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तेज़ रफ़्तार होती ज़िंदगी... | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मनोवैज्ञानिकों ने एक अध्ययन में पाया है कि भागदौड़ भरी ज़िंदगी ने लोगों को सामान्य चाल भी तेज़ कर दी है और पिछले क़रीब एक दशक में लोगों की चाल में दस फ़ीसदी की तेज़ी आई है. ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ़ हर्टफोर्डशायर ने दुनिया के 32 शहरों में अध्ययन करने के बाद पाया कि लोगों के पैदल चलने की रफ़्तार पिछले एक दशक में दस फ़ीसदी बढ़ गई है. सिंगापुर के लोग सबसे अधिक हड़बड़ी में पाए गए और उनकी चाल सबसे तेज़ है. इस मामले में कोपेनहेगन दूसरे और मैड्रिड तीसरे नंबर पर है. न्यूयॉर्क, जो दुनिया का सबसे व्यस्त और भागदौड़ वाला शहर माना जाता है, इस तालिका में आठवें और लंदन 12वें पायदान पर है. शोधकर्ताओं का कहना है कि दुनिया के सभी बड़े शहरों में लोगों की रफ़्तार पहले के मुकाबले बढ़ी है और इससे शहरों के 'सामाजिक स्वास्थ्य' के बारे में पता चलता है. ज़िंदगी प्रभावित इससे से अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि बढ़ती रफ़्तार का असर अब अधिक लोगों पर पड़ेगा और इससे ज़िंदगी भी प्रभावित होगी. इस तरह का अध्ययन दस साल पहले कैलीफ़ोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी के अमरीकी मनोवैज्ञानिक रॉबर्ट लेवीन ने किया था.
इस अध्ययन का नेतृत्व करने वाले ब्रितानी मनोवैज्ञानिक प्रोफ़ेसर रिचर्ड वाइज़मैन का कहना था, "इस साधारण आकलन से शहरों में लोगों के शारीरिक और सामाजिक स्वास्थ्य के बारे में पता चलता है. क़दम चाल में तेज़ी से और भी ज़्यादा लोग प्रभावित होंगे क्योंकि शहरों की आबादी तेज़ी से बढ़ती जा रही है." प्रोफ़ेसर रिचर्ड वाइज़मैन के नेतृत्व में यह नया अध्ययन ब्रिटिश काउंसिल के सहयोग से किया गया है जो 109 देशों में सांस्कृतिक संबंधों को बढ़ावा देने का काम करती है. शोधकर्ताओं ने 32 प्रमुख शहरों में सड़कों के किनारे बने फुटपाथों का जायज़ा लिया और देखा कि चौड़े और सपाट फुटपाथ थे जो काफ़ी इस्तेमाल होने से चिकने हो चुके थे. उन फुटपाथों पर इतनी जगह होती है कि काफ़ी लोग और तेज़ रफ़्तार से एक साथ उस पर चल सकें. शोधकर्ताओं ने 35 पुरुष और महिलाओं की चाल की रफ़्तार आँकने के लिए घड़ी का सहारा लिया और यह जानने की कोशिश की कि पगडंडी पर 60 फ़ीट की दूरी तय करने के लिए वे कितना समय लेते हैं. पुरुषों की चाल महिलाओं के मुक़ाबले 25 प्रतिशत तेज़ पाई गई. | इससे जुड़ी ख़बरें बेहतर आईक्यू बनाता है शाकाहारी15 दिसंबर, 2006 | विज्ञान भारत में तेज़ी से बढ़ रहे हैं मधुमेह रोगी05 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस उंगलियों के निशान और जीवनशैली...02 अप्रैल, 2006 | विज्ञान सृजनशील लोगों पर बरसता है प्यार30 नवंबर, 2005 | विज्ञान ज़्यादा वज़न, हृदय रोगों का ख़तरा ज़्यादा26 सितंबर, 2004 | विज्ञान 'पिता बनने की क्षमता घटाए मोबाइल'28 जून, 2004 | विज्ञान पिज़्ज़ा बचाए कैंसर से?22 जुलाई, 2003 | विज्ञान विवाह न करने से समस्या22 मई, 2003 | पहला पन्ना इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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