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सोमवार, 09 जुलाई, 2007 को 13:35 GMT तक के समाचार
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बंगाल का 'एंग्री यंग मैन' आज भी सुपरहिट

मिथुन आज भी नायक की ही भूमिका कर रहे हैं
अपनी जवानी के दिनों में बंगाल के 'एंग्री यंग मैन' की छवि रखने वाले मिथुन चक्रवर्ती अपनी उम्र के छठे दशक में भी यही छवि बरकरार रखना चाहते हैं.

वे कहते हैं कि किसी भी अभिनेता को अपनी औकात और बाज़ार भाव नहीं भूलना चाहिए.

नब्बे के दशक के शुरूआती वर्षों में ऊटी में पड़ाव डालने वाले मिथुन फिल्मी पर्दे से लगभग गायब हो गए थे. इस दौरान उन्होंने तेलुगू, उड़िया और हिंदी की छोटी-मोटी फ़िल्मों में काम जारी रखा लेकिन उनका मुख्य धंधा था अपने मोनार्क होटल का कामकाज देखना.

एक दशक बाद वर्ष 2005 में 'ऐलान' के ज़रिए मुख्यधारा की फिल्मों में वापसी करने वाले मिथुन एक बार फिर न सिर्फ़ सक्रिय हैं, बल्कि सफल भी हैं.

पश्चिम बंगाल में मिथुन का होना ही फिल्म के हिट होने की गारंटी है. इस उम्र में जबकि उनका बेटा मिमो भी हीरो बन चुका है, वे खुद भी हीरो की भूमिका ही निभा रहे हैं. उनकी फिल्में यहाँ लगातार सुपरहिट साबित हो रही हैं चाहे वह ‘हंगामा’ हो, ‘तुलकलाम’ या फिर ‘एमलएलए फाटाकेष्टो.’

फिलहाल मिथुन बांग्ला फिल्म उद्योग यानी टॉलीवुड के नंबर वन हीरो हैं. ‘एमएलए फाटाकेष्टो’ की भूमिका में भ्रष्टाचार को उजागर करने वाले विधायक की भूमिका में वे इतने हिट रहे कि अब इसकी अगली कड़ी के तौर पर ‘मिनिस्टर फाटाकेष्टो’ जल्दी ही सिनेमाघरों में आ रही है.

हिंदी फिल्मों में भी उनकी माँग बढ़ी है. ‘ऐलान’ के बाद मणिरत्नम की ‘गुरू’ ने उनको बॉलीवुड में एक नई पहचान दी है. मुख्यधारा की फिल्मों से दूर रहने के दौरान वे ज़ी बांग्ला के लिए टीवी पर ‘गोल्डेन वायस हंट’ में एंकर की भूमिका भी निभा चुके हैं.

पिता की भूमिका करने पर
 अगर मैं ऐसी कोई भूमिका करता हूँ तो बंगाल में मेरे फैन काफी नाराज हो जाएंगे. वे अब भी मुझे स्टार या सुपरस्टार मानते हैं. अगर मैं हिंदी फिल्मों में पिता की भूमिका करने लगूँ तो बंगाल के निर्माताओं को गश आ जाएगा
मिथुन चक्रवर्ती

बांग्ला फिल्म ‘हंगामा’ में एक हास्य अभिनेता की भूमिका निभाने वाले मिथुन ने हाल में आशा भोंसले के साथ गाने भी गाए हैं. इसके अलावा अपनी ताजा फिल्म ‘मिनिस्टर फाटाकेष्टो’ में भी वे एक गीत गा चुके हैं.

मृणाल सेन की फ़िल्म ‘मृगया’ से अपना करियर शुरू करने वाले मिथुन को इस फिल्म में अपने अभिनय के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था. बांग्ला फिल्मों में अपनी छवि को ध्यान में रखते हुए मिथुन ने अब तक किसी भी फिल्म में पिता की भूमिका नहीं की है.

वे कहते हैं कि "अगर मैं ऐसी कोई भूमिका करता हूँ तो बंगाल में मेरे फ़ैन काफी नाराज़ हो जाएँगे. वे अब भी मुझे स्टार या सुपरस्टार मानते हैं. अगर मैं हिंदी फिल्मों में पिता की भूमिका करने लगूँ तो बंगाल के निर्माताओं को गश आ जाएगा."

बाज़ार भाव

मिथुन कहते हैं, "मैं बांग्ला फिल्मों का एक बड़ा अभिनेता हूँ लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हिंदी फिल्मों में काम करने के लिए मैं पचास लाख रुपए की माँग करूं. इस बाज़ार में बने रहने के लिए ही मैंने उन तमाम फ़िल्मों में काम किया जिसे लोग 'बी' या 'सी' ग्रेड की फिल्में कहते हैं."

मिथुन चक्रवर्ती
मिथुन की कई फ़िल्में आने वाली हैं

मिथुन बताते हैं कि राष्ट्रीय पुरस्कार जीतने वाली उनकी तीनों फिल्में –‘मृगया,’ ‘ताहादेर कथा’ और ‘रामकृष्ण परमहंस’ के अलावा ‘डिस्को डांसर,’ ‘प्यार झुकता नहीं,’ ‘हम पांच’ और ‘मुजरिम’ जैसी फिल्मों ने उनको अभिनेता के तौर पर पहचान दी और आम लोगों के बीच लोकप्रिय बनाया.

उन्होंने अस्सी के दशक में ‘गुरू’ नाम की हिंदी फिल्म में काम किया था. इसके अलावा बांग्ला में भी गुरू नाम से एक फिल्म बनी थी. मणिरत्नम की 'गुरू' उनके कैरियर में इस नाम की तीसरी फिल्म है. उनकी ताजा फिल्म ‘महागुरू’ फिलहाल कोलकाता समेत राज्य के विभिन्न शहरों में हाउसफुल चल रही है.

आखिर बंगाल में मिथुन की इस लोकप्रियता की वजह क्या है?

मिथुन के एक प्रशंसक रातुल चटर्जी बताते हैं कि "मिथुन अब वही भूमिकाएँ कर रहे हैं जिसे आम लोग देखना चाहते हैं. अपनी हालिया फिल्मों तुलकलाम, एमएलए फाटाकेष्टो और उसके बाद आने वाली मिनिस्टर फाटाकेष्टो में भी उन्होंने किसानों के हक में लड़ने वाले और भ्रष्टाचार को उजागर करने वाले हीरो की भूमिका निभाई है. यही वजह है कि उनकी फिल्मों के रिलीज़ होते ही सिनेमा हॉलों में टिकटों के लिए मारामरी शुरू हो जाती है."

वे कहते हैं कि "मैंने कला और व्यावसायिक फ़िल्मों के बीच हमेशा एक संतुलन बनाए रखा है."

हिंदी फिल्मों में वे भले ही सुपर स्टार न हों, बंगाल में तो वे अमिताभ बच्चन ही साबित हो रहे हैं. यही वजह है कि लोग उन्हें 'बंगाल का अमिताभ' या कई बार 'ग़रीबों का अमिताभ' भी कहते हैं.

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