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गंगा में छोड़ा गया अतिरिक्त पानी | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
धार्मिक दृष्टि से पवित्र माने जाने वाली गंगा को साफ़ करने के लिए इसमें इलाहाबाद के निकट नहरों और झीलों से अतिरिक्त पानी छोड़ा गया है. अर्धकुंभ के दौरान शाही स्नान के लिए इलाहाबाद स्थित संगम तट पर लाखों श्रद्धालु जमा हो रहे हैं. इस अवसर पर कुछ साधुओं ने गंगा का पानी दूषित होने पर शाही स्नान के बहिष्कार की धमकी दी थी. कुछ ने तो आत्म हत्या तक की धमकी दे रखी थी. 45 दिनों तक चलने वाले अर्धकुंभ के अवसर पर अभी तक यहाँ पचास लाख श्रद्धालु जमा हो चुके हैं. अर्धकुंभ मेला प्रत्येक 12 वर्षों पर लगता है. हिंदुओं की मान्यता है कि गंगा, यमुना और काल्पनिक सरस्वती नदी के संगम स्थान पर स्नान करने से पाप धूल जाते हैं. नदी को साफ़ करने के लिए नहरों और झीलों से साफ़ पानी गंगा में छोड़ा गया है. एक स्थानीय अधिकारी आरएन त्रिवेदी ने समाचार एजेंसी एपी को बताया कि, "गंगा में समुचित मात्रा में ताज़ा और साफ़ पानी है और यह स्नान के लिए उपयुक्त है". सालों से शहरों और उद्योगों की गंदगी डालने के कारण गंगा का पानी दूषित हो गया है. तीन जनवरी से शुरू होने वाला अर्द्धकुंभ दुनिया के सबसे बड़े मेलों में से एक माना जाता है. उम्मीद की जा रही है कि इस असात करोड़ लोग आएंगे. | इससे जुड़ी ख़बरें सदानीरा गंगा मेले से पहले मैली02 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस पौष पूर्णिमा स्नान के साथ अर्धकुंभ शुरू03 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस पहले दिन का स्नान शांतिपूर्ण संपन्न03 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस अर्धकुंभ में शाही स्नान पर भ्रम की स्थिति14 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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