|
विवेकानंद, नज़रुल इस्लाम और देवदास | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मानो गले में पिघली हुई आग उतर गई हो और आँखों में कांटों समेत गुलाब उग आए हों. यह मेरा आँसू गैस का पहला अनुभव था. वह भी ग्रीस की राजधानी एथेंस की पहली यात्रा की पहली शाम को. मेट्रो रेल के सिन्गथमा स्केवर स्टेशन से बाहर निकलते ही सामने ग्रीस का संसद भवन दिखाई देता है. लोकतंत्र का प्रतीक. किसी भी लोकतांत्रिक देश के संसद भवन की तरह. और फिर, ग्रीस को तो लोकतांत्रिक प्रणाली की जननी माना जाता है. इसी संसद भवन के बाहर दो गार्ड पारंपरिक पोशाकों में पर्यटकों के मोबाइल और मूवी कैमरे का लक्ष्य बने खड़े थे. डेमोक्रेटिया तभी एथेंस के नेशनल गार्डन्स की तरफ़ से एक जुलूस आता दिखाई दिया. हाथों में तख़्तियाँ थीं जिन पर नारे लिखे थे. पर वे मेरे लिए 'ग्रीक' थे. प्राचीन ग्रीक भाषा में 'डेमोक्रेटिया' शब्द का अर्थ था जनशक्ति. अभी यह सोच ही रही थी कि यह जनशक्ति प्रदर्शन क्यों हो रहा है कि अचानक जुलूस में भगदड़ मच गई और दीवाली के पटाख़े छूटने जैसी आवाज़ आई.
आम लोग भी भागे. अचानक अंग्रेज़ी का इकलौता शब्द कानों में पड़ा. 'टियरगैस'. तो यह था एथेंस और ग्रीस की आधुनिक जनशक्ति से मेरा पहला परिचय. प्रदर्शन का कारण समझने में लगभग पाँच दिन लग गए क्योंकि एथेंस में टूरिस्ट, होटल के मैनेजर, इक्के-दुक्के वेटर या टैक्सी वालों के अलावा आमतौर पर लोग अंग्रेज़ी नहीं बोलते. और हम हैं कि अंग्रेज़ी को ब्रम्हाण्ड की भाषा मान बैठे हैं. एक दूकानदार से दो बोतल पानी मांगा टू-वॉटर तो उसने पुष्टि करने के लिए पूछा, दो-पानी? वैसे पानी वहाँ बोतल-बंद पानी का एक ब्राँड है. वसुधैव कुंटुंबम... भला हो उन बांग्लादेशी युवकों का जिनमें से एक ने समझाया कि ये छात्र सरकार के उच्चशिक्षा संबंधी नए प्रस्तावों का विरोध कर रहे हैं. फ़िलहाल ग्रीस में उच्च शिक्षा सरकारी सेक्टर में आती है और बिलकुल मुफ़्त है. छात्रों की चिंता है कि निजी संस्थानों के लिए उच्च शिक्षा खोलने के सरकार के प्रस्ताव शिक्षा व्यवस्था को ठेस पहुँचाएँगे. जिस बांग्लादेशी युवक ने हमें यह ज्ञान दिया वह ख़ुद ढाका से इंटर पास करके एथेंस आया है. लेकिन उच्च शिक्षा के लिए नहीं, काम की तलाश में. उस जैसे और भी हैं-शकील, शुजा, नज़रुल इस्लाम, विवेकानंद. कोई ढाका से आया है, कोई खुलना से तो कोई चटगाँव से. सबकी आँखों में थके हुए सपने हैं. सबकी मंज़िल एक है-बेहतर जीवन. और सब एक ही रूट से एथेंस पहुँचे हैं.
एजेंट को लगभग 20-25 लाख बांग्लादेशी टाका देकर सड़क के रास्ते पहले पाकिस्तान, फिर ईरान, वहाँ से तुर्की और तुर्की से एथेंस. पूछने पर मालूम हुआ, अब तक कोई दस-बारह हज़ार बांग्लादेशी पहुँच चुके हैं. कोई 'एक्रोपोलिस' के खंडहरों के नीचे धूप के चश्मे बेचता हुआ दिखाई देता है, कोई 'मोनास्तिराकी' के इलाक़े में लगने वाले इतवार बाज़ार में पुराने सामान की दुकान में नज़र आता है, तो कोई पर्यटन स्थलों पर सैलानियों को फूल बेचता हुआ. तेरी महफ़िल में सनम... युवाओं की इस भीड़ में अधेड़ से दिखने वाले विवेकानंद भी हैं. बड़े गर्व से बताते हैं कि बेटी ने जादवपुर विश्विद्यालय से बीए पास किया है. बेटा भी पढ़ रहा है. ख़ुद एथेंस में फूल बेचते हैं और न सिर्फ़ अपना गुज़ारा करते हैं बल्कि घर पैसे भी भेजते हैं. एथेंस के आसपास बहुत से छोटे-छोटे द्वीप हैं. ऐसा ही एक द्वीप है 'एजीना'. जैसे ही स्पीडबोट 'एजीना' पहुँची, किनारे उतरते ही कानों में हिंदी गाने की आवाज़ आई-तेरी महफ़िल में सनम चले आए... नज़र उठा कर देखा तो एक बांग्लादेशी युवक खड़ा था. एक कंधे पर धूप के चश्मों का झोला और दूसरे पर कैसेट प्लेयर. नाम था नज़रुल इस्लाम. यूनान की फ़िज़ा में यह हिंदी फ़िल्मी गीत दक्षिण एशिया के इस युवक के ख़्वाबों के सफ़र का साथी बन गया लगता है. लेकिन यह इस बात का संकेत नहीं है कि बॉलीवुड के हाथ एथेंस तक भी पहुँच गए हैं. हाँ, एक दिन शरत बाबू के देवदास से ज़रूर भेंट हुई. बड़ी सी किताबों की दुकान में जहाँ पूरी शेल्फें प्लेटो, अरस्तू, सोफ़ोक्लीज़ तथा अन्य ग्रीक विद्वानों की कृतियों से भरी हुई थीं, एक शेल्फ़ पर विदेशी भाषाओं की पुस्तकें सजी थीं. उन्हीं में से एक देवदास का ग्रीक अनुवाद था. किताब के कवर पर ऐश्वर्या राय, माधुरी दीक्षित और शाहरुख़ ख़ान की तस्वीरें देखीं तो सोचा वह दिन ज़्यादा दूर तो नहीं... | इससे जुड़ी ख़बरें खंडहर बोलते हैं...पत्रिका अचला शर्मा की कुछ कविताएँ26 अक्तूबर, 2006 | पत्रिका बीबीसी हिंदी सेवा प्रमुख की दुनिया20 सितंबर, 2005 | पहला पन्ना उजाले के लिए छटपटाता रेडियो:अचला शर्मा 27 जून, 2004 | पहला पन्ना अचला शर्मा को पद्मानंद साहित्य सम्मान27 जून, 2004 | पहला पन्ना आप भी सुन सकते हैं 'रेस'29 दिसंबर, 2004 | पत्रिका फिर चला बीबीसी हिंदी का कारवाँ08 मार्च, 2005 | भारत और पड़ोस | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||