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सुरेश ऋतुपर्ण की कविताएँ | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
जापान में पतझर निक्को के पर्वत-शिखरों पर तैल-रंगों सी छायाएँ उन की निक्को के पतझर ने आज ********************** बरसात चलती है हवा तो हो जाती है बरसात
थर-थर काँपती घाटी चलती है हवा तो सिहर उठता है आसमान पर छाए हैं बसंती फूलों पर ********************** वसंत वसंत से वसंत की राह में ********************** | इससे जुड़ी ख़बरें होली के रंग, गीतों के संग...02 मार्च, 2007 | पत्रिका नरेश शांडिल्य के दोहे01 दिसंबर, 2006 | पत्रिका ज्ञानेंद्रपति की कविताएँ16 नवंबर, 2006 | पत्रिका लक्ष्मीशंकर वाजपेयी की ग़ज़लें21 दिसंबर, 2006 | पत्रिका राधा, कुरूक्षेत्र में:वीरेंद्र गुप्त की कविता25 जनवरी, 2007 | पत्रिका जयकृष्ण राय तुषार के गीत01 फ़रवरी, 2007 | पत्रिका | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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