें कैटरीना कैफ़ निकलीं तीर्थयात्रा पर!29 सितंबर, 2006 | पत्रिका 'बेटी के लिए बाबुल ने गाया ख़ास गीत'04 दिसंबर, 2006 | पत्रिका कराची में बॉलीवुड सितारों का जमावड़ा11 दिसंबर, 2006 | पत्रिका फ़िल्मों पर भी छाया विश्व कप का जुनून16 मार्च, 2007 | पत्रिका असली शाहरुख़ मिले नक़ली शाहरुख़ से03 अप्रैल, 2007 | पत्रिका पेरिस ने देखे दुर्गा पूजा के रंग06 अक्तूबर, 2003 को | पत्रिका 15 पार्क एवेन्यू:पता एक बीमार लड़की का05 जनवरी, 2006 | पत्रिका | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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